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Begusarai

प्लेटफार्म के कल्लर से चर्चित बच्चों में शिक्षा का अलख जगा रहे शिक्षक दंपती अजीत-शबनम

बेगूसराय, देशज टाइम्स । इस वर्ष गुरुवार को शिक्षक दिवस मनाया जा रहा है। तमाम जगहों पर एक ओर जहां शिक्षक दिवस की तैयारी पूरी कर ली गई है। वहीं, नियोजित शिक्षक जोरदार आंदोलन के लिए पटना कूच कर गये हैं। इन तमाम कवायद के बीच बरौनी जंक्शन पर ‘प्लेटफार्म के कल्लर ‘ के नाम से चर्चित बच्चों के बीच शिक्षा का अलख जगा रहे शिक्षक दंपती अजीत और शबनम को भूलना बेइमानी होगी। स्कूल जाने के बदले सभी बाल अधिकारों से वंचित, भूख, कुपोषण, अशिक्षा, नशा, बाल श्रम, चोरी, पॉकेटमारी, यौन शोषण और वेश्यावृत्ति में लगे बच्चों का दर्द जब किसी ने नहीं सुना तो थक कर बरौनी निवासी अजीत कुमार ने अपनी पत्नी शबनम मधुकर के साथ मिलकर बच्चों की दशा सुधारने के लिए पाठशाला शुरु कर दी। बरौनी जंक्शन के प्लेटफॉर्म नंबर छह-सात के टीपीटी शेड में चल रही  इस पाठशाला में रोज प्रार्थना, चेतना सत्र और योग के बाद शुरू होती है गीत, संगीत और पहेली के माध्यम से पढ़ाई। पढ़ने में लगनशील हो चुके ये  बच्चे नशा छोड़  अब गुड मॉर्निंग, गुड इवनिंग करना सीख चुके हैं।

प्लेटफार्म पर रहने वाले इन बेसहारा बच्चों की  शिक्षा और बाल अधिकार को लेकर इन्होंने कई स्थानीय विद्यालयों के अलावा  सभी अधिकारियों का दरवाजा खटखटाया। डीएम से पीएम तक गुहार लगाई। इसके बाद अपनी नाकामी छुपाने के लिए रेलवे ने ऑपरेशन क्लीन चलाकर कुछ बच्चों को बाल सुधार गृह भेज दिया लेकिन वहां से बच्चे निकल कर आए तो वही हालत हो गई। इसके बाद अजीत और शबनम ने फिर से ऐसे बच्चों को शिक्षित और नशामुक्त कर समाज की  मुख्य धारा से जोड़ने का निश्चय किया। बच्चे सामान्य स्कूलों की तरह रोज प्रार्थना, योग एवं चेतना सत्र करने के बाद गीत, संगीत, पहेली, मुख अभिनय, चित्र, तालियां और चुटकियों जैसी रोचक गतिविधियों के द्वारा भाषा और गणित की पढ़ाई करने लगे हैं। अजीत का बचपन अपने पिता सीताराम पेाद्दार के साथ बरौनी रेलवे प्लेटफार्म पर चाय बेचते हुए गुजरा। संघर्ष के दिनों में इन्होंने रेलवे प्लेटफार्म पर मुफलिसी की जिन्दगी गुजार रहे सैंकड़ों अनाथ, बेसहारा, आश्रयहीन बाल श्रमिक बच्चों की जिन्दगी को काफी करीब से देखा एवं उनके दर्द को महसूस किया। उन्होंने देखा कि पढ़ने-लिखने-खेलने की उम्र में अशिक्षा, भूख, कुपोषण और नशे की गिरफ्त में पड़कर उम्र से पहले ही अपना जीवन और बचपन खो देते हैं।
ऐसे गुमराह हो रहे लाखों बच्चों को शिक्षा और समाज की  मुख्यधारा से जोड़ने को ही शिक्षक अजीत ने बनाया है अपने जीवन का लक्ष्य। शिक्षक अजीत एवं शबनम कहते हैं कि हमारा यह शैक्षणिक एवं नशामुक्ति अभियान ना सिर्फ बरौनी जंक्शन के इन 40 बच्चों के लिए है। बल्कि उन तमाम अनाथ, बेसहारा, आश्रयहीन बच्चों के लिए है जो अशिक्षा, भूख, कुपोषण एवं नशे की गिरफ्त में अपना जीवन और बचपन खो रहे हैं।

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