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अमिताभ ने गुरु पूर्णिमा पर लिखा, चरण स्पर्श, शत शत नमन, गुरु देव गुरु परम, पढ़िए पूरी खबर

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अमिताभ ने गुरु पूर्णिमा पर लिखा, चरण स्पर्श, शत शत नमन, गुरु देव गुरु परम, पढ़िए पूरी खबर

अमिताभ बच्चन ने खास अंदाज में दी गुरु पूर्णिमा की बधाई, शेयर की पिता की तस्वीर

मुंबई, देशज न्यूज।  महानायक अमिताभ बच्चन Amitabh bacchhan  ने गुरु पूर्णिमा के मौके पर सभी को शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने इंस्टाग्राम पर पिता हरिवंश राय बच्चन के साथ अपनी फोटो शेयर की है। Amitabh bacchhan  उन्होंने लिखा-‘कबीरा ते नर अंध है, गुरु को कहते और। हरि रूठे गुरु ठौर है, गुरु रूठे नहीं ठौर।’ इसके साथ ही बिग बी ने आगे लिखा गुरुपूर्णिमा के शुभ अवसर पर, चरण स्पर्श, शत शत नमन, अपने गुरु देव गुरु परम .. परम पूज्य बाबू जी।

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उन्होंने आगे हिंदी में अनुवाद करते हुए लिखा, कबीरदास जी ने सत्य ही कहा है कि यदि परमात्मा रूठ जाए तो गुरु का आश्रय रहता है परंतु गुरु के उपरांत कोई ठौर नहीं रहता। गुरु के बिना ज्ञान नहीं-ज्ञान के बिना संस्कृति नहीं। संस्कृति के बिना संस्कार नहीं-संस्कार के बिना आचरण नहीं।
आचरण के बिना आदर नहीं-आदर के बिना मनुष्यता नहीं। गुरु पूर्णिमा के शुभ अवसर पर सबको हार्दिक शुभकामनाएं!!! आज गुरु पूर्णिमा पर मेरे गुरु जी के चरणों में भी कोटि-कोटि नमन।
अमिताभ ने गुरु पूर्णिमा पर लिखा, चरण स्पर्श, शत शत नमन, गुरु देव गुरु परम, पढ़िए पूरी खबर
दिग्गज अभिनेता अमिताभ बच्चन Amitabh bacchhan लगातार अपने फैंस को कोरोना वायरस के प्रति जागरूक कर रहे हैं। बिग बी ने हाल में दिलचस्प अंदाज में  फैंस से मास्क पहनने की अपील है। शनिवार को बिग बी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट की थी जिसका कैप्शन ‘कानों पे जिम्मेदारी’ था।
अमिताभ बच्चन Amitabh bacchhan ने वीडियो शेयर कर हिंदी और इंग्लिश में लिखा था-‘देवियों और सज्जनों, लेडीज एंड जेंटलमैन, ख्वातीन-ओ-हजरात, जिम्मेदारी कानों की अपनी, सुन लीजिए बात, सुन लेंगे ये बात तो हमारी लाज बनी रह जाएगी, नहीं तो कमला, विमला हमका दौड़-दौड़कर फटकाएंगी।’ यह आर्टिस्टिक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी। नए अभियान ‘कानों पे जिम्मेदारी’ का उद्देश्य लोगों को मास्क लगाने के लिए प्रेरित करना है।

145 साल पुराने दरभंगा से पहली बार खबरों का गरम भांप ...असंभव से आगे देशज टाइम्स हिंदी दैनिक। वेब पेज का संपूर्ण अखबार। दरभंगा खासकर मिथिलाक्षेत्रे, हमार प्रदेश, सारा जहां की ताजा खबरें। रोजाना नए कलेवर में। फिल्म-नौटंकी के साथ सरजमीं को समेटे। सिर्फ देशज टाइम्स में, पढि़ए, जाग जाइए।

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रक्षा बंधन पर ग्रह नक्षत्रों का महासंयोग,बन रहे सर्वार्थसिद्धि-आयुष्मान दीर्घायु योग,ये है शुभ मुर्हूत

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रक्षा बंधन पर ग्रह नक्षत्रों का महासंयोग,बन रहे सर्वार्थसिद्धि-आयुष्मान दीर्घायु योग,ये है शुभ मुर्हूत

दरभंगा, देशज टाइम्स ब्यूरो। भाई -बहन के असीम प्यार का पर्व रक्षाबंधन तीन अगस्त (सोमवार) को मनाया जाएगा। लंबे समय के बाद इस साल रक्षाबंधन के दिन सावन  की अंतिम सोमवारी भी है। वहीं, सर्वार्थसिद्धि और आयुष्मान दीर्घायु योग बन रहे हैं।

 

लेकिन, कोरोना ने इस बार रक्षाबंधन पर भी ग्रहण लगा दिया है। बाजार में बड़ी संख्या में लाई गईंं राखियां बेकार हो गयी हैं।पिछले साल के मुकाबले इस साल 20 प्रतिशत भी राखियों की बिक्री नहीं हुई। इसके कारण बाजार में लाखों की क्षति हुई है। (all life long longevity totals on rakshabandhan) रक्षा बंधन पर ग्रह नक्षत्रों का महासंयोग,बन रहे सर्वार्थसिद्धि-आयुष्मान दीर्घायु योग,ये है शुभ मुर्हूतहालांकि रक्षाबंधन के दिन भी बिक्री की आस लगाए दुकानदार ग्राहकों की बाट जोह रहे हैं। टावर चौक के राखी विक्रेता विनोद कुमार ने बताया, कोरोना के कारण सुरक्षा के दृष्टिकोण से इस बार  पैकेेेेटेड राखियां ही बाजार में आयी हैं। लेकिन ग्राहक गायब हैंं। इसके कारण भारी क्षति हुई है।(all life long longevity totals on rakshabandhan)

 

इधर, अधिकांश बहनों ने राखी से कोरोना का इंफेक्शन फैलने के डर से अपनेे भाइयों की कलाई पर कच्चा धागा बांध कर राखी का फर्ज मनाने की तैयारी की है। मिठाई दुकानों में भी भीड़ कम है, लॉकडाउन  में घर बैठी बहनें अपने घरों में मिठाई तैयार कर चुकी हैं।

महत्वपूर्ण बात यह है कि कोरोना काल में रक्षाबंधन के दिन सर्वार्थसिद्धि और आयुष्मान दीर्घायु का योग बन रहा है। पिछले 29 वर्षों के बाद यह  योग बन रहा है। इसी दिन शिव भक्ति के पावन माह सावन की अंतिम सोमवारी भी है।(all life long longevity totals on rakshabandhan)
पंडित एसएन झा ने बताया, राखी बांधने के समय भद्रा नहीं होनी चाहिए। तीन अगस्त को भद्रा काल सुबह 9:29 बजे तक है। सुबह 9:30 से शाम 4:35 तक बहुत ही शुभ समय है। इसके बाद फिर रात 7:30 बजे से लेकर 9:30 बजे तक राखी बांधने का बहुत ही अच्छा मुहूर्त है।
रक्षाबंधन के दिन अच्छे ग्रह नक्षत्रों का महासंयोग बन रहा है। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है तथा इस संयोग में सारी मनोकामनाएं पूरी होती है। इसके अलावा इस दिन आयुष्मान दीर्घायु का शुभ योग तथा चंद्रमा का श्रवण नक्षत्र है। मकर राशि का स्वामी शनि और सूर्य दोनों आयु को मिलकर बढ़ाते हैं । ऐसा संयोग दो दशक से अधिक समय के बाद बन रहा है।(all life long longevity totals on rakshabandhan) रक्षा बंधन पर ग्रह नक्षत्रों का महासंयोग,बन रहे सर्वार्थसिद्धि-आयुष्मान दीर्घायु योग,ये है शुभ मुर्हूत
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जल प्रलय शुरू ,गुलजार हो गई गढ़पुरा की चर्चित नाव मंडी, दरभंगा के तिलकेश्वर से जुटी है टीम

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जल प्रलय शुरू ,गुलजार हो गई गढ़पुरा की चर्चित नाव मंडी, दरभंगा के तिलकेश्वर से जुटी है टीम

बेगूसराय, देशज न्यूज। बेगूसराय जिले में बाढ़ से हर साल लाखों लोग प्रभावित होते हैं। इस साल भी नदियों का जल स्तर बढ़ने के साथ-साथ लोगों की परेशानी भी बढ़ गई है। लेकिन हर साल आने वाली यह बाढ़ गढ़पुरा के बढ़ई (शर्मा) समाज के लिए किसी वरदान से कम साबित नहीं होती है। (the buzzing boat market of garhpura has become)

 

उत्तर बिहार कु तमाम नदियों में जल स्तर बढ़ने के साथ ही यहां के बढ़ई परिवारों में हरियाली छा गई है। नाव मंडी के रूप में चर्चित गढ़पुरा के 50 से अधिक शर्मा परिवार दिन-रात एक कर नाव बनाने में जुटे हुए हैं।

यहां नाव खरीदने के लिए बेगूसराय के गंगा एवं बूढ़ी गंडक दियारा क्षेत्र के अलावा खगड़िया, मधेपुरा, सहरसा, सुपौल, समस्तीपुर, दरभंगा, मुजफ्फरपुर तथा गंगा के पार के बड़हिया, सूर्यगढ़ा तथा मुंगेर से बड़ी संख्या में लोग आ चुके हैं। नाव बनाने का काम 24 घंटे चल रहा है।जल प्रलय शुरू ,गुलजार हो गई गढ़पुरा की चर्चित नाव मंडी, दरभंगा के तिलकेश्वर से जुटी है टीम
पिछले 15 दिनों में करीब दो सौ से अधिक नावें की बिक्री हो चुकी हैंं तथा अभी भी दो सौ से अधिक लोग नाव खरीदने के लिए लाइन में लगे हुए हैं। आरा मिल पर दिन-रात लकड़ी चिराई हो रही है तथा बढ़ई समाज के लोग नाव बनाने में जुटे हुए हैं। (the buzzing boat market of garhpura has become)
नाव की इस मंडी में बढ़ई समाज के साथ-साथ सैकड़ों अन्य लोगों को भी रोजगार मिला है। कोई नाव बनाने में जुटा हुआ है, कोई नाव गह रहा है और अलकतरा लगा रहा है। अभी तीन तरह की नाव -एकपटिया, पतामी और डेढ़ साली नाव की अधिक बिक्री हो रही है।
नाव बनाने में जुटे राम उदय शर्मा, तेजो शर्मा, नारायण शर्मा ने बताया] गढ़पुरा कई दशकों से नाव निर्माण की चर्चित मंडी है। यहां से बनी नाव की बिहार के कई जिलों में मांग है। खासकर जामुन की लकड़ी की नाव बनायी जाती है, जो  पानी में भी जल्दी नहीं सड़ती है। लकड़ी और नाव की गुणवत्ता के कारण यहां की नाव चर्चित है। (the buzzing boat market of garhpura has become)
इस वर्ष दाम में वृद्धि हुई है, जलई कांटी 80 से एक सौ रुपए प्रति किलो के बदले अभी 150 रुपए किलो में भी आसानी से उपलब्ध नहीं हो पा रही है। छह सौ रुपए प्रति केबी में मिलने वाली लकड़ी एक हजार से 11 सौ रुपए केबी में मिल रही है।
मजदूर चार सौ के बदले सात-आठ सौ रुपये मजदूरी ले रहे हैं। इसके बावजूद लोग गंगा, बूढ़ी गंडक, करेह, कोसी, कमला बलान आदि के जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि के कारण बड़ी संख्या में नाव खरीदने वाले आ रहे हैं तथा हम लोग उपलब्ध करवा रहे हैं।(the buzzing boat market of garhpura has become)
दरभंगा के तिलकेश्वर से पांच लोगों की टोली तीन दिन से यहां रुक कर नाव बनवा रही है ।ये लोग पांच पतामी नाव ले जाएंगे। पंद्रह हजार में सौदा हुआ है, नाव बनायी जा रही है। (the buzzing boat market of garhpura has become)
नाव खरीदने आए रामउदय यादव, विपिन यादव और मुसहरु यादव ने बताया कि हम लोगों के परिवार की जिंदगी हर साल तीन-चार महीने नाव पर गुजरती है। जल स्तर बढ़ने के साथ ही एक कोसी, दूसरी ओर करेह-बागमती और तीसरी ओर कमला बलान के जल प्रलय से घिर जाते हैं। हर पांच-सात साल पर नाव खरीदनी पड़ती है, आखिर करें भी तो क्या इस प्राकृतिक आपदा में। (the buzzing boat market of garhpura has become)
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#DESHAJSTORY कहते प्रवासी, हम पशुओं के लिए हर साल बनते प्रवासी, सैकड़ों किमी जाते पैदल

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#DESHAJSTORY कहते प्रवासी, हम पशुओं के लिए हर साल बनते प्रवासी, सैकड़ों किमी जाते पैदल
दरभंगा,देशज टाइम्स ब्यूरो। वैश्विक महामारी कोरोना के कहर से बचने के लिए हुए लॉकडाउन के कारण देश के तमाम शहरों में काम करने वाले कामगारों के घर वापसी का सिलसिला लगातार जारी है।
काफी दुख-दर्द झेलकर बाहर से लौटे इन प्रवासियों की चिंता हर किसी को है। शासन-प्रशासन से लेकर राजनीतिक दल प्रवासियों के संबंध में रोज बड़ी-बड़ी बातें कर रहे हैं लेकिन बिहार में हजारों ऐसे लोग भी हैं जो हर साल अपने राज्य में ही घर से सैकड़ों किलोमीटर दूर प्रवास करने को मजबूर हैं।
यह प्रवासी हैं किसान पशुपालक, जो कहने को तो भारतीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है लेकिन प्रत्येक साल अपने घर से सैकड़ों किलोमीटर दूर दरभंगा समेत बेगूसराय, समस्तीपुर  व खगड़िया के विभिन्न इलाकों में जाकर रहते हैं। यह लोग सैकड़ों किलोमीटर का रास्ता अपने मवेशियों के साथ पैदल तय करते हैं। करीब तीन महीने तक प्रवास करने के बाद फिर पैदल ही वापस अपने घर लौटते हैं।
इस दौरान कई लोगों की रास्ते में हादसों व सर्पदंश आदि से मौत हो जाती है लेकिन उनका शव भी घर नहीं पहुंच पाता। साथ में रहने वाले पशुपालक ही उनका अंतिम संस्कार कर देते हैं। अन्य साल की तरह इस बार भी फरवरी-मार्च में सैकड़ों पशुपालक अपने घर जमुई, शेखपुरा, नवादा, नालंदा से मवेशी लेकर आए लेकिन यहां उन्हें काफी कष्ट झेलना पड़ा।
कोरोना के डर से स्थानीय लोगों ने उन्हें गांव के आसपास रहने नहीं दिया तो गांव से दूर इन लोगों ने अपना डेरा डाला लेकिन जब घर लौट रहे हैं तो खाली हाथ। कोरोना के कारण इस वर्ष इनका दूध नहीं बिका, बिका तो उचित दाम नहीं मिला, जब दूध का दाम नहीं मिला तो बचत कहां से होगी।
सरकार लंबे समय से बड़े पैमाने पर जल संरक्षण अभियान चला रही है, अब जल जीवन हरियाली अभियान भी जोर-शोर से चलाया जा रहा है लेकिन इन इलाकों में कोई सार्थक पहल नहीं हो रही है जिस कारण यहां के पशुपालक प्रत्येक साल पैदल प्रवास करने को मजबूर हैं।
घर वापस लौट रहे जमुई के राधे यादव व मोहन ने बताया कि कोई भी सरकार हमलोगों के लिए नहीं सोचती है। जिस कारण साल दर साल जलालत झेलनी पड़ती है। अपने मवेशी को लेकर पानी की खोज में घर से दो से ढ़ाई सौ किलोमीटर दूर तक भटकते रहते हैं।
आज पूरा देश वैश्विक महामारी कोरोना से परेशान है, लोग घरों से नहींं निकल रहे हैं लेकिन हम सब अपने मवेशी के जीवन रक्षा और परिवार के भरण-पोषण के लिए प्रत्येक साल की तरह इस साल भी अपने गांव-घर को छोड़कर पांव पैदल निकलते हैं। खुले आसमान के नीचे रह कर अपने पशु को चारा-पानी देते हैं। पानी के लिए होने वाली हमारी यह पदयात्रा प्रत्येक साल मगध से शुरू मिथिला में प्रवास कर समाप्त होती है। इस दौरान दर्जनों पशु काल कलवित हो जाते हैं।
पहले हम लोग अगस्त में घर वापस जाते थे लेकिन इस बार कोरोना के कारण जून में ही अपने घर वापस लौटने को मजबूूर हैं। हम सैकड़ों दुग्ध उत्पादक किसान आखिर करें भी तो क्या, प्रकृति की मार को कुछ कहा नहीं जा सकता है।
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