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मसालों को करें पूजा पाठ में शामिल,कष्टों से मिलेगी मुक्ति,स्वाद के साथ भाग्य बदल सकते हैं मसाले

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मसालों को करें पूजा पाठ में शामिल,कष्टों से मिलेगी मुक्ति,स्वाद के साथ भाग्य बदल सकते हैं मसाले
देशज आध्यात्म। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, खाने में प्रयोग किए जाने वाले मसाले ना सिर्फ स्वाद बढ़ाते हैं बल्कि इनका हमारे जीवन में काफी प्रभाव पड़ता है। यह मसाले हमारे ग्रह-नक्षत्रों को भी प्रभावित करते हैं। दरअसल जितने भी तत्व पृथ्वी पर पाए जाते हैं और उन तत्वों से जो भी चीज बनती हैं। उनका संबंध ग्रह-नक्षत्र से जरूर होता है, और इन्हीं के इर्दगिर्द हमारे जीवन का तानाबाना बुना जाता है।
जानकारी दे रहे शूकर क्षेत्र सोरों के युवा ज्योतिषाचार्य पं. गौरव दीक्षित कहते हैं, आइए देखें कौन सा मसाला, Spices mix in god pray  आपके जीवन में क्या प्रभाव डालता है। किस ग्रह को एक्टिव करके आपको लाभ या नुकसान पहुंचाता है।
 
नमक
खाने का स्वाद बढ़ाने के लिए नमक बहुत महत्वपूर्ण है। नमक का संबंध सूर्य से माना जाता है। नमक आप जल में मिलाकर सूर्य को देते हैं तो यह आपको कर्ज से मुक्ति का रास्ता निकालता है तो वहीं इसका सेवन कुंडली में सूर्य की स्थिति मजबूत करता है और उसके अशुभ प्रभाव को दूर करने का काम करता है।
लाल मिर्च
लाल मिर्च नवग्रहों के सेनापित मंगल ग्रह से संबंधित है। जिनकी कुंडली में मंगल की स्थिति सही नहीं है तो उनको लाल मिर्च का दान करना चाहिए। मंगल जातक को साहसी बनाता है और इसके शुभ प्रभाव से शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है। इसका प्रभाव पारिवारिक जीवन पर भी पड़ता है। वहीं कुंडली में अगर मंगल सही नहीं है तो त्वचा संबंधित कई रोग हो सकते हैं। लाल मिर्च कुंडली में मंगल की स्थिति को मजबूत करता है।
हल्दी
हल्दी कई मायनों में गुणकारी होती है। हल्दी बृहस्पति ग्रह से संबंधित होती है और इसके सेवन से कुंडली में बृहस्पति की स्थिति मजबूत होती है। हल्दी का संबंध बृहस्पति ग्रह से है इसलिए इसके सेवन से व्यक्ति भाग्यशाली होता है और कई क्षेत्रों में लाभ प्राप्त करता है। हल्दी के उपाय करने से बृहस्पति ग्रह कुंडली में मजबूत होते हैं। वहीं कुंडली में अगर बृहस्पति ग्रह की स्थिति सही नहीं है तो जीवन में कई असफलताओं का सामना करना पड़ता है!
जीरा
जीरा राहु-केतु का प्रतिनिधित्व करते हैं। जीरा का निरंतर सेवन करना स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छा माना जाता है। राहु-केतु के शुभ फल की प्राप्ति के लिए मंगलवार के दिन दही में जीरा डालकर प्रयोग करें तो जीवन में सुख-शांति के साथ समृद्धि भी प्राप्त होती है। साथ ही भाग्य भी साथ देता है।
धनिया
धनिया ग्रहों के राजकुमार बुध से संबंधित होता है। धनिया के उपाय करने से कुंडली में बुध की स्थिति मजबूत होती है और घर में बरकत का रास्ता खुलता है। बुध की मजबूत स्थिति से व्यक्ति बौद्धिक रूप से धनी और कुशल वक्ता बनाता है। साथ ही धन के मामले में भी बुध का साथ मिलता है। वहीं इसके अशुभ प्रभाव से जीवन में दरिद्रता आती है और कारोबार में हानि का सामना करना पड़ता है। साथ ही मानसिक रूप से परेशानी आती है।
काली मिर्च
काली मिर्च शनि ग्रह से संबंधित होती हैं और इसके सेवन से कुंडली में शनि की स्थिति मजबूत होती है। अगर शनि अशुभ प्रभाव दे रहा है तो काली मिर्च के उपाय करने चाहिए। शनि ग्रह व्यक्ति को धैर्यवान और साहसी बनाता है। साथ ही जीवन में स्थिरता बनी रहती है और कार्यक्षेत्र में सफलता मिलती है। वहीं शनि जब अशुभ प्रभाव देता है तो जीवन में कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है और व्यक्ति की जिंदगी कारावास जैसी हो जाती है।
अमचूर 
पिसा हुआ आमचूर का संबंध केतु ग्रह से है। केतु केवल अशुभ प्रभाव नहीं देता बल्कि शुभ प्रभावों के लिए केतु को जाना जाता है। कुंडली में अगर केतु शुभ स्थान पर हो तो वह रंक को राजा बना देता है और हर क्षेत्र में सफलता देता है और समस्याओं से मुक्ति दिलाता है। वहीं अशुभ केतु का प्रभाव जीवन में कई समस्याएं लाता है। हर कार्य में बाधा आती है और कालसर्प दोष निर्माण करता है। केतु के अशुभ प्रभाव से मुक्ति के लिए आमचूर का प्रयोग काफी लाभदायक सिद्ध होता है।
गरम मसाला
पिसा हुआ गर्म मसाला राहु का प्रतिनिधित्व करता है। गर्म मसाला जिस तरह खाने का स्वाद बढ़ाता है, उसी तरह कुंडली में राहु का शुभ प्रभाव जीवन में हर खुशी देता है। वह साहस प्रदान करता है और धन मार्ग प्रशस्त करता है। जिस तरह ज्यादा गर्म मसाला खाने को खराब कर देता है, उसी तरह अशुभ राहु के प्रभाव से कोई न कोई बाधा आती रहती है। साथ ही असफलताओं का सामना करना पड़ता है। राहु के शुभ प्रभाव के लिए गर्म मसाला का उपयोग जीवन में समृद्धि लाता है।
मेथी
मेथी मंगल ग्रह से संबंधित होती है। मंगल के शुभ प्रभाव से व्यक्ति किसी के आगे नहीं झुकता और अपनी बात को सही सिद्ध करता है। परिवार में सुख-शांति बनी रहती है और सभी सदस्यों के साथ संबंध मुधर रहते हैं। साथ ही जिस क्षेत्र में अपना योगदान करता है, वहां सफलता मिलती है। कुंडली में मंगल की अशुभ स्थिति से जमीन, परिवार, कर्ज जैसी आदि समस्याओं का सामना करना पड़ता है। साथ ही स्वास्थ्य के मामले में कोई न कोई परेशानी बनी रहती है।

145 साल पुराने दरभंगा से पहली बार खबरों का गरम भांप ...असंभव से आगे देशज टाइम्स हिंदी दैनिक। वेब पेज का संपूर्ण अखबार। दरभंगा खासकर मिथिलाक्षेत्रे, हमार प्रदेश, सारा जहां की ताजा खबरें। रोजाना नए कलेवर में। फिल्म-नौटंकी के साथ सरजमीं को समेटे। सिर्फ देशज टाइम्स में, पढि़ए, जाग जाइए।

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स्वर कोकिला ने फैंस के साथ शेयर किए निजी जिंदगी से जुड़े कुछ अनसुने किस्से

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स्वर कोकिला ने फैंस के साथ शेयर किए निजी जिंदगी से जुड़े कुछ अनसुने किस्से
संगीत देशज।  स्वर कोकिला लता मंगेशकर 91 साल की उम्र में भी सोशल  मीडिया पर काफी सक्रिय रहती हैं और अक्सर अपनी जिंदगी से जुड़ी यादों को फैंस के साथ साझा करती रहती है। हाल ही में दिग्गज गायिका ने अपनी जिंदगी से जुड़ा एक अनसुना किस्सा ट्विटर के जरिये  फैंस के साथ साझा किया है।lata mangeshkar shared a memory।
लता मंगेशकर ट्वीट कर अपनी जिंदगी से जुड़े आज से 79 साल पहले के एक किस्से का जिक्र किया है, जब उन्होंने पहली बार रेडियो पर गाना गाया था। अपने ट्वीट में लता मंगेशकर ने लिखा-‘आज से 79 साल पहले 16 दिसंबर, 1941 को मैंने रेडियो पर पहली बार  गाया। मैंने दो नाट्यगीत गाये थे। जब मेरे पिताजी ने वो सुने तब वो बहुत खुश हुए, उन्होंने मेरी मां से कहा कि लता को आज रेडियो पर सुन कर मुझे बहुत खुशी हुई, अब मुझे किसी बात की चिंता नहीं।
लता मंगेशकर का यह ट्वीट सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। गौरतलब है लता मंगेशकर ने महज पांच साल की उम्र में अपने पिता दीनानाथ मंगेशकर से संगीत की शिक्षा लेनी शुरू कर दी थी। 1942 में इनके पिता का निधन हो गया,जिसके बाद लता ने अपने पूरे परिवार की जिम्मेदारी बखूबी निभाई। साल 1942 में लता ने एक मराठी फिल्म ‘किटी हासल’ में एक गाना ‘नाचूं या गड़े’ गाया था, लेकिन बाद में इस गाना को फिल्म से निकाल दिया था। उसके बाद कुछ लोगों ने लता को यह कहकर रिजेक्ट कर दिया कि उनकी आवाज पतली है।lata mangeshkar shared a memory।
लता को पहली बार मंच पर गाने के लिए 25 रुपये मिले थे। लता मंगेशकर ने 13 साल की उम्र में पहली बार साल 1942 में आई मराठी फिल्म ‘पहली मंगलागौर’ में गाना गाया था। अपने सात दशक के करियर में उन्होंने कई भाषाओं में 30,000 से अधिक गाने गाए हैं। उन्हें 2001 में सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न प्रदान किया गया। लता मंगेशकर को दादा साहेब फाल्के, पद्म विभूषण, पद्म भूषण और तीन नेशनल अवॉर्ड्स सहित कई पुरस्कारों से सम्मानित भी किया है।lata mangeshkar shared a memory।
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खरमास मंगलवार से शुरू, सभी प्रकार के मांगलिक कार्यों में रोक, जानिए मान्यता, क्या करें परहेज

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खरमास मंगलवार से शुरू, सभी प्रकार के मांगलिक कार्यों में रोक

देशज आध्यात्मिक डेस्क। खरमास मंगलवार से प्रारंभ हो गया है। खरमास लगते ही सभी प्रकार के मांगलिक कार्यों में रोक लग गई है। खरमास 14 जनवरी 2021 को समाप्त होगा। धार्मिक और ज्योतिष मान्यता के अनुसार, जब सूर्य देव धनु राशि में प्रवेश करते हैं तो खरमास लग जाता है। Mangalik works will be stopped for one month after the com। 

पौराणिक कथा के अनुसार सूर्यदेव सात घोड़ों के रथ पर सवार होकर लगातार ब्रह्मांड की परिक्रमा करते रहते हैं। कहते हैं कि एक बार उनके घोड़े लगातार चलने और विश्राम न मिलने के कारण भूख-प्यास से बहुत थक गए थे।

भगवान सूर्यदेव उन्हें एक तालाब के किनारे ले गए, लेकिन तभी उन्हें यह आभास हुआ कि अगर रथ रूका तो यह सृष्टि भी रुक जाएगी। उधर तालाब के किनारे दो गधे भी मौजूद थे। ऐसे में सूर्य देव को एक उपाय सूझा। उन्होंने घोड़ों को आराम देने के लिए रथ में गधों को जोत लिया। इस स्थिति में सूर्य देव के रथ की गति धीमी हो गई, लेकिन रथ रुका नहीं। इसलिए इस समय सूर्य का तेज कम हो जाता है।

खरमास में क्या करना चाहिए
1, शास्त्रों के अनुसार खरमास में सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान, संध्या आदि करके भगवान का स्मरण करना चाहिए।
2, खरमास में सूर्यदेव की उपासना करनी चाहिए।
3, खरमास में जगत के पालनहार भगवान विष्णु की पूजा  करना लाभकारी होता है।
4, खरमास में सूर्य देव की उपासना करते हुए सूर्यदेव से सबंधित मंत्रों का जाप करना चाहिए।
5, खरमास में ब्राह्मण, गुरु, गाय एवं साधु-सन्यासियों की सेवा करनी चाहिए।

खरमास में क्या नहीं करें
1, खरमास के दौरान विवाह, गृह प्रवेश आदि मांगलिक कार्य नहीं करने चाहिए।
2, मांस, शहद, चावल का मांड, चैलाई, उड़द, प्याज, लहसुन, नागरमोथा, गाजर, मूली, राई, नशे की चीजें, दाल, तिल का तेल और दूषित अन्न खाने से बचना चाहिए।
3, खरमास में जमीन पर सोना चाहिए, पत्तल पर भोजन करना चाहिए।
4, खरमास में ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए।
5, इस महीने निंदा और झूठ से बचना चाहिए।Mangalik works will be stopped for one month after the com।

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Folk culture is still alive in Bihar: आज भी लोककला संस्कृति को जीवंत है कठघोड़वा नृत्य से

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Folk culture is still alive in Bihar: आज भी लोककला संस्कृति को जीवंत है कठघोड़वा नृत्य से
मनोरंजन ठाकुर, देशज टाइम्स। लोक गायन, लोक नृत्य और लोक संस्कृति के क्षेत्र में बिहार की प्रसिद्धि विश्वस्तरीय है। लोकगीतों पर झूम-झूम कर अपनी कला का प्रदर्शन करने वाले कई नृत्य बिहार में प्रचलित हैं। इसमें से एक है कठघोड़वा नृत्य, जो आज भी लोकगीतों की संस्कृति को जीवंत किए हुए है। कठघोड़वा नृत्य बिहार का प्रसिद्ध लोक नृत्य है। यह नृत्य शादी-विवाह, मुंडन, धार्मिक-अनुष्ठान, पर्व-त्यौहार व मांगलिक समारोहों के अवसर पर शौकिया तौर पर मनोरंजन के लिए किया जाता है।
लकड़ी व बाँस की खपच्चियों द्वारा निर्मित तथा रंग-बिरंगे वस्त्रों के द्वारा सुसज्जित घोड़े की पीठ के ऊपरी भाग में आकर्षक वेशभूषा एवं मेकअप से सजा नर्तक अपनी पीठ से बंधे घोड़े के साथ नृत्य करता है। जब नर्तक परम्परागत लोक-वाद्यों के साथ नृत्य करता है, तो उसका नृत्य देखते ही बनता है। इस लोक कला को पांच से सात लोगों का समूह प्रस्तुत करता है। मृदंग व झाल की धुन पर दल के लोग गाते हैं। गले में बांस के बने घोड़े के ढांचे को लटका कर एक व्यक्ति घुड़सवार सैनिक बनकर नृत्य करता है। कठघोड़वा के कलाकार किसी भी फिल्मी, भक्ति, देसी गाना की धुन पर जब थिरकते हैं, तो बच्चे और युवा ही नहीं वृद्ध भी उसके सुर में ताल मिलाने लगते हैं।
यही कारण है, बिहार में आज भी कठघोड़वा लोक नृत्य बहुत लोकप्रिय है और खासकर सम्पन्न परिवारों के विवाह समारोहों में अधिकतर देखने को मिलता है जो हमारी बिहारी लोक संस्कृति का पर्याय है। आधुनिकता की दौड़ में विलुप्त हो रही लोक कलाओं में कठघोड़वा नृत्य की परंपरा भी अब दम तोड़ रही है।
बिहार में इस पारंपरिक लोक कला के कद्रदान अब गिने-चुने हैं। इस लोककला को सीखने का उत्साह भी नई पीढ़ी में नहीं है। जिन उम्रदराज कलाकारों के पास यह कला है वे यदा-कदा अपने शौक से इसका प्रदर्शन करते हैं। कठघोड़वा नाट्य मंडली की मांग खत्म होने के साथ इनका वजूद भी खत्म होता जाता रहा है।
गांवों में अस्सी के दशक तक कठघोड़वा नाट्य मंडली सक्रिय थे। नब्बे के दशक में इलेक्ट्रानिक संचार माध्यमों के प्रति बढ़े आकर्षण में पारंपरिक कठघोड़वा नृत्य की चमक फीकी पड़ गई और शादी तथा अन्य मांगलिक और धार्मिक आयोजनों पर होने वाले कठघोड़वा नृत्य पर वीसीआर, सिनेमा प्रोजेक्टर, आर्केस्ट्रा और डीजे आदि मनोरंजन के संसाधन हावी होते गए।
अब लोग डीजे की धुन पर अपने धन के साथ तन को भी हानी पहुंचा रहे हैं। हालत यह हो गया है कि शहर तो शहर गांव के भी बच्चों को नहीं पता है कि कठघोड़वा होता क्या है ? दो दशक पहले तक शादी विवाह के अवसर पर यह नृत्य देखने को मिल जाता था, लेकिन अब यह नृत्य बड़ी मुश्किल से देखने में आता है। गांव के कुछ इलाके हैं जहां विभिन्न समारोह में लोग कठघोड़वा को बुलाते हैं और उसके साथ ताल में ताल मिलाकर झूमते हैं।
ऐतिहासिक धरोहर एवं लोक परंपरा को बचाने के प्रयास में लगे डॉ. रमण झा तथा लोक कला के जानकार कौशल किशोर क्रांति कहते हैं कि संस्कृति ने हमें विश्व गुरू के रूप में प्रतिष्ठित किया है। अतीत की परम्परा को अगर नई पीढ़ी को दिखाया-सिखाया जाय तो नया इतिहास बनेगा। आकर्षक वेशभूषा एवं मेकअप से सज नर्तक बन परम्परागत लोक वाद्ययंत्रों के साथ नृत्य करता है, तो उसका नृत्य देखते ही बनता है। जो आज के कर्णभेदी यंत्रों से कई गुणा सुन्दर व कर्णप्रिय होते हैं और आनंद की गंगोत्री सुरभित करती है।
कठघोड़वा नृत्य कथा तो एकमात्र चर्चा है असल में हमें बिहारी सभ्यता-संस्कृति, लोकगीत, लोककथा, लोकनृत्य आदि को बचाने की जरूरत है जिससे जीवन और इससे जुड़े जीव बच सकें।
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