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20 नवंबर से गुरु का मकर राशि में प्रवेश, जानें क्या होगा आपकी राशि पर असर

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20 नवंबर से गुरु का मकर राशि में प्रवेश, जानें क्या होगा आपकी राशि पर असर

देशज टाइम्स आध्यात्मिक डेस्क। 20 नवंबर से गुरुदेव मकर राशि मे प्रवेश करेंगे, गुरुदेव मकर राशि मे प्रवेश करते आगामी 10 अप्रैल तक शनि गुरु की युति मकर राशि मे हो जायेगी, 30 मार्च 2020 को मकर राशि मे गुरु आते ही भारत मे लॉक डाउन की घोषणा हुई थी, वही ग्रह योग फिर आ रहे है,30 मार्च से 20 जून तक यह युति थी इस  समावधि मे ही भारत ने लॉकडोउन् झेला था, वही ग्रह योग फिर आ रहे है, अभी कुछ यूरोप के देशो ने फिर से लॉकडोउन् लगाया है,इसलिए आंशिक तौर पर इस संभावना से इंकार नही किया जा सकता.

*नीच राशि राशि का गुरु और अर्थ व्यवस्था*-

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गुरु ग्रह से विश्व स्तर पर शांति और व्यवस्था देखी जाती है, अर्थ व्यवस्था पर इस ग्रह का खास प्रभाव होता है, आकाश मंडल मे इस ग्रह की अच्छी स्थिति विश्व स्तर मे शांति और उन्नति का मार्ग प्रशस्त करती है,जब भी यह ग्रह अपनी नीच राशि मे आता है अर्थ व्यवस्था को डगमगाता है, किसी महामारी या प्राकृतिक प्रकोप के कारण संसार मे अव्यवस्था फैलती है, कर्फ्यू, आपात काल जैसी स्थिति बनती है,पिछले 30 मार्च से 20 जून के बीच मे जब गुरु मकर राशि मे शनि के साथ था तब विश्व और भारत मे कितने बुरे हालत थे, देश ये सब देख चुका है,यह स्थिति फिरसे बन रही है.

*मकर राशि मे गुरु जब आयेंगे तब शनि पहले ही विद्यमान रहेंगे, यानी न्यायाधीश, गुरुदेव दोनो एक साथ मकर राशि मे विराजमान रहेंगे.

*शनि और गुरु का साथ भ्रमण*

20  नवंबर से 10 अप्रैल तक आकाश मंडल मे बड़ा परिवर्तन होने जा रहा है, गुरु अपनी  नीचे राशि जो की शनि देव की स्वराशि है उसमे शनि के साथ बैठेंगे,शनि का एक साथ बैठना विश्व समाज के लिए एक अच्छा संकेत नही है,विश्व के कुछ हिस्सों मे कोरोना तथा आतंकवाद से जुड़ी घटनाओ के कारण आपात काल जैसी स्थिति का योग बन रहा है, कोरोना जैसी महामारी से निपटने के लिए विश्व स्तर मे एक साथ युद्ध स्तर मे प्रयास किये जायेंगे.

*आकाशीय युद्ध, आकाश पर प्रभाव दिखाने की होड़ मची हुई थी, चूंकि अब पृथ्वी तत्व का जोर चलेगा, मतलब अब समाज जनता और जमीन से जुड़े मुद्दों पर काम होगा, नीच का गुरु अर्थ व्यबस्था को चौपट करेगा.

*कोरोना वायरस, आतंकवाद तथा पर्यावरण मे हो रहे खतरे को देखते हुए पश्चिम देश युद्ध स्तर मे कोई बड़ी कार्यवाही कर सकते है, कोरोना पूरे विश्व समाज को एकसूत्र मे बांध कर नई सोच को विकसित करेगा.

* सामाजिक आंदोलन क़े योग बनेंगे.

* दक्सिन पश्चिम मे किसी बड़े गठबंधन का योग, कोरोना से निबटने के लिए विश्व स्तर मे संगठन का योग.

*सेना औऱ पुलिस सख्ती से उपद्रवी तत्वो से निपटेंगे.

*लाल औऱ नीली वस्तुओ मे तेजी का योग.

*खाद्य पदार्थो की कीमतों मे आग लगेगी, जमाखोरी,काला बाजारी के योग.

*कीमती धातु महंगी होने के योग.सोने, चांदी मे तेजी के योग.

*दक्सिन पश्चिम मे मिसाइलों क़े विशेष प्रयोग द्बारा युद्ध क़े संकेत.

*कोई घटना बड़े युध्द या आपसी झड़प को दिखाएगी.

*रूस,ईरान,अरब, अमेरिका मे जमीनी युद्ध या शक्ति प्रदर्शन का योग.

*मिसाइल युध्द औऱ अंतरिक्ष मे दबदबे के लिए शक्तिशाली देशो मे होड़ बढ़ेगी.

*दक्सिन पश्चिम मे कही भूकंप, सुनामी और ज्वालामुखी का योग.

*दक्सिनी चीन सागर मे चीन को कठिन चुनोती मिलेगी.

*मेष,सिंह, धनु के लिए मान सम्मान और धन वृद्धि और राज्य से लाभ का योग, गुरुओं की कृपा मिलेगी.

*वृश्चिक और धनु राशि वालो को धन देने वाला रहेगा.

*मीन और धनु राशि वालो के लिए सर्वश्रेष्ठ.

*वृषभ और मकर वालो के लिए भाग्यवर्धक् बुरे समय का खात्मा.

*मिथुन राशि वालो क़े लिए मिलाजुला रहेगा.

*मेष राशि

इस राशि के जातकों के लिए गुरु का राशि परिवर्तन शानदार औऱ भाग्यवर्धक रहेगा. इस राशि के जातकों को अपने साहस और पराक्रम से कार्य करने होंगे तभी कामयाबी मिलेगी, भूमी भवन  बंधु-बांधवों से जुड़े कार्यों मे सफलता का योग,वरिष्ठ लोगो से मदद मिलेगी,गुरुजनों की विशेष कृपा होगी, राज्य से जुड़े कार्यों मे सफलता का योग.

*वृषभ राशि

वृषभ राशि वालों को गुरु के गोचर के गोचर भाग्यवर्धक रहेगा, कार्यो मे आने वाली रुकावटें खत्म होगी,  इस राशि के लिए लंबे समय से आ रहा खराब समय समाप्त होगा.

*मिथुन राशि

आपके लिए यह गोचर मिश्रित फलकारक होगा. इस दौरान आपको व्यापार मे थोड़ी दिक्कत हो सकती है.  मीठे शब्दों के कारण कोई विशेष कार्य हो सकता है, रिश्तेदारों से लाभ हो सकता है, जीवनसाथी औऱ व्यापार से जुड़े सहयोगियो के साथ क्रोध औऱ उग्रता से बचें.

*कर्क राशि

इस राशि के जातकों के लिए गुरु का गोचर शुभ  रहेगा. यह आपके धन में वृद्धि ला सकता है जो की आपके व्यापार को प्रभावित करेगा. सुख की वृद्धि के साथ-साथ आपको धन लाभ भी हो सकती है. शत्रुओं के कारण कोई कार्य होगा, विदेश से मदद मिलेगी.

*सिंह राशि

भूमि भवन से जुड़े कार्य से धन लाभ के योग,इस राशि वाले जातकों को गुरु के गोचर अनुसार धनलाभ होगा. आपकी आर्थिक स्थिति अच्छी हो जाएगी वहीं आपकी शुभ कार्यों में रुचि बढ़ेगी. स्वास्थ्य उत्तम रहेगा. संतान सुख प्राप्त हो सकता है,नौकरी मे अधिकार औऱ बल की वृद्धि होगी,शिक्षा,संतान औऱ मित्रो से विशेष लाभ होगा, शत्रु परास्त होंगे, मुकदमो मे जीत मिलेगी.

*कन्या राशि

इस राशि वाले को वाहन, मकान औऱ सामाजिक कार्यों मे सावधानी रखनी पड़ेगी,अग्नि, बिजली से क्षति औऱ नुकसान का योग,इससे बचें,क्रोध के कारण होने वाले झगड़ों औऱ विवादो से दूर रहे.

*तुला राशि

तुला राशि वाले जातकों के लिए गुरु का गोचर  विशेष फल  प्रदान करेगा. इस गोचर के अनुसार आपके सभी कार्यों में विघ्न दूर होंगे यात्राएं लाभ देंगी आपके लिए फलदायक हो सकती है, भूमि, भवन, वाहन से लाभ.

*वश्चिक राशि

इस राशि वाले जातकों के लिए गुरु का गोचर के दौरान भाग्यवर्धक् लाभ का योग,आपको आर्थिक क्षेत्र मे विशेष सफलता का योग, विद्यार्थियों को सफलता प्राप्त होगी जिससे मन प्रसन्न रहेगा. प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता प्राप्त होगी. शिक्षा से जुड़े जातकों को विशेष लाभ प्राप्त होगा.

*धनु राशि

इस राशि वाले जातकों को लिए अत्यंत शुभ समय,धन मान सम्मान मे वृद्धि का योग, शिक्षा,धर्म से जुड़े कार्यो मे विशेष सफलता का योग, इस दौरान आपकी मित्रों व संबंधियों से मदद मिल सकती है. व्यवसाय व नौकरी मे  पदोन्नति व मान सम्मान का योग, आर्थिक योग विशेष रूप से लाभ देंगे.

*मकर राशि

मकर राशि वाले जातकों की को गुरु के गोचर से विशेष लाभ देगा,मकान, वाहन, भवन आदि से जुड़े कार्यों मे विशेष सफलता का योग,,लड़ाई मुकदमो,अग्नि,विद्युत से जुड़े कार्यो मे विजय प्राप्त होगी, अहंकार से बचें.

*कुंभ राशि

आपकी राशि वाले जातक इस समय विशेष सावधानी रखें,गुरु का गोचर आपके लिए  तकलीफ दायक हो सकता है,जिसके कारण आपको शरीर से जुड़ी तकलीफ के योग बनेंगे, मित्रोँ से मदद मिलेगी,वाक् चातुर्य से कार्यों में लाभ होगा,धनलाभ के खास योग, अत्यधिक भाग दौड़ से बचे, उग्रता बिल्कुल न रखेरखे, खुद को शांत रखे.

*मीन राशि

मीन राशि वाले जातकों को गुरु का गोचर नौकरी औऱ कर्मक्षेत्र मे मान सम्मान औऱ पदोन्नति का कारण बनेगा

भूमि से लाभ का योग, धनयोग प्रबल है, शुभ समय का लाभ उठावे.

145 साल पुराने दरभंगा से पहली बार खबरों का गरम भांप ...असंभव से आगे देशज टाइम्स हिंदी दैनिक। वेब पेज का संपूर्ण अखबार। दरभंगा खासकर मिथिलाक्षेत्रे, हमार प्रदेश, सारा जहां की ताजा खबरें। रोजाना नए कलेवर में। फिल्म-नौटंकी के साथ सरजमीं को समेटे। सिर्फ देशज टाइम्स में, पढि़ए, जाग जाइए।

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स्वर कोकिला ने फैंस के साथ शेयर किए निजी जिंदगी से जुड़े कुछ अनसुने किस्से

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स्वर कोकिला ने फैंस के साथ शेयर किए निजी जिंदगी से जुड़े कुछ अनसुने किस्से
संगीत देशज।  स्वर कोकिला लता मंगेशकर 91 साल की उम्र में भी सोशल  मीडिया पर काफी सक्रिय रहती हैं और अक्सर अपनी जिंदगी से जुड़ी यादों को फैंस के साथ साझा करती रहती है। हाल ही में दिग्गज गायिका ने अपनी जिंदगी से जुड़ा एक अनसुना किस्सा ट्विटर के जरिये  फैंस के साथ साझा किया है।lata mangeshkar shared a memory।
लता मंगेशकर ट्वीट कर अपनी जिंदगी से जुड़े आज से 79 साल पहले के एक किस्से का जिक्र किया है, जब उन्होंने पहली बार रेडियो पर गाना गाया था। अपने ट्वीट में लता मंगेशकर ने लिखा-‘आज से 79 साल पहले 16 दिसंबर, 1941 को मैंने रेडियो पर पहली बार  गाया। मैंने दो नाट्यगीत गाये थे। जब मेरे पिताजी ने वो सुने तब वो बहुत खुश हुए, उन्होंने मेरी मां से कहा कि लता को आज रेडियो पर सुन कर मुझे बहुत खुशी हुई, अब मुझे किसी बात की चिंता नहीं।
लता मंगेशकर का यह ट्वीट सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। गौरतलब है लता मंगेशकर ने महज पांच साल की उम्र में अपने पिता दीनानाथ मंगेशकर से संगीत की शिक्षा लेनी शुरू कर दी थी। 1942 में इनके पिता का निधन हो गया,जिसके बाद लता ने अपने पूरे परिवार की जिम्मेदारी बखूबी निभाई। साल 1942 में लता ने एक मराठी फिल्म ‘किटी हासल’ में एक गाना ‘नाचूं या गड़े’ गाया था, लेकिन बाद में इस गाना को फिल्म से निकाल दिया था। उसके बाद कुछ लोगों ने लता को यह कहकर रिजेक्ट कर दिया कि उनकी आवाज पतली है।lata mangeshkar shared a memory।
लता को पहली बार मंच पर गाने के लिए 25 रुपये मिले थे। लता मंगेशकर ने 13 साल की उम्र में पहली बार साल 1942 में आई मराठी फिल्म ‘पहली मंगलागौर’ में गाना गाया था। अपने सात दशक के करियर में उन्होंने कई भाषाओं में 30,000 से अधिक गाने गाए हैं। उन्हें 2001 में सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न प्रदान किया गया। लता मंगेशकर को दादा साहेब फाल्के, पद्म विभूषण, पद्म भूषण और तीन नेशनल अवॉर्ड्स सहित कई पुरस्कारों से सम्मानित भी किया है।lata mangeshkar shared a memory।
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खरमास मंगलवार से शुरू, सभी प्रकार के मांगलिक कार्यों में रोक, जानिए मान्यता, क्या करें परहेज

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खरमास मंगलवार से शुरू, सभी प्रकार के मांगलिक कार्यों में रोक

देशज आध्यात्मिक डेस्क। खरमास मंगलवार से प्रारंभ हो गया है। खरमास लगते ही सभी प्रकार के मांगलिक कार्यों में रोक लग गई है। खरमास 14 जनवरी 2021 को समाप्त होगा। धार्मिक और ज्योतिष मान्यता के अनुसार, जब सूर्य देव धनु राशि में प्रवेश करते हैं तो खरमास लग जाता है। Mangalik works will be stopped for one month after the com। 

पौराणिक कथा के अनुसार सूर्यदेव सात घोड़ों के रथ पर सवार होकर लगातार ब्रह्मांड की परिक्रमा करते रहते हैं। कहते हैं कि एक बार उनके घोड़े लगातार चलने और विश्राम न मिलने के कारण भूख-प्यास से बहुत थक गए थे।

भगवान सूर्यदेव उन्हें एक तालाब के किनारे ले गए, लेकिन तभी उन्हें यह आभास हुआ कि अगर रथ रूका तो यह सृष्टि भी रुक जाएगी। उधर तालाब के किनारे दो गधे भी मौजूद थे। ऐसे में सूर्य देव को एक उपाय सूझा। उन्होंने घोड़ों को आराम देने के लिए रथ में गधों को जोत लिया। इस स्थिति में सूर्य देव के रथ की गति धीमी हो गई, लेकिन रथ रुका नहीं। इसलिए इस समय सूर्य का तेज कम हो जाता है।

खरमास में क्या करना चाहिए
1, शास्त्रों के अनुसार खरमास में सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान, संध्या आदि करके भगवान का स्मरण करना चाहिए।
2, खरमास में सूर्यदेव की उपासना करनी चाहिए।
3, खरमास में जगत के पालनहार भगवान विष्णु की पूजा  करना लाभकारी होता है।
4, खरमास में सूर्य देव की उपासना करते हुए सूर्यदेव से सबंधित मंत्रों का जाप करना चाहिए।
5, खरमास में ब्राह्मण, गुरु, गाय एवं साधु-सन्यासियों की सेवा करनी चाहिए।

खरमास में क्या नहीं करें
1, खरमास के दौरान विवाह, गृह प्रवेश आदि मांगलिक कार्य नहीं करने चाहिए।
2, मांस, शहद, चावल का मांड, चैलाई, उड़द, प्याज, लहसुन, नागरमोथा, गाजर, मूली, राई, नशे की चीजें, दाल, तिल का तेल और दूषित अन्न खाने से बचना चाहिए।
3, खरमास में जमीन पर सोना चाहिए, पत्तल पर भोजन करना चाहिए।
4, खरमास में ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए।
5, इस महीने निंदा और झूठ से बचना चाहिए।Mangalik works will be stopped for one month after the com।

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Folk culture is still alive in Bihar: आज भी लोककला संस्कृति को जीवंत है कठघोड़वा नृत्य से

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Folk culture is still alive in Bihar: आज भी लोककला संस्कृति को जीवंत है कठघोड़वा नृत्य से
मनोरंजन ठाकुर, देशज टाइम्स। लोक गायन, लोक नृत्य और लोक संस्कृति के क्षेत्र में बिहार की प्रसिद्धि विश्वस्तरीय है। लोकगीतों पर झूम-झूम कर अपनी कला का प्रदर्शन करने वाले कई नृत्य बिहार में प्रचलित हैं। इसमें से एक है कठघोड़वा नृत्य, जो आज भी लोकगीतों की संस्कृति को जीवंत किए हुए है। कठघोड़वा नृत्य बिहार का प्रसिद्ध लोक नृत्य है। यह नृत्य शादी-विवाह, मुंडन, धार्मिक-अनुष्ठान, पर्व-त्यौहार व मांगलिक समारोहों के अवसर पर शौकिया तौर पर मनोरंजन के लिए किया जाता है।
लकड़ी व बाँस की खपच्चियों द्वारा निर्मित तथा रंग-बिरंगे वस्त्रों के द्वारा सुसज्जित घोड़े की पीठ के ऊपरी भाग में आकर्षक वेशभूषा एवं मेकअप से सजा नर्तक अपनी पीठ से बंधे घोड़े के साथ नृत्य करता है। जब नर्तक परम्परागत लोक-वाद्यों के साथ नृत्य करता है, तो उसका नृत्य देखते ही बनता है। इस लोक कला को पांच से सात लोगों का समूह प्रस्तुत करता है। मृदंग व झाल की धुन पर दल के लोग गाते हैं। गले में बांस के बने घोड़े के ढांचे को लटका कर एक व्यक्ति घुड़सवार सैनिक बनकर नृत्य करता है। कठघोड़वा के कलाकार किसी भी फिल्मी, भक्ति, देसी गाना की धुन पर जब थिरकते हैं, तो बच्चे और युवा ही नहीं वृद्ध भी उसके सुर में ताल मिलाने लगते हैं।
यही कारण है, बिहार में आज भी कठघोड़वा लोक नृत्य बहुत लोकप्रिय है और खासकर सम्पन्न परिवारों के विवाह समारोहों में अधिकतर देखने को मिलता है जो हमारी बिहारी लोक संस्कृति का पर्याय है। आधुनिकता की दौड़ में विलुप्त हो रही लोक कलाओं में कठघोड़वा नृत्य की परंपरा भी अब दम तोड़ रही है।
बिहार में इस पारंपरिक लोक कला के कद्रदान अब गिने-चुने हैं। इस लोककला को सीखने का उत्साह भी नई पीढ़ी में नहीं है। जिन उम्रदराज कलाकारों के पास यह कला है वे यदा-कदा अपने शौक से इसका प्रदर्शन करते हैं। कठघोड़वा नाट्य मंडली की मांग खत्म होने के साथ इनका वजूद भी खत्म होता जाता रहा है।
गांवों में अस्सी के दशक तक कठघोड़वा नाट्य मंडली सक्रिय थे। नब्बे के दशक में इलेक्ट्रानिक संचार माध्यमों के प्रति बढ़े आकर्षण में पारंपरिक कठघोड़वा नृत्य की चमक फीकी पड़ गई और शादी तथा अन्य मांगलिक और धार्मिक आयोजनों पर होने वाले कठघोड़वा नृत्य पर वीसीआर, सिनेमा प्रोजेक्टर, आर्केस्ट्रा और डीजे आदि मनोरंजन के संसाधन हावी होते गए।
अब लोग डीजे की धुन पर अपने धन के साथ तन को भी हानी पहुंचा रहे हैं। हालत यह हो गया है कि शहर तो शहर गांव के भी बच्चों को नहीं पता है कि कठघोड़वा होता क्या है ? दो दशक पहले तक शादी विवाह के अवसर पर यह नृत्य देखने को मिल जाता था, लेकिन अब यह नृत्य बड़ी मुश्किल से देखने में आता है। गांव के कुछ इलाके हैं जहां विभिन्न समारोह में लोग कठघोड़वा को बुलाते हैं और उसके साथ ताल में ताल मिलाकर झूमते हैं।
ऐतिहासिक धरोहर एवं लोक परंपरा को बचाने के प्रयास में लगे डॉ. रमण झा तथा लोक कला के जानकार कौशल किशोर क्रांति कहते हैं कि संस्कृति ने हमें विश्व गुरू के रूप में प्रतिष्ठित किया है। अतीत की परम्परा को अगर नई पीढ़ी को दिखाया-सिखाया जाय तो नया इतिहास बनेगा। आकर्षक वेशभूषा एवं मेकअप से सज नर्तक बन परम्परागत लोक वाद्ययंत्रों के साथ नृत्य करता है, तो उसका नृत्य देखते ही बनता है। जो आज के कर्णभेदी यंत्रों से कई गुणा सुन्दर व कर्णप्रिय होते हैं और आनंद की गंगोत्री सुरभित करती है।
कठघोड़वा नृत्य कथा तो एकमात्र चर्चा है असल में हमें बिहारी सभ्यता-संस्कृति, लोकगीत, लोककथा, लोकनृत्य आदि को बचाने की जरूरत है जिससे जीवन और इससे जुड़े जीव बच सकें।
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