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देशभक्ति से ओतप्रोत माहौल में स्वतंत्रता दिवस पर छा गए 10 हाथों वाले पीएम नरेंद्र मोदी

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देशभक्ति से ओतप्रोत माहौल में स्वतंत्रता दिवस पर छा गए 10 हाथों वाले पीएम नरेंद्र मोदी

आजादी की 74वीं वर्षगांठ पर वाराणसी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दस हाथों वाला खास पेंटिग सुर्खियों में है। हर्षोल्लासपूर्ण देशभक्ति से ओतप्रोत माहौल में लोग इसे खूब सराह रहे हैं।

वाराणसी, देशज न्यूज। आजादी की 74वीं वर्षगांठ पर वाराणसी में हर्षोल्लासपूर्ण देशभक्ति से ओतप्रोत माहौल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दस हाथों वाला खास पेंटिग छा गया है। लोग लगातार दूसरे दिन रविवार को भी इसको खूब पसंद कर लाइक व शेयर कर रहे हैं।

पेंटिग में कलाकार ने प्रधानमंत्री की दस जनकल्याणकारी प्रमुख योजनाओं को भुजा बनाकर दर्शाया है। इसमें स्किल इंडिया, बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ, स्वच्छता अभियान, प्रधानमंत्री धन-जन योजना, डिजिटल इंडिया, उज्ज्वला योजना, मेक इन इंडिया, राफेल और वैश्विक महामारी कोरोना काल में सरकार के प्रयास शामिल है। इसे वाराणसी के ही कलाकार अरविंद कुमार विश्वकर्मा ने बनाया है। Prime Minister Modis tenhanded painting dominated social media becoming a favoriteस्व

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पाकिस्तान में राज कपूर और दिलीप कुमार के पुश्तैनी घर खरीदेगी खैबर पख्तूनख्वा सरकार

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पाकिस्तान में राज कपूर और दिलीप कुमार के पुश्तैनी घर खरीदेगी खैबर पख्तूनख्वा सरकार
पाकिस्तान में राज कपूर और दिलीप कुमार के पुश्तैनी घर खरीदेगी खैबर पख्तूनख्वा सरकार

कराची, देशज न्यूज।  पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा की प्रांतीय सरकार ने बॉलीवुड के महान अभिनेताओं राज कपूर व दिलीप कुमार के पुश्तैनी घरों को खरीदने का फैसला किया है। केपी सरकार ने यह फैसला जर्जर हालत में पड़ीं इन ऐतिहासिक इमारतों के संरक्षण के लिए किया है। इन पर विध्वंस का खतरा भी मंडरा रहा है।

जानकारी के अनुसार, खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में पुरातत्व विभाग ने दोनों इमारतों की खरीद के लिए पर्याप्त राशि आवंटित करने का निर्णय किया है।दोनों अभिनेताओं के पुश्तैनी मकानों को सरकार की ओर से राष्ट्रीय धरोहर घोषित किया जा चुका है। ये इमारतें पेशावर शहर के मध्य में स्थित हैं।

राज कपूर के बेटे और दिग्गज अभिनेता ऋषि कपूर के अनुरोध पर साल 2018 में पाक सरकार ने कपूर हवेली को संग्रहालय में परिवर्तित करने का फैसला किया था। हालांकि, दो साल बाद भी यह फैसला अमल में नहीं आ पाया है. बता दें कि पेशावर में ऐसी करीब 1800 ऐतिहासिक इमारतें हैं जो 300 साल से भी ज्यादा पुरानी हैं।

राज कपूर का पुश्तैनी घर कपूर हवेली प्रसिद्ध किस्सा ख्वानी बाजार में स्थित है। इसका निर्माण दिग्गज अभिनेता के जदादा दीवान बशेस्वरनाथ कपूर ने साल 1918 से 1922 के बीच करवाया था। राज कपूर व उनके चाचा त्रिलोक कपूर का जन्म यहीं हुआ था। प्रांतीय सरकार ने इसे राष्ट्रीय धरोहर घोषित किया था।

पुरात्तव विभाग के अध्यक्ष डॉ. अब्दुस समाद खान ने कहा, पेशावर के डिप्टी कमिश्नर को इस संबंध में एक पत्र भेजा गया है. इस पत्र में दोनों ऐतिहासिक इमारतों की कीमत निर्धारित करने को कहा गया है, जहां भारतीय सिनेमा के दो सितारों का जन्म हुआ और विभाजन से पहले जहां उन्होंने अपना शुरुआती जीवन गुजारा।

बताया, दोनों इमारतों के मालिकों ने प्रमुख स्थान पर होने के चलते व्यावसायिक प्लाजा के निर्माण के लिए इमारतों को ढहाने के कई प्रयास किए, लेकिन इन इमारतों के ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए पुरातत्व विभाग ने इनके संरक्षण का फैसला लिया। इन्हें ढहाने की कोशिशों पर रोक लगाई गई।

 

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कर्नाटक में भीषण सड़क हादसा, ट्रक-कार की टक्कर में गर्भवती महिला सहित 7 लोगों की मौत

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कर्नाटक में भीषण सड़क हादसा, ट्रक-कार की टक्कर में गर्भवती महिला सहित 7 लोगों की मौत
कर्नाटक में भीषण सड़क हादसा, ट्रक-कार की टक्कर में गर्भवती महिला सहित 7 लोगों की मौत

बेंगलुरू, देशज न्यूज। कर्नाटक के कलबुर्गी जिले में रविवार सुबह एक कार की एक ट्रक के साथ हुई टक्कर में एक गर्भवती महिला समेत सात लोगों की मौत हो गई। पुलिस ने बताया,सावलागी गांव के पास यह हादसा हुआ, जिसमें चार महिलाओं व तीन पुरुषों की मौत हो गई।

उन्होंने बताया कि ये सातों लोग गर्भवती महिला इरफाना बेगम, अबेदबी, जयचुनबी, रूबिया बेगम, मुनीर, मो.अली व शौखत अलीअलंद तालुक के रहने वाले थे। एक गर्भवती महिला को प्रसव के लिए अस्पताल ले जा रहे थे। उन्होंने बताया, घटना को लेकर मामला दर्ज किया गया है।

अब तक मिली जानकारी के मुताबिक, कालाबुरागी पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया है। दरअसल, कर्नाटक में सड़क हादसे का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी राज्य में कई सड़क हादसे हो चुके हैं।

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लखनऊ में बुद्धिजीवियों का जुटान, हिंदी साहित्य लेखन स्वतंत्र व निष्पक्ष रखने पर दिखा जोर

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लखनऊ में बुद्धिजीवियों का जुटान, हिंदी साहित्य लेखन स्वतंत्र व निष्पक्ष रखने पर दिखा जोर
लखनऊ में बुद्धिजीवियों का जुटान, हिंदी साहित्य लेखन स्वतंत्र व निष्पक्ष रखने पर दिखा जोर

फणींद्र तिवारी लखनऊ, देशज टाइम्स। मार्तण्ड साहित्यिक, सांस्कृतिक व समाजिक संस्था, लखनऊ के तत्त्वावधान में हिंदी पखवाड़े की पंचम काव्य गोष्ठी छत्तीसगढ़ की लोकप्रिय लोक गायिका, साहित्यकार व शिक्षिका लक्ष्मी करियारे  की अध्यक्षता व सुरेश कुमार राजवंशी के संयोजन व कुशल संचालन में संपन्न हुई।

कार्यक्रम का शुभारंभ उत्तराखंड के रामरतन यादव  की वाणी वंदना से हुआ। ऐसा वर दो मातु शारदे मिट जाए मन का अभिमान। लक्ष्मी करियारे ने हिंदी पखवाड़े की पंचम ई सरस काव्य गोष्ठी के अवसर पर कहा, हिंदी साहित्य ही समाज का वास्तविक दर्पण हो सकता है। हिंदी साहित्य लेखन स्वतंत्र व निष्पक्ष होना चाहिए। किसी धर्म या जाति व व्यक्ति विशेष के आधार पर नहीं होना चाहिए। साहित्य का सृजन सर्व समाज के हित को ध्यान में रखकर ही किया जाना चाहिए, साथ ही हिंदी राजभाषा को राष्ट्र भाषा बनाने पर अधिक बल देते कहा, हिंदी हमारे देश की सर्वाधिक बोले जाने वाली तीसरी भाषा है। हिंदी भाषा ही हम सब को समाज से जोड़ने का कार्य करती है।

हमें वैज्ञानिक दृष्टिकोण के आधार पर तर्कसंगत होना चाहिए, जो रूढ़िवादिता से परे हो। सभी कलमकारों को हिंदी पखवाड़े की पंचम सरस गोष्टी व कवि सम्मेलन के अवसर पर हमारी सभी कलमकारों/विदुषी/ विद्वानों को बहुत-बहुत शुभकामनाएँ । कवियत्री सुश्री लक्ष्मी करियारे ने सीमा पर शहीद हुए जांबाज रणबांकुरे की मां की हृदय विदारक संवेदना को अपनी छत्तीसगढ़ी भाषा में कुछ इस तरह सुनाया, सभी की आंख नम हो गई – मोरे राजा दुलरूवा बेटा तुलाकुनि बनिजांऊ मैं खोजूं, भारत भुइयां पर प्राण गवाई।

कवि पंडित बेअदब लखनवी ने पंकज पलाॅस की सुंदर गज़ल – साया बना के रांझे का एक हीर खींच दी, लफ्ज़े वफ़ा की हुबहू तस्वीर खींच दी, पढकर सभी का दिल जीत लिया । वहीं संचालक कवि सुरेश कुमार राजवंशी ने- आयी शाम सुहावनी, खेलू प्रीतम संग, खेल खेल में यूं लगी, साजन तेरे अंग। सुनाकर वाहवाही लूटी।

कवि सत्यपाल सिंह “सजग”ने – चांद निरखते मधुर मिलन की बीत न जाए रात, प्रीतम कहिए मन की बात। सुनाया तो कवि रामरतन यादव ने – बेटी की किलकारी घर में, सुनाकर वाहवाही लूटी। कवि प्रेम शंकर शास्त्री “बेताब” ने वीर सैनिकों की शान में पढ़ा- सरहदें हम बचाते रहे रात -दिन, जान अपनी लुटाते रहे रात-दिन ,माटी चंदन बनी ये मेरे देश की , तन पे उसको लगाते रहे रात-दिन।

कवि सरस्वती प्रसाद रावत ने- धर्म के नाम भारत की आवाम को बंटते देखा है। छत्तीसगढ़ के ही कवि सूरज श्रीवास ने मां की महिमा का बखान करते हुए पढ़ा – मां मेरी भोली भाली है, दुनिया से निराली है। तो कवयित्री रेनू वर्मा ने -बैठ किनारे देख रही थी सागर की गहराई में, डूब रहा था मेरा सूरज अंबर की अंगनाई में ।सुनाकर सभी को भावविभोर कर दिया।

कवि बी सी मेवाती ने – जो शुकून अपने में, वो परायों में कहां, जब अपने ही रूंठ जाएं, तो फिर शिकायत कहां। कार्यक्रम में उपस्थित कवि सर्व पं. बे अदब लखनवी, कवि एस के राजवंशी, कवि सत्यपाल सिंह “सजग” उत्तराखंड, कवयित्री शुचिता अजय श्रीवास्तव उत्तराखंड, कवि रामरतन यादव उत्तराखंड, कवि महेंद्र नारायण पंकज, मधेपुर बिहार, कवि बीसी मेवाती, कवि एस.पी.रावत कवयित्री रेनू वर्मा, कवि प्रेम शंकर शास्त्री बेताब सहित लगभग बीस कवियों ने समसामयिक रचनाओं को सुनाकर श्रोताओं की तालियां बटोरी। अंत में संस्था के अध्यक्ष श्री सरस्वती प्रसाद रावत ने धन्यवाद ज्ञापित कर समारोह का समापन किया।लखनऊ में बुद्धिजीवियों का जुटान, हिंदी साहित्य लेखन स्वतंत्र व निष्पक्ष रखने पर दिखा जोर

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