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गंगा में जो अस्थियां विलीन हुईं वो हिंदू थी,प्रवाहित,मुंडन कराने वाला कौन,मुस्लिम..यही हिंदुस्तान है

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गंगा में जो अस्थियां विलीन हुईं वो हिंदू थी,प्रवाहित,मुंडन कराने वाला कौन,मुस्लिम..यही हिंदुस्तान है
दुनिया में ऐसे भी लोग हैं जो सारे धर्मों को तिलांजलि देकर सिर्फ मानव धर्म को मानते हैं। इसी मान्यता के अनुरूप अपने सद कार्यों को अंजाम देते हैं, और समाज में चर्चा का विषय बनते है। ऐसा ही एक प्रमाण शूकर क्षेत्र सोरों हर पदी गंगा घाट पर बुधवार की सुबह देखने को मिला। यहां भरतपुर राजस्थान से आए एक मुस्लिम युवक ने हिंदू महिला की अस्थियां विसर्जित की। यही नहीं युवक ने अपना मुंडन भी कराया, कहा मेरी दादी की मित्र थी मैंने अपना फर्ज को अदा किया। यही अपना हिंदुस्तान है,यही ताकत।
कासगंज, देशज न्यूज। देश में ऐसे तमाम लोग हैं जो अलगाव की स्थिति पैदा कर धार्मिक भावनाओं को उद्वेलित करते हैं। जबकि कुछ लोग मानवता का धर्म अपनाकर धार्मिक सीमाओं को तोड़कर अपना फर्ज अदा करते हैं। ऐसा ही राजस्थान के जनपद भरतपुर के कमला रोड निवासी मोहसिन खान ने किया है। बुधवार की सुबह वह अपने दादी की मित्र हिंदू ब्राह्मण जाति की स्वर्गीय त्रिवेणी देवी शर्मा पत्नी गौरी शंकर शर्मा की अस्थियां लेकर सोरों शूकर क्षेत्र के हर पदी गंगा घाट पर पहुंचा। यहां उसने तीर्थ पुरोहित भोला बिहारी के सानिध्य में विधि-विधान पूर्वक गंगा में अस्थियां विसर्जित की। यही नहीं समस्त कर्मकांड के उपरांत युवक ने गंगा घाट पर ही अपना मुंडन भी कराया। गंगा स्नान भी किया।
मोहसिन के मुताबिक त्रिवेणी देवी शर्मा उसकी दादी कि 50 वर्ष पुरानी मित्र थी बीते छह वर्षों से वह परिवार के साथ ही उनके बुजुर्गों की तरह रह रही थी। गायत्री देवी की कोई भी औलाद नहीं थी लगभग पांच वर्ष पूर्व उनका पुत्र भी स्वर्गवासी हो गया था। इसके बाद से ही मोहसिन के पिता ने गायत्री देवी शर्मा की जिम्मेदारी ले ली थी। तब से वह मौहसिन के परिवार का हिस्सा बन गई। 85 वर्ष की उम्र में उनका बीते दिनों देहांत हो गया देहांत के उपरांत मोहसिन ने हीं समस्त अंतिम संस्कार हिंदू रीति रिवाज के मुताबिक संपन्न कराया इसके बाद वह उनकी अस्थियां लेकर यहां पहुंचा है। उसका कहना है कि उसने अपने परिवारिक परंपरा को अंजाम देते हुए अपना दायित्व निभाया है।
इस प्रकरण की पूरे सोरो में जोरदार चर्चा हो रही है। गंगा भक्त समिति के अध्यक्ष सतीश भारद्वाज का कहना है कि लगभग 25 वर्षों से वे तीर्थ पुरोहित के रूप में कार्य कर रहे हैं। लेकिन अब तक उन्होंने इस तरह का प्रमाण देखने को नहीं मिला है। उनका कहना है कि मोहसिन ने हिंदू महिला की अस्थियां विसर्जित कर देश की गंगा जमुनी तहजीब का ज्वलंत प्रमाण दिया है। पूरा कस्बा सोरों इस कार्य की सराहना कर रहा है।

145 साल पुराने दरभंगा से पहली बार खबरों का गरम भांप ...असंभव से आगे देशज टाइम्स हिंदी दैनिक। वेब पेज का संपूर्ण अखबार। दरभंगा खासकर मिथिलाक्षेत्रे, हमार प्रदेश, सारा जहां की ताजा खबरें। रोजाना नए कलेवर में। फिल्म-नौटंकी के साथ सरजमीं को समेटे। सिर्फ देशज टाइम्स में, पढि़ए, जाग जाइए।

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Tulsi VivahDate And Time: इस दिन है तुलसी विवाह, जानें शुभ मुहूर्त और क्या है विवाह विधि

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Tulsi VivahDate And Time: इस दिन है तुलसी विवाह, जानें शुभ मुहूर्त और क्या है विवाह विधि
Tulsi VivahDate And Time: इस दिन है तुलसी विवाह, जानें शुभ मुहूर्त और क्या है विवाह विधि

नई दिल्ली, देशज आध्यात्मिक डेस्क। तुलसी विवाह (Tulsi vivah 2020) हिंदू धर्म का प्रमुख पर्व है, हर साल कार्तिक माह शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि के दिन तुलसी विवाह किया जाता है।

इस साल यह एकादशी तिथि 25 नवंबर को शुरू होकर 26 तारीख को समाप्त होगी. तुलसी विवाह में माता तुलसी का विवाह भगवान शालिग्राम के साथ किया जाता है. मान्यता है कि जो व्यक्ति तुलसी विवाह का अनुष्ठान करता है उसे कन्यादान के बराबर पुण्य फल मिलता है।

तुलसी विवाह भारत के कई सारे हिस्सों में मनाया जाता है, शालिग्राम भगवान विष्णु का ही अवतार माने जाते हैं. पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार तुलसी ने गुस्से में भगवान विष्णु को श्राप से पत्थर बना दिया था. तुसली के इस श्राप से मुक्ति के लिए भगवान विष्णु ने शालिग्राम का अवतार लिया और तुलसी से विवाह किया. तुलसी मैया को मां लक्ष्मी का अवतार माना जाता है। कुछ स्थानों पर तुलसी विवाह द्वादशी के दिन भी किया जाता है।tulsi-vivahdate-and-time-।

तुलसी के पौधे के चारो ओर मंडप बनाएं और तुलसी के पौधे पर लाल चुनरी चढ़ाएं। इसके बाद तुलसी के पौधे को श्रृंगार की चीजें अर्पित करें. भगवान गणेश और भगवान शालिग्राम की पूजा करें. भगवान शालिग्राम की मूर्ति का सिंहासन हाथ में लेकर तुलसीजी की सात परिक्रमा कराएं. आरती के बाद विवाह में गाए जाने वाले मंगलगीत के साथ विवाहोत्सव पूर्ण किया जाता है।tulsi-vivahdate-and-time-।

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20 नवंबर से गुरु का मकर राशि में प्रवेश, जानें क्या होगा आपकी राशि पर असर

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20 नवंबर से गुरु का मकर राशि में प्रवेश, जानें क्या होगा आपकी राशि पर असर
20 नवंबर से गुरु का मकर राशि में प्रवेश, जानें क्या होगा आपकी राशि पर असर

देशज टाइम्स आध्यात्मिक डेस्क। 20 नवंबर से गुरुदेव मकर राशि मे प्रवेश करेंगे, गुरुदेव मकर राशि मे प्रवेश करते आगामी 10 अप्रैल तक शनि गुरु की युति मकर राशि मे हो जायेगी, 30 मार्च 2020 को मकर राशि मे गुरु आते ही भारत मे लॉक डाउन की घोषणा हुई थी, वही ग्रह योग फिर आ रहे है,30 मार्च से 20 जून तक यह युति थी इस  समावधि मे ही भारत ने लॉकडोउन् झेला था, वही ग्रह योग फिर आ रहे है, अभी कुछ यूरोप के देशो ने फिर से लॉकडोउन् लगाया है,इसलिए आंशिक तौर पर इस संभावना से इंकार नही किया जा सकता.

*नीच राशि राशि का गुरु और अर्थ व्यवस्था*-

गुरु ग्रह से विश्व स्तर पर शांति और व्यवस्था देखी जाती है, अर्थ व्यवस्था पर इस ग्रह का खास प्रभाव होता है, आकाश मंडल मे इस ग्रह की अच्छी स्थिति विश्व स्तर मे शांति और उन्नति का मार्ग प्रशस्त करती है,जब भी यह ग्रह अपनी नीच राशि मे आता है अर्थ व्यवस्था को डगमगाता है, किसी महामारी या प्राकृतिक प्रकोप के कारण संसार मे अव्यवस्था फैलती है, कर्फ्यू, आपात काल जैसी स्थिति बनती है,पिछले 30 मार्च से 20 जून के बीच मे जब गुरु मकर राशि मे शनि के साथ था तब विश्व और भारत मे कितने बुरे हालत थे, देश ये सब देख चुका है,यह स्थिति फिरसे बन रही है.

*मकर राशि मे गुरु जब आयेंगे तब शनि पहले ही विद्यमान रहेंगे, यानी न्यायाधीश, गुरुदेव दोनो एक साथ मकर राशि मे विराजमान रहेंगे.

*शनि और गुरु का साथ भ्रमण*

20  नवंबर से 10 अप्रैल तक आकाश मंडल मे बड़ा परिवर्तन होने जा रहा है, गुरु अपनी  नीचे राशि जो की शनि देव की स्वराशि है उसमे शनि के साथ बैठेंगे,शनि का एक साथ बैठना विश्व समाज के लिए एक अच्छा संकेत नही है,विश्व के कुछ हिस्सों मे कोरोना तथा आतंकवाद से जुड़ी घटनाओ के कारण आपात काल जैसी स्थिति का योग बन रहा है, कोरोना जैसी महामारी से निपटने के लिए विश्व स्तर मे एक साथ युद्ध स्तर मे प्रयास किये जायेंगे.

*आकाशीय युद्ध, आकाश पर प्रभाव दिखाने की होड़ मची हुई थी, चूंकि अब पृथ्वी तत्व का जोर चलेगा, मतलब अब समाज जनता और जमीन से जुड़े मुद्दों पर काम होगा, नीच का गुरु अर्थ व्यबस्था को चौपट करेगा.

*कोरोना वायरस, आतंकवाद तथा पर्यावरण मे हो रहे खतरे को देखते हुए पश्चिम देश युद्ध स्तर मे कोई बड़ी कार्यवाही कर सकते है, कोरोना पूरे विश्व समाज को एकसूत्र मे बांध कर नई सोच को विकसित करेगा.

* सामाजिक आंदोलन क़े योग बनेंगे.

* दक्सिन पश्चिम मे किसी बड़े गठबंधन का योग, कोरोना से निबटने के लिए विश्व स्तर मे संगठन का योग.

*सेना औऱ पुलिस सख्ती से उपद्रवी तत्वो से निपटेंगे.

*लाल औऱ नीली वस्तुओ मे तेजी का योग.

*खाद्य पदार्थो की कीमतों मे आग लगेगी, जमाखोरी,काला बाजारी के योग.

*कीमती धातु महंगी होने के योग.सोने, चांदी मे तेजी के योग.

*दक्सिन पश्चिम मे मिसाइलों क़े विशेष प्रयोग द्बारा युद्ध क़े संकेत.

*कोई घटना बड़े युध्द या आपसी झड़प को दिखाएगी.

*रूस,ईरान,अरब, अमेरिका मे जमीनी युद्ध या शक्ति प्रदर्शन का योग.

*मिसाइल युध्द औऱ अंतरिक्ष मे दबदबे के लिए शक्तिशाली देशो मे होड़ बढ़ेगी.

*दक्सिन पश्चिम मे कही भूकंप, सुनामी और ज्वालामुखी का योग.

*दक्सिनी चीन सागर मे चीन को कठिन चुनोती मिलेगी.

*मेष,सिंह, धनु के लिए मान सम्मान और धन वृद्धि और राज्य से लाभ का योग, गुरुओं की कृपा मिलेगी.

*वृश्चिक और धनु राशि वालो को धन देने वाला रहेगा.

*मीन और धनु राशि वालो के लिए सर्वश्रेष्ठ.

*वृषभ और मकर वालो के लिए भाग्यवर्धक् बुरे समय का खात्मा.

*मिथुन राशि वालो क़े लिए मिलाजुला रहेगा.

*मेष राशि

इस राशि के जातकों के लिए गुरु का राशि परिवर्तन शानदार औऱ भाग्यवर्धक रहेगा. इस राशि के जातकों को अपने साहस और पराक्रम से कार्य करने होंगे तभी कामयाबी मिलेगी, भूमी भवन  बंधु-बांधवों से जुड़े कार्यों मे सफलता का योग,वरिष्ठ लोगो से मदद मिलेगी,गुरुजनों की विशेष कृपा होगी, राज्य से जुड़े कार्यों मे सफलता का योग.

*वृषभ राशि

वृषभ राशि वालों को गुरु के गोचर के गोचर भाग्यवर्धक रहेगा, कार्यो मे आने वाली रुकावटें खत्म होगी,  इस राशि के लिए लंबे समय से आ रहा खराब समय समाप्त होगा.

*मिथुन राशि

आपके लिए यह गोचर मिश्रित फलकारक होगा. इस दौरान आपको व्यापार मे थोड़ी दिक्कत हो सकती है.  मीठे शब्दों के कारण कोई विशेष कार्य हो सकता है, रिश्तेदारों से लाभ हो सकता है, जीवनसाथी औऱ व्यापार से जुड़े सहयोगियो के साथ क्रोध औऱ उग्रता से बचें.

*कर्क राशि

इस राशि के जातकों के लिए गुरु का गोचर शुभ  रहेगा. यह आपके धन में वृद्धि ला सकता है जो की आपके व्यापार को प्रभावित करेगा. सुख की वृद्धि के साथ-साथ आपको धन लाभ भी हो सकती है. शत्रुओं के कारण कोई कार्य होगा, विदेश से मदद मिलेगी.

*सिंह राशि

भूमि भवन से जुड़े कार्य से धन लाभ के योग,इस राशि वाले जातकों को गुरु के गोचर अनुसार धनलाभ होगा. आपकी आर्थिक स्थिति अच्छी हो जाएगी वहीं आपकी शुभ कार्यों में रुचि बढ़ेगी. स्वास्थ्य उत्तम रहेगा. संतान सुख प्राप्त हो सकता है,नौकरी मे अधिकार औऱ बल की वृद्धि होगी,शिक्षा,संतान औऱ मित्रो से विशेष लाभ होगा, शत्रु परास्त होंगे, मुकदमो मे जीत मिलेगी.

*कन्या राशि

इस राशि वाले को वाहन, मकान औऱ सामाजिक कार्यों मे सावधानी रखनी पड़ेगी,अग्नि, बिजली से क्षति औऱ नुकसान का योग,इससे बचें,क्रोध के कारण होने वाले झगड़ों औऱ विवादो से दूर रहे.

*तुला राशि

तुला राशि वाले जातकों के लिए गुरु का गोचर  विशेष फल  प्रदान करेगा. इस गोचर के अनुसार आपके सभी कार्यों में विघ्न दूर होंगे यात्राएं लाभ देंगी आपके लिए फलदायक हो सकती है, भूमि, भवन, वाहन से लाभ.

*वश्चिक राशि

इस राशि वाले जातकों के लिए गुरु का गोचर के दौरान भाग्यवर्धक् लाभ का योग,आपको आर्थिक क्षेत्र मे विशेष सफलता का योग, विद्यार्थियों को सफलता प्राप्त होगी जिससे मन प्रसन्न रहेगा. प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता प्राप्त होगी. शिक्षा से जुड़े जातकों को विशेष लाभ प्राप्त होगा.

*धनु राशि

इस राशि वाले जातकों को लिए अत्यंत शुभ समय,धन मान सम्मान मे वृद्धि का योग, शिक्षा,धर्म से जुड़े कार्यो मे विशेष सफलता का योग, इस दौरान आपकी मित्रों व संबंधियों से मदद मिल सकती है. व्यवसाय व नौकरी मे  पदोन्नति व मान सम्मान का योग, आर्थिक योग विशेष रूप से लाभ देंगे.

*मकर राशि

मकर राशि वाले जातकों की को गुरु के गोचर से विशेष लाभ देगा,मकान, वाहन, भवन आदि से जुड़े कार्यों मे विशेष सफलता का योग,,लड़ाई मुकदमो,अग्नि,विद्युत से जुड़े कार्यो मे विजय प्राप्त होगी, अहंकार से बचें.

*कुंभ राशि

आपकी राशि वाले जातक इस समय विशेष सावधानी रखें,गुरु का गोचर आपके लिए  तकलीफ दायक हो सकता है,जिसके कारण आपको शरीर से जुड़ी तकलीफ के योग बनेंगे, मित्रोँ से मदद मिलेगी,वाक् चातुर्य से कार्यों में लाभ होगा,धनलाभ के खास योग, अत्यधिक भाग दौड़ से बचे, उग्रता बिल्कुल न रखेरखे, खुद को शांत रखे.

*मीन राशि

मीन राशि वाले जातकों को गुरु का गोचर नौकरी औऱ कर्मक्षेत्र मे मान सम्मान औऱ पदोन्नति का कारण बनेगा

भूमि से लाभ का योग, धनयोग प्रबल है, शुभ समय का लाभ उठावे.

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कवियों के रसधार के साथ जीवंत हुई साहित्य, दलित-शोषित-निर्बलों को न्याय की उठी आवाज

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कवियों के रसधार के साथ जीवंत हुई साहित्य, दलित-शोषित-निर्बलों को न्याय की उठी आवाज

साहित्य समाज का दर्पण होता है । सही मायने में दलित, शोषित, निर्बलों को न्याय दिलाने के लिए साहित्यकारों को आगे आना चाहिए ।
  डाॅ.माता प्रसाद मित्र (पूर्व राज्यपाल अरुणांचल प्रदेश)

 

रिपोर्ट : फनींद्र तिवारी, देशज टाइम्स। आज मार्तण्ड साहित्यिक, सांस्कृतिक व समाजिक संस्था, लखनऊ के प्रथम स्थापना दिवस पर आयोजित ई सरस कवि सम्मेलन व सम्मान समारोह अरुणाचल प्रदेश के पूर्व राज्यपाल डॉ. माता प्रसाद मित्र की अध्यक्षता व सुरेश राजवंशी के संयोजन में सम्पन्न हुआ।

 

कार्यक्रम का संचालन आचार्य प्रेम शंकर शास्त्री ‘बेताब’ लखनऊ ने किया। मुख्य अतिथि छत्तीसगढ की विदुषी लक्ष्मी करियारे के दीप प्रज्ज्वलन व आचार्य प्रेम शंकर शास्त्री की वाणी वंदना से कवि सम्मेलन का शुभारंभ हुआ।

डाॅ. माता प्रसाद मित्र ने मौके पर कहा, साहित्य का लेखन स्वतंत्र व निष्पक्ष होने के साथ वैज्ञानिक दृष्टिकोण के आधार पर व तर्कसंगत होना चाहिए । जो रूढ़िवादिता से परे हो, ऐसा स्वस्थ साहित्य ही समाज का दर्पण हो सकता है। हमें समाज के दबे कुचले, निर्बलों को न्याय दिलाने के लिए अपनी लेखनी का प्रयोग करना चाहिए । सभी कलमकारों को हमारी शुभकामनाएं।

स्थापना दिवस पर समस्त सम्मानित प्रतिभागी साहित्यकारों को संस्था द्वारा महामहिम के हस्ताक्षरित सम्मान पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।

मुख्य अतिथि लक्ष्मी करियारे ने अपने काव्य पाठ में,पीर को लफ़्ज़ों में अब गाने लगी हूं,झूठा ही सही मुस्कुराने लगी हूं। सुनाकर वाहवाही लूटी तो, छत्तीसगढ़ के ही कवि सूरज श्रीवास ने – “तेरी कातिल अदाओं का हुवा एक दीवाना, समझ न पाया उस महफ़िल को, समा जली थी हासिल करने को, बन्दा था एक निशाना। सुनाया ।

कवि सुरेश कुमार राजवंशी ने ओजस्वी रचना,“मैं महानदी औ सिंधु नदी हूं, ब्रह्मपुत्र का पानी। मैं झलकारी उदा देवी मैं झांसी की रानी हूं। मेरे सीने में रहती है गीता और कुरान भरी, गांधी सुभाष भगत हमीद मैं वह हिंदुस्तानी हूं।।” सुनाकर वाहवाही लूटी तो कवि ललतेश कुमार ने –मैं दरबारों का कवि नहीं , जो उनके गुणों को गाऊंगा। मैं गवांर हूं अपने गांव का सौंधी खुशबू को लाऊंगा। सुनाया।
वहीं कवि रामरतन यादव ने – “नेह का दीप हो, मन में ज्योति जले, तम हमारा मिटे, सत्य के पथ पे चलें, पाप और दोष से, मुक्त मन हो सदा सुनाया तो शायर व हास्य-व्यंग्य कवि पण्डित बेअदब लखनवी ने कवयित्री विजय कुमारी मौर्य की पंक्तियों- वो मेरी सादगी पर मर गया, जिस दिन किया ॠंगार वो बीमार पड़ गया का जबाब देते हुए – अपनी अदाओं नाज़ से कायल बना दिया, तीरे नज़र के वार से घायल बना दिया, होशोहवास में नहीं रहता हूँ इन दिनों, यूँ ‘बेअदब’ को प्यार में पागल बना दिया।” कितनी मोहब्बतों से दिया था तुम्हें मगर, तुमने जला के दिल मेरा काजल बना दिया ।” पढ़कर सभी को हंसा हंसा कर लोटपोट कर दिया।

तो कवि सत्यपाल सिंह ने मां की महिमा का सुन्दर चित्रण अपनी रचना के माध्यम से प्रस्तुत किया – मां के पावन चरणों जैसे दुनियाँ में कोई पांव नहीं,उपकार तेरे लाखों हैं मुझपर तेरे आंचल जैसी छाव नहीं। वहीं कार्यक्रम के कुशल संचालक आचार्य प्रेम शंकर शास्त्री ने – हीरो असली दे गये आजादी के रंग, इसका सब आनंद ले अपने – अपने ढंग” पढ़कर अमर बलिदानियों के योगदान को इंगित किया ।

सरस्वती प्रसाद रावत ने – “बुद्ध बचाओ भारत को, स्मिता देश की खतरे में। जिस धरती पर जन्म लिया,वह धरती आज अंधेरे मे । पढ़कर राष्ट्र की रक्षा के लिए भगवान बुद्ध का आह्वान किया। पं. विजय लक्ष्मी मिश्रा ने – “वही याद आ रहे हैं, जिन्हें हम भूला न पाए। क्यों दूर जा रहे हैं , मुझसे ही मेरे साये।” पढ़कर रिश्तों के ताने बाने का सजीव चित्रण किया। कवयित्री सुनीता यादव ने – संस्था की वर्षगाँठ पर बधाई देते हुए- बधाई हो बधाई सभी को बधाई। मार्तण्ड साहित्यिक मंच को बधाई।। हुआ पूरा एक वर्ष, सैकड़ा भी पूरा हो।” पढ़कर मनमोह लिया।

कार्यक्रम में उपस्थित कवि/कवयित्री सर्वश्री संतोष कुमार, कुमार सत्यपाल सिंह ‘सजग’, अंजलि गोयल, श्रीकांत त्रिवेदी, पं. बेअदब लखनवी , रेनू वर्मा, आकाश अग्रवाल, डॉ. मेहंदी हसन फहमी, सतीश राजकमल खुरपेंची, राकेश दुलारा, मृत्युंजय सिंह चौहान, अरविंद असर, डॉ. नरेश सागर, सुश्री नीलम डिमरी, नीरज कांत रावत, विजय कुमारी मौर्या, रीमा मिश्रा नव्या, कर्नल ल पी गुर्जर लखनवी, सुनीता यादव, धनेश मिश्रा, डॉ. ज्योत्सना सिंह, डॉ. अजय प्रसून सहित चालीस कवियों ने समसामयिक रचनाओं को सुनाकर श्रोताओं की तालियां बटोरी। समारोह में समाज सेवियों ने सहभागिता की। अंत में संस्था के अध्यक्ष सरस्वती प्रसाद रावतने धन्यवाद ज्ञापित कर समारोह का समापन किया।कवियों के रसधार के साथ जीवंत हुई साहित्य, दलित-शोषित-निर्बलों को न्याय की उठी आवाज

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