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परीक्षा रोकने से सुप्रीम कोर्ट का इंकार, तय समय पर ही होंगी NEET और JEE की परीक्षाएं

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JEE NEET Exams to be held per schedule amid coronavirus
#EducationNews परीक्षा रोकने से सुप्रीम कोर्ट का इंकार, तय समय पर ही होंगी NEET और JEE की परीक्षाएं

नई दिल्ली: NEET और JEE परीक्षा रोकने से सुप्रीम कोर्ट ने इंकार कर दिया है. कोरोना के मद्देनजर IIT-JEE और NEET परीक्षा स्थगित करने की मांग वाली याचिका कोर्ट ने खारिज कर दी है. याचिका में कोरोना के मद्देनजर परीक्षा टालने की मांग की गई थी. JEE (मेन) की परीक्षा 1 से 6 सितंबर के बीच और NEET परीक्षा 13 सितंबर को होनी है.

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि क्या देश में सब कुछ रोक दिया जाए? एक कीमती साल को यूं ही बर्बाद हो जाने दिया जाए? याचिकाकर्ता के वकील ने स्वास्थ्य को खतरे का हवाला दिया. लेकिन कोर्ट ने याचिका खारिज की और कहा, सुनवाई की ज़रूरत नहीं समझते. नेशनल टेस्टिंग एजेंसी के लिए पेश हुए सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि परीक्षा करवाना ज़रूरी है.

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लखनऊ में बुद्धिजीवियों का जुटान, हिंदी साहित्य लेखन स्वतंत्र व निष्पक्ष रखने पर दिखा जोर

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लखनऊ में बुद्धिजीवियों का जुटान, हिंदी साहित्य लेखन स्वतंत्र व निष्पक्ष रखने पर दिखा जोर
लखनऊ में बुद्धिजीवियों का जुटान, हिंदी साहित्य लेखन स्वतंत्र व निष्पक्ष रखने पर दिखा जोर

फणींद्र तिवारी लखनऊ, देशज टाइम्स। मार्तण्ड साहित्यिक, सांस्कृतिक व समाजिक संस्था, लखनऊ के तत्त्वावधान में हिंदी पखवाड़े की पंचम काव्य गोष्ठी छत्तीसगढ़ की लोकप्रिय लोक गायिका, साहित्यकार व शिक्षिका लक्ष्मी करियारे  की अध्यक्षता व सुरेश कुमार राजवंशी के संयोजन व कुशल संचालन में संपन्न हुई।

कार्यक्रम का शुभारंभ उत्तराखंड के रामरतन यादव  की वाणी वंदना से हुआ। ऐसा वर दो मातु शारदे मिट जाए मन का अभिमान। लक्ष्मी करियारे ने हिंदी पखवाड़े की पंचम ई सरस काव्य गोष्ठी के अवसर पर कहा, हिंदी साहित्य ही समाज का वास्तविक दर्पण हो सकता है। हिंदी साहित्य लेखन स्वतंत्र व निष्पक्ष होना चाहिए। किसी धर्म या जाति व व्यक्ति विशेष के आधार पर नहीं होना चाहिए। साहित्य का सृजन सर्व समाज के हित को ध्यान में रखकर ही किया जाना चाहिए, साथ ही हिंदी राजभाषा को राष्ट्र भाषा बनाने पर अधिक बल देते कहा, हिंदी हमारे देश की सर्वाधिक बोले जाने वाली तीसरी भाषा है। हिंदी भाषा ही हम सब को समाज से जोड़ने का कार्य करती है।

हमें वैज्ञानिक दृष्टिकोण के आधार पर तर्कसंगत होना चाहिए, जो रूढ़िवादिता से परे हो। सभी कलमकारों को हिंदी पखवाड़े की पंचम सरस गोष्टी व कवि सम्मेलन के अवसर पर हमारी सभी कलमकारों/विदुषी/ विद्वानों को बहुत-बहुत शुभकामनाएँ । कवियत्री सुश्री लक्ष्मी करियारे ने सीमा पर शहीद हुए जांबाज रणबांकुरे की मां की हृदय विदारक संवेदना को अपनी छत्तीसगढ़ी भाषा में कुछ इस तरह सुनाया, सभी की आंख नम हो गई – मोरे राजा दुलरूवा बेटा तुलाकुनि बनिजांऊ मैं खोजूं, भारत भुइयां पर प्राण गवाई।

कवि पंडित बेअदब लखनवी ने पंकज पलाॅस की सुंदर गज़ल – साया बना के रांझे का एक हीर खींच दी, लफ्ज़े वफ़ा की हुबहू तस्वीर खींच दी, पढकर सभी का दिल जीत लिया । वहीं संचालक कवि सुरेश कुमार राजवंशी ने- आयी शाम सुहावनी, खेलू प्रीतम संग, खेल खेल में यूं लगी, साजन तेरे अंग। सुनाकर वाहवाही लूटी।

कवि सत्यपाल सिंह “सजग”ने – चांद निरखते मधुर मिलन की बीत न जाए रात, प्रीतम कहिए मन की बात। सुनाया तो कवि रामरतन यादव ने – बेटी की किलकारी घर में, सुनाकर वाहवाही लूटी। कवि प्रेम शंकर शास्त्री “बेताब” ने वीर सैनिकों की शान में पढ़ा- सरहदें हम बचाते रहे रात -दिन, जान अपनी लुटाते रहे रात-दिन ,माटी चंदन बनी ये मेरे देश की , तन पे उसको लगाते रहे रात-दिन।

कवि सरस्वती प्रसाद रावत ने- धर्म के नाम भारत की आवाम को बंटते देखा है। छत्तीसगढ़ के ही कवि सूरज श्रीवास ने मां की महिमा का बखान करते हुए पढ़ा – मां मेरी भोली भाली है, दुनिया से निराली है। तो कवयित्री रेनू वर्मा ने -बैठ किनारे देख रही थी सागर की गहराई में, डूब रहा था मेरा सूरज अंबर की अंगनाई में ।सुनाकर सभी को भावविभोर कर दिया।

कवि बी सी मेवाती ने – जो शुकून अपने में, वो परायों में कहां, जब अपने ही रूंठ जाएं, तो फिर शिकायत कहां। कार्यक्रम में उपस्थित कवि सर्व पं. बे अदब लखनवी, कवि एस के राजवंशी, कवि सत्यपाल सिंह “सजग” उत्तराखंड, कवयित्री शुचिता अजय श्रीवास्तव उत्तराखंड, कवि रामरतन यादव उत्तराखंड, कवि महेंद्र नारायण पंकज, मधेपुर बिहार, कवि बीसी मेवाती, कवि एस.पी.रावत कवयित्री रेनू वर्मा, कवि प्रेम शंकर शास्त्री बेताब सहित लगभग बीस कवियों ने समसामयिक रचनाओं को सुनाकर श्रोताओं की तालियां बटोरी। अंत में संस्था के अध्यक्ष श्री सरस्वती प्रसाद रावत ने धन्यवाद ज्ञापित कर समारोह का समापन किया।लखनऊ में बुद्धिजीवियों का जुटान, हिंदी साहित्य लेखन स्वतंत्र व निष्पक्ष रखने पर दिखा जोर

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कोरोना से जंग हार गए तेरे मेरे बीच में कैसा है ये बंधन अंजाना,नहीं रहे गायक एसपी बालासुब्रमण्यम

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कोरोना से जंग हार गए तेरे मेरे बीच में कैसा है ये बंधन अंजाना,नहीं रहे गायक एसपी बालासुब्रमण्यम
कोरोना से जंग हार गए तेरे मेरे बीच में कैसा है ये बंधन अंजाना,नहीं रहे गायक एसपी बालासुब्रमण्यम

चेन्नई, देशज न्यूज।  कोरोना से आखिरकार सुप्रसिद्ध पार्श्वगायक 74 वर्षीय एसपी बालासुब्रमण्यम  शुक्रवार को आखिरकार हार गए। एजीएम हेल्थकेयर में उनका निधन हो गया। वह 5 अगस्त को कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे।

चेन्नई के हॉस्पिटल में 52 दिन से एडमिट थे। उनकी हालत खराब होने के मद्देनजर अस्पताल के आसापस सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी। अस्पताल ने इसके पूर्व गुरुवार शाम शाम स्वास्थ्य बुलेटिन जारी कर कहा था, पिछले 24 घंटे के दौरान बालासुब्रमण्यम की स्थिति तेजी से खराब हुई है और उनकी हालत अत्यंत गंभीर बनी हुई है।

 

वह जीवन रक्षक प्रणाली पर हैं। पुलिस उपायुक्त के नेतृत्व में शुक्रवार को सौ से अधिक सशस्त्र पुलिसकर्मियों को तैनात करके अस्पताल को किले में तब्दील कर दिया था। अस्पताल के पास बेरिकेड्स लगाए गए हैं।वैध पहचान पत्र वाले व्यक्तियों को ही अंदर जाने दिया जा रहा है। बालासुब्रमण्य की पत्नी सावित्री, पुत्री पल्लवी व बहन एस पी शौलजा समेत परिवार के अन्य सदस्य आज सुबह अस्पताल में उपस्थित थे।

फिल्म निदेशक भारतीराजा, मनोबाला,वेंकट प्रभु समेत फिल्म उद्योग की प्रसिद्ध हस्तियों ने सुबह अस्पातल पहुंच कर मशहूर गायक की स्थिति के बारे में जानकारी हासिल की। अभिनेता से नेता बने कमल हासन गुरुवार शाम अस्पताल पहुंचे। गायक के स्वास्थ्य के बारे में चिकित्सकों से बात की।

हासन की कई फिल्मों में बालासुब्रमण्यम ने गाना गया है।एसपी बालासुब्रमण्यम को सलमान खान की आवाज माना जाता था। 1989 में रिलीज हुई सलमान की पहली फिल्म ‘मैंने प्यार किया’ में एसपी ने ही गाने गाये थे। सभी गाने सुपरहिट रहे थे। दो दिन पहले बेटे चरण एसपी से कहा था- मुझे जल्दी से जल्दी घर जाना है। 13 अगस्त से बिगड़ गई थी। हालत तब से वेंटिलेटर पर ही थे। एसपी इंस्टाग्राम पर 5 अगस्त को आखिरी बार फैन्स से रूबरू हुए थे व वीडियो पोस्ट कर उन्होंने कहा था कि दो-तीन दिनों से मुझे थोड़ी परेशानी हो रही थी। अस्पताल गया तो डॉक्टरों ने कहा कि यह कोरोना का हल्का मामला है। मैं अस्पताल में भर्ती हो गया। दो दिनों में मैं ठीक हो जाऊंगा। मैं यहां आराम करने के लिए आया हूं, इसलिए आप सभी का कॉल नहीं रिसीव कर सकता।

एसपी का पूरा नाम श्रीपति पंडितराध्युला बालासुब्रमण्यम है। बालू के उपनाम से मशहूर एसपी 16 भारतीय भाषाओं में 40 हजार से ज्यादा गाने रिकॉर्ड किए थे। 2011 में उन्हें पद्म भूषण अवॉर्ड से नवाजा गया था। उनका नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड्स में भी दर्ज है।

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सीएम योगी का बड़ा फैसला, छेड़खानी व रेप करने वाले दुराचारियों के चौराहोंं पर लगेंगे पोस्टर

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सीएम योगी का बड़ा फैसला, छेड़खानी व रेप करने वाले दुराचारियों के चौराहोंं पर लगेंगे पोस्टर
सीएम योगी का बड़ा फैसला, छेड़खानी व रेप करने वाले दुराचारियों के चौराहोंं पर लगेंगे पोस्टर

लखनऊ, देशज न्यूज। यूपी की योगी सरकार महिला अपराध को लेकर और सख्त हो गई है। प्रदेश में महिलाओं के साथ अपराध करने वालों की शामत होगी। सरकार दुराचारियों  के खिलाफ ऑपरेशन दुराचारी चलाएगी। ऐसे अपराधियों के पोस्टर लगाने का आदेश दिया है। योगी ने कहा, कहीं भी महिलाओं के साथ कोई आपराधिक घटना हुई तो संबंधित बीट इंचार्ज, चौकी इंचार्ज, थाना प्रभारी और सीओ जिम्मेदार होंगे।

सीएम योगी ने कहा, महिलाओं व बच्चियों के साथ किसी भी तरह की घटना को अंजाम देने वालों को समाज जाने,  इसलिए चौराहों चौराहों पर लगाओ ऐसे अपराधियों के पोस्टर लगवाएं।

महिलाओं से किसी भी तरह का अपराध करने वाले अपराधियों को महिला पुलिस कर्मियों से ही दंडित कराओ। ऐसे अपराधियों और दुराचारियों के मददगारों के भी नाम उजागर करने का आदेश दिया।

इससे पहले योगी सरकार ने सीएए को लेकर 19 दिसंबर को लखनऊ में हुए प्रदर्शन में सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले लोगों की फोटो, उनके नाम-पते के साथ पोस्टर उनके इलाकों में लगवाया था। नोटिस दी गई थी कि अगर तय वक्त पर इन लोगों ने जुर्माना नहीं चुकाया तो कुर्की की जाएगी।

राज्य सरकार ने भरपाई उपद्रवियों से करवाए जाने की बात कही थी। इसके बाद पुलिस ने फोटो-वीडियो के आधार पर 150 से अधिक लोगों को नोटिस भेजे थे। इनमें जांच के बाद मिले सबूतों के आधार पर प्रशासन ने 57 लोगों को सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का दोषी पाया था।

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