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धर्म-आध्यात्म

29 जून को खुलेगा मां विंध्यवासिनी का मंदिर, जानिए कौन-कौन नहीं जा सकेंगे दर्शन करने

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29 जून को खुलेगा मां विंध्यवासिनी का मंदिर, जानिए कौन-कौन नहीं जा सकेंगे दर्शन करने

धार्मिक डेस्क,देशज टाइम्स। 29 जून को प्रसिद्ध मां विंध्यवासिनी का मंदिर खुलेगा। मगर कई नियमों के साथ इसे खोलने की तैयारी चल रही है। पहला, सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन करना होगा।

जानकारी के अनुसार, 29 जून को मंदिर सभी लोगों के लिए खुल जाएगा। 28 जून को स्थानीय लोगों के लिए पहले विंध्याचल मां विंध्यवासिनी का मंदिर खोला जाएगा।

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इससे पहले 27 जून को मंदिर प्रांगण में मां का भजन व कीर्तन जय मां दुर्गा जय मां तारा का आयोजन किया जाएगा। इसके बाद बाद 28 जून को पूर्ण आहुति के बाद स्थानीय लोगों के बाद दूर दराज से आए लोग मां का दर्शन व पूजन कर सकेंगे।

वहीं, 10 साल तक के बच्चों, गर्भवती महिलाओं व 60 साल के ऊपर के लोग मंदिर में प्रवेश नही कर सकेंगे।

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कपिलेश्वर महादेव परिसर था सील, पूजा पर रोक, प्रवेश द्वार पर ही जलाभिषेक कर भक्त दिखे विभोर

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कपिलेश्वर महादेव परिसर था सील, पूजा पर रोक, प्रवेश द्वार पर ही जलाभिषेक कर भक्त दिखे विभोर

मधुबनी, देशज टाइम्स ब्यूरो। पहली सोमवारी पर बाबा कपिलेश्वर मंदिर में पूजा-अर्चना करने के लिए दिनभर श्रद्धालु आते रहे। सुबह में जिला प्रशासन व रहिका थाना पुलिस ने कपिलेश्वर मंदिर kapileshwar mahadev parishar के सभी प्रवेश द्वार को सील कर घेराव कर दिया।

 

कोरोना के कारण सोशल डिस्टेसिंग एवं सेनिटाइज करने के निर्देश पर आस्था भारी पड़ रहा था। कांवड़ियों की भीड़ जमा नही थी,लेकिन सालों भर शिव की भक्ति करने वाले लोग अपने आराध्य देव को गंगाजल व दूध से अभिषेक करने की परम्परा में जुटे हुए थे।

 

भक्तों ने देशज टाइम्स को बताया, सपनों में नही सोचा था, स्वस्थ रहते हुए सावन में भोलेनाथ kapileshwar mahadev parishar  की पूजा अर्चना करने में परेशानी होगी। सावन में भोलेनाथ के दरबार भक्तों की गूंज से सुहाना लगता था। लेकिन कोरोना ने भक्तों के आस्था को कमजोर कर दिया। जहां मंदिर के आस पास के क्षेत्र में चहल पहल व उत्साह का परवान चढ़ा रहता था। लेकिन प्रशासनिक सख्ती के आदेश ने प्राचीन तीर्थ स्थल कपिलेश्वर के नाम के अनुरूप सुनसान जगह बना दिया।

 

कोरोना लॉकडाउन अवधि में प्रशासन ने मंदिर kapileshwar mahadev parishar  के पूजा अर्चना व्यवस्था को रोक नही लगाई। दो दिन पूर्व कुछ ऐहतियात बरतने की जानकारी पुलिस ने पूजा समिति को दी थी। पूजा समिति के अध्यक्ष सदाशिव झा व सचिव मुनु पंडा ने देशज टाइम्स को बताया, प्रशासन की ओर से कोरोना संक्रमण की सुरक्षा के सभी निर्देशों का अनुपालन करने का आदेश दिया है।

कपिलेश्वर महादेव परिसर था सील, पूजा पर रोक, प्रवेश द्वार पर ही जलाभिषेक कर भक्त दिखे विभोरप्रशासन की ओर से मंदिर सहित बाहरी परिसर को सेनिटाइज नही किया गया है।  मंदिर kapileshwar mahadev parishar  में पूजा अर्चना पर रोक लगाई गई है। श्रद्धालुओं के आस्था के अनुरूप पूजा व जलाभिषेक करने की कोई खास पहल नही की गई।

श्रद्धालु मंदिर के प्रवेश द्वार पर ही फूल, अक्षत व जलाभिषेक कर अपनी आस्था जता रहे थे। सोमवारी व्रत करने वाले भक्त बाबा कपिलेश्वर मंदिर kapileshwar mahadev parisharके त्रिशूल का दर्शन कर प्रणाम करते रहे।

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बाबा बैद्यनाथ के भक्त मोबाइल से कर सकते हैं कामना लिंग का साक्षात दर्शन, यहां देखिए लिंक

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बाबा बैद्यनाथ के भक्त मोबाइल से कर सकते हैं कामना लिंग का साक्षात दर्शन, यहां देखिए लिंक
धनबाद,देशज न्यूज। वैश्विक महामारी कोविड-19 के बढ़ते संक्रमण के कारण इस वर्ष देवघर में राजकीय श्रावणी मेला 2020 Devotees of Baba Baidyanath can have a vision of Linga throu का आयोजन नहीं किया जा रहा है।
इस संबंध में धनबाद डीसी अमित कुमार ने कहा, कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के कारण देवघर में आयोजित होने वाले राजकीय श्रावणी मेला 2020 का आयोजन इस वर्ष नहीं किया जा रहा है। परंतु भक्त Devotees of Baba Baidyanath can have a vision of Linga throu अपने मोबाइल से jhargov.tv के माध्यम से बाबा मंदिर के गर्भ गृह में अवस्थित कामना लिंग का साक्षात दर्शन कर सकते हैं।
उपायुक्त ने लोगों से अपील करते हुए कहा,कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण से अपने को सुरक्षित रखने के लिए देवघर Devotees of Baba Baidyanath can have a vision of Linga throu का रूख न करें। भक्त अपने मोबाइल पर कामना लिंग के साक्षात दर्शन करें।
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धर्म-आध्यात्म

इतिहास में पहली बार बिना श्रद्धालुओं के निकली तीन रथों पर सवार भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा

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इतिहास में पहली बार बिना श्रद्धालुओं के निकली तीन रथों पर सवार भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा

श्रद्धालुओं ने टेलीविजन के जरिए रथयात्रा को देखा,किए दर्शन

पुरी, देशज न्यूज। आषाढ मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि पर मंगलवार को श्रीजगन्नाथ मंदिर से तीनों रथों की यात्रा शुरू हुई। इतिहास में पहली बार ऐसा हो रहा है कि बिना भक्तों के रथयात्रा निकाली जा रही है। कोविड-19 की स्थिति को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार रथ यात्रा में श्रद्धालु शामिल नहीं हो पाए। रथ यात्रा में केवल सेवायत व सुरक्षाकर्मी ही थे। श्रद्धालुओं ने टेलीविजन के जरिए रथयात्रा को देखा।
सुबह तीन बजे से मंगल आरती के साथ रथयात्रा की नीति शुरू हुई। इसके बाद मइलन, तडपलागी, रोष होम व इसके बाद अवकाश नीति का संपादन किया गया। इसके बाद सूर्य पूजा, द्वारपाल पूजा हुई। इसके बाद गोपालबल्लभ भोग व खिचडी भोग किया गया। श्रीमंदिर के पुरोहितों ने सिंहद्वार के सम्मुख खडे तीनों रथों की प्रतिष्ठा की।
महाप्रभु को मंगलार्पण किये जाने के बाद धाडी पहंडी की प्रक्रिया शुरू हुई। तीनों भगवान धाडी पहंडी के जरिये अपने अपने रथों तक आये। सबसे पहले चक्र राज सुदर्शन व देवी सुभद्रा को पहंडी कर उनके रथ दर्पदलन में आरुढ करवाया गया। इसके बाद भगवान बलभद्र धाडी पहंडी के जरिये अपने रथ तालध्वज में आरुढ हुए। सबसे अंत में भगवान जगन्नाथ पहंडी के जरिए उनके रथ नंदीघोष में आरुढ हुए।
भगवान जगन्नाथ, बलभद्र व देवी सुभद्रा के रथारुढ होने के बाद पुरी के गोवर्धन पीठ के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने तीनों रथों पर जाकर भगवान के दर्शन किए। उनके साथ उनके शिष्यों ने भी दर्शन किए।
इसके बाद की रीति नीति का अनुपालन होने के पश्चात भगवान जगन्नाथ के आद्य सेवक माने जाने वाले पुरी के गजपति महाराज दिव्य सिंह देव राजनअर (राजप्रासाद) से यहां पहुंचे तथा तीनों रथों में छेरा पहँरा की नीति संपन्न की।
इसके बाद रथों की खींचने की प्रक्रिया शुरू हुई। सबसे पहले भगवान बलभद्र की रथ तालध्वज को खींचने की प्रक्रिया शुरू हुई। इसके बाद देवी सुभद्रा की दर्पदलन व सबसे अंत में नंदीघोष रथ को खींचा गया।
उधर, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार प्रशासन ने पुरी जिले में सोमवार रात से शटडाउन (कर्फ्यू जैसी) की घोषणा की थी जो बुधवार दोपहर 12 बजे तक रहेगी। पुरी पहुंचने के सभी मार्गों को सील कर दिया गया है। इसके लिए 50 पलाटून फोर्स तैनात की गई है।
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