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तनिष्क के विज्ञापन पर बवाल, भड़के लोग, लव जिहाद को बढ़ावा देने का आरोप

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तनिष्क के विज्ञापन पर बवाल, भड़के लोग, लव जिहाद को बढ़ावा देने का आरोप
तनिष्क के विज्ञापन पर बवाल, भड़के लोग, लव जिहाद को बढ़ावा देने का आरोप

नई दिल्ली। टाटा समूह के मशहूर ज्वैलरी ब्रांड तनिष्क के एक विज्ञापन पर हंगामा शुरू हो गया है। इस विज्ञापन के कारण ट्विटर पर बायकाट तनिष्क ट्रेंड कर रहा है। तनिष्क पर देश में लव जिहाद को बढ़ावा देने के आरोप लग रहे हैं। सोशल मीडिया पर लोगों की नाराजगी के बाद कंपनी ने इस विज्ञापन को हटा दिया है।

तनिष्क ने अपने प्रमोशन के लिए एक नया विज्ञापन जारी किया था। इसमें हिंदू लड़की का मुस्लिम लड़के से शादी विज्ञापन में एक हिंदू महिला की गोदभराई की रस्म कार्यक्रम को दिखाया गया है। इस लड़की की शादी मुस्लिम परिवार में हुई है। इसमें हिंदू संस्कृति को ध्यान में रखते हुए मुस्लिम परिवार सभी रस्मों रिवाजों को हिंदू धर्म के हिसाब से करता दिखाया गया है। इस विज्ञापन में गर्भवती महिला अपनी सास से पूछती है, मां ये रस्म तो आपके घर में होती भी नहीं है, इस पर उसकी सास जवाब देती है कि बिटिया को खुश रखने की रस्म तो हर घर में होती है न।

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तनिष्क ने इस विज्ञापन का नाम एकत्वम रखा है। इसे देखने के बाद यूजर्स इतने नाराज हो गए कि ट्विटर पर बायकाट तनिष्क ट्रेंड करने लगा। विवाद बढऩे के बाद तनिष्क ने इस वीडियो को अपने यूट्यूब चैनल से हटा दिया है।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने तनिष्क के विज्ञापन पर ट्रोल करने वालों को आड़े हाथ लिया है। उन्होंने ट्वीट किया, हिंदुत्व ब्रिगेड ने हिंदू-मुस्लिम एकता को खूबसूरती से दिखाने वाले इस विज्ञापन के चलते तनिष्क का बायकॉट करने की मांग की है। अगर हिंदू-मुस्लिम के एकत्वम से उन्हें इतनी दिक्कत है तो वे पूरी दुनिया में हिंदू-मुस्लिम की एकता के प्रतीक भारत का बायकॉट क्यों नहीं कर देते। वहीं, कांग्रेस नेता अभिषेक सिंघवी ने भी इस पर ट्वीट कर बायकॉट की मांग करने वालों की आलोचना की है।

सोशल मीडिया पर भी यह विज्ञापन को लेकर बहस गर्म है। कोई इसे लव जिहाद को बढ़ावा देने वाला तो कोई इसे हिंदू विरोधी बता रहा है। कई लोगों ने तो तनिष्क के गहने नहीं खरीदने की बात करते हुए इस ब्रांड को बॉयकॉट करने की मांग की है। ट्विटर पर तनिष्क ट्रेंड कर रहा है। इस विज्ञापन के विरोध में कुछ यूजर्स ने लिखा था कि इनमें हमेशा मुस्लिम पति और हिन्दू पत्नी ही क्यों दिखाते हैं, हिंदू पति और मुस्लिम पत्नी क्यों नहीं? एक यूजर ने लिखा कि अगर इसमें हिन्दू पति और मुस्लिम पत्नी को दिखाया गया होता तो देश अब तक जल चुका होता।

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कोयला घोटाला में अटल बिहारी सरकार के पूर्व केंद्रीय मंत्री दिलीप रे को 3 साल की कैद

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कोयला घोटाला में अटल बिहारी सरकार के पूर्व केंद्रीय मंत्री दिलीप रे को 3 साल की कैद
कोयला घोटाला में अटल बिहारी सरकार के पूर्व केंद्रीय मंत्री दिलीप रे को 3 साल की कैद

नयी दिल्ली, देशज न्यूज।  दिल्ली की एक अदालत ने झारखंड में 1999 में कोयला खदान आवंटन में अनियमितताओं के एक मामले में पूर्व केन्द्रीय मंत्री दिलीप रे को सोमवार को तीन साल की सजा सुनाई। अटल बिहारी  सरकार में दिलीप रे कोयला मंत्री थे।

विशेष न्यायाधीश भरत पराशर ने कोयला मंत्रालय के तत्कालीन वरिष्ठ अधिकारी प्रदीप कुमार बनर्जी और नित्या नंद गौतम और कैस्ट्रॉन टेक्नोलॉजी लिमिटिड (सीटीएल) के निदेशक महेन्द्र कुमार अग्रवाल को भी तीन-तीन साल की सजा सुनाई।

अदालत ने इन सभी पर 10-10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। अदालत ने दोषी पाए गई सीएलटी पर 60 लाख रुपये और कैस्ट्रॉन माइनिंग लिमिटिड (सीएमएल) पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।

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केंद्र सरकार की कर्जदारों को बड़ी राहत, 2 करोड़ रुपए के कर्ज के ब्याज पर दी छूट

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केंद्र सरकार की कर्जदारों को बड़ी राहत, 2 करोड़ रुपए के कर्ज के ब्याज पर दी छूट
केंद्र सरकार की कर्जदारों को बड़ी राहत, 2 करोड़ रुपए के कर्ज के ब्याज पर दी छूट

नई दिल्ली, देशज न्यूज। केंद्र सरकार ने कर्जदारों को बड़ी राहत दी है. उसने बैंकों से कर्ज लेने वालों को एक तरह से दिवाली का उपहार तोहफा देते हुए दो करोड़ रुपये तक के कर्ज पर ब्याज से राहत देने की की शुक्रवार को देर रात घोषणा की। यह राहत सभी कर्जदारों को मिलेगा, चाहे उन्होंने किस्त भुगतान से छह महीने की दी गयी छूट का लाभ उठाया हो या नहीं।

वित्तीय सेवा विभाग ने उच्चतम न्यायालय के द्वारा ब्याज राहत योजना लागू करने का निर्देश दिये जाने के बाद इसके परिचालन के दिशानिर्देश जारी कर दिये. इस योजना के क्रियान्वयन से सरकारी खजाने पर 6,500 करोड़ रुपये का बोझ पडऩे का अनुमान है.शीर्ष अदालत ने 14 अक्टूबर को केंद्र को निर्देश दिया था कि वह कोविड-19 महामारी के मद्देनजर रिजर्व बैंक की किस्तों के भुगतान से छूट की योजना के तहत दो करोड़ रुपये तक के कर्ज पर ब्याज माफ करने के बारे में यथाशीघ्र निर्णय ले।

उच्चतम न्यायालय ने कहा था कि आम लोगों की दिवाली अब सरकार के हाथों में है. मंत्रालय के दिशानिर्देशों के अनुसार कर्जदार विनिर्दिष्ट ऋण खातों पर एक मार्च से 31 अगस्त 2020 के लिये इस योजना (ब्याज राहत) का लाभ उठा सकते हैं.इसमें कहा गया, जिन कर्जदारों के ऋण खाते की मंजूर सीमा या कुल बकाया राशि 29 फरवरी तक दो करोड़ रुपये से अधिक नहीं है, वे इस योजना का लाभ उठाने के पात्र होंगे. दिशानिर्देशों में बतायी गयी पात्रता शर्तों के अनुसार, 29 फरवरी तक इन खातों का मानक होना अनिवार्य है।

मानक खाता उन खाताओं को कहा जाता है, जिन्हें गैर निष्पादित संपत्ति (एनपीए) नहीं घोषित किया गया हो. इस योजना के तहत आवास ऋण, शिक्षा ऋण, क्रेडिट कार्ड का बकाया, वाहन ऋण, एमएसएमई ऋण, टिकाऊ उपभोक्ता उत्पाद ऋण और उपभोग ऋण के धारकों को लाभ मिलेगा.योजना के तहत, कर्ज देने वाले संस्थानों को योजना की अवधि के लिये पात्र कर्जदारों के संबंधित खातों में संचयी ब्याज व साधारण ब्याज के अंतर की राशि जमा करनी होगी।

योजना में कहा गया है कि कर्जधारक ने रिजर्व बैंक की ओर से 27 मार्च 2020 को घोषित किस्त भुगतान से छूट योजना का पूर्णत: या अंशत: लाभ का विकल्प चुना हो यह नहीं, उसे ब्याज राहत का पात्र माना जायेगा. कर्ज राहत योजना का लाभ उन कर्जधारकों को भी मिलेगा जो नियमित किस्तों का भुगतान करते रहे.कर्ज देने वाले संस्थान दी गयी छूट के तहत संबंधित राशि कर्जधारक के खाते में जमा करने के बाद केंद्र सरकार से उसके बराबर राशि पाने के लिये दावा करेंगे।

उच्चतम न्यायालय ने 14 अक्टूबर को मामले की सुनवाई करते हुए कहा था, वह इस बारे में चिंतित है कि कर्जदारों को ब्याज राहत का लाभ किस तरह से दिया जाये. उच्चतम न्यायालय ने तब कहा था कि केंद्र सरकार ने आम लोगों की बदहाल स्थिति का संज्ञान लेते हुए अच्छा निर्णय लिया है. हालांकि शीर्ष न्यायालय ने इस बात पर चिंता व्यक्त की थी कि अब तक इस संबंध में कोई आदेश नहीं जारी किया गया है।

न्यायमूर्ति अशोक भूषण की अगुवाई वाली पीठ ने कहा था, कुछ ठोस किए जाने की जरूरत है। जितना जल्दी संभव हो सके, दो करोड़ रुपए तक के कर्जदारों को ब्याज से राहत देने की योजना का क्रियान्वयन किया जाना चाहिए। उच्चतम न्यायालय ने मामले की सुनवाई की अगली तारीख दो नवंबर तय करते हुए कहा बैंकों तथा केंद्र सरकार का पक्ष रख रहे वकीलों से कहा था, लोगों की दिवाली अब आपके हाथों में है।

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फारुक अब्दुला ने कहा- जम्मू-कश्मीर के हक में आवाज करते रहेंगे बुलंद

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फारुक अब्दुला ने कहा- जम्मू-कश्मीर के हक में आवाज करते रहेंगे बुलंद
फारुक अब्दुला ने कहा- जम्मू-कश्मीर के हक में आवाज करते रहेंगे बुलंद

नई दिल्ली, देशज न्यूज। जम्मू कश्मीर (Jammu Kashmir) में धारा 370 हटाने से नाराज राजनीतिक दलों ने केंद्र सरकार पर हमला बोला है। महबूबा मुफ्ती के कल ही विवादित बयान के बाद आज उनके आवास पर बैठक हुई। जिसमें हिस्सा लेने के बाद फारुख अब्दुल्ला ने साफ किया कि जम्मू-कश्मीर के अवाम के लिए आवाज उठाते रहेंगे। उन्होंने कहा कि वे बीजेपी विरोधी है। इसका मतलब यह नहीं कि देशद्रोही हो गए है।

दूसरी तरफ आज पीपल्स अलायंस बैठक हुई। जिसमें फारूक अब्दुल्ला को अध्यक्ष चुना गया। जबकि महबूबा मुफ्ती उपाध्यक्ष रहेगी। इस बैठक में सज्जाद लोन और उमर अब्दुला ने भी हिस्सा लिया। फारुक ने कहा कि संगठन का लक्ष्य सिर्फ लोगों को उसका हक दिलाना है। उन्होंने कहा कि धर्म के नाम पर बांटने की साजिश हमेशा से नाकाम रहेगी। उधर बिहार चुनाव प्रचार के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी ने जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाने का जिक्र किया। जिस पर महबूबा प्रतिक्रिया दे रही थी। वहीं कांग्रेस ने महबूबा के बयान को सोची-समझी राजनीति के तहत दिया गया बयान बताकर निंदा की।

इससे पहले कल ही महबूबा मुफ्ती ने कहा था कि धारा 370 लेकर वे रहेंगी। जब तक फिर से बहाल नहीं हो जाती है. तब तक चुनाव लड़ेगी। इसके साथ ही तिरंगा भी हाथ में लेने से मना कर दिया। जिसके बाद सभी राजनीतिक दलों ने जमकर आलोचना की।

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