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अयोध्या में श्री राम मंदिर के आधारशिला कार्यक्रम में आतंकी जैश-लश्कर के हमले की आशंका

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अयोध्या में श्री राम मंदिर के आधारशिला कार्यक्रम में आतंकी जैश-लश्कर के हमले की आशंका
नई दिल्ली, देशज न्यूज। अयोध्या में राम मंदिर की पांच अगस्त को देश के प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी आधारशिला रखेंगे। खुफिया एजेंसियों ने इस कार्यक्रम के दौरान अयोध्या में आतंकी हमले होने का अलर्ट जारी किया है।
खुफिया एजेंसियों ने आशंका जताई है कि पांच अगस्त को जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी अयोध्या में राम मंदिर के लिए भूमि पूजन के दौरान हमला कर सकते हैं। (Ram mandir- terrorist attack)
सुरक्षा बलों के अनुसार, पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई राम जन्मभूमि स्थल या उसके आसपास बड़े हमले की योजना बना रही है। वहीं सूत्रों का कहना है कि आईएसआई ने जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों को अफगानिस्तान में विशेष प्रशिक्षण दिया है।
एजेंसी के अनुसार, आईएसआई ने तीन से चार आतंकियों को भारत भेजा है और वे अलग-अलग समूहों में आयोध्या में और 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस पर दिल्ली में आतंकी हमले को अंजाम दे सकते हैं। खुफिया एजेंसी की रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ है कि कई वीवीआई भी इन आतंकियों के निशाने पर हैं। (Ram mandir- terrorist attack)

सूत्रों की माने तो  सुरक्षा बलों को मुख्य रूप से अयोध्या, दिल्ली और कश्मीर में चेकिंग करने और हर गतिविधि पर नजर रखने के लिए कहा गया है। ज्ञात हो कि गत 26 जुलाई को जम्मू-कश्मीर पुलिस ने शोपियां में एक आतंकी ठिकाने का भंडाफोड़ किया था, जहां से भारी मात्रा में लश्कर-ए-तैयबा के हथियार और अन्य आपत्तिजनक सामग्री बरामद की गई थी। (Ram mandir- terrorist attack)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पांच अगस्त को अयोध्या के दौरे पर जाएंगे, यहां वह भूमि पूजन के बाद राम मंदिर की आधारशिला रखेंगे। वहीं पांच अगस्त को ही जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने का एक साल पूरा हो रहा है। (Ram mandir- terrorist attack)

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केंद्र सरकार की कर्जदारों को बड़ी राहत, 2 करोड़ रुपए के कर्ज के ब्याज पर दी छूट

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केंद्र सरकार की कर्जदारों को बड़ी राहत, 2 करोड़ रुपए के कर्ज के ब्याज पर दी छूट
केंद्र सरकार की कर्जदारों को बड़ी राहत, 2 करोड़ रुपए के कर्ज के ब्याज पर दी छूट

नई दिल्ली, देशज न्यूज। केंद्र सरकार ने कर्जदारों को बड़ी राहत दी है. उसने बैंकों से कर्ज लेने वालों को एक तरह से दिवाली का उपहार तोहफा देते हुए दो करोड़ रुपये तक के कर्ज पर ब्याज से राहत देने की की शुक्रवार को देर रात घोषणा की। यह राहत सभी कर्जदारों को मिलेगा, चाहे उन्होंने किस्त भुगतान से छह महीने की दी गयी छूट का लाभ उठाया हो या नहीं।

वित्तीय सेवा विभाग ने उच्चतम न्यायालय के द्वारा ब्याज राहत योजना लागू करने का निर्देश दिये जाने के बाद इसके परिचालन के दिशानिर्देश जारी कर दिये. इस योजना के क्रियान्वयन से सरकारी खजाने पर 6,500 करोड़ रुपये का बोझ पडऩे का अनुमान है.शीर्ष अदालत ने 14 अक्टूबर को केंद्र को निर्देश दिया था कि वह कोविड-19 महामारी के मद्देनजर रिजर्व बैंक की किस्तों के भुगतान से छूट की योजना के तहत दो करोड़ रुपये तक के कर्ज पर ब्याज माफ करने के बारे में यथाशीघ्र निर्णय ले।

उच्चतम न्यायालय ने कहा था कि आम लोगों की दिवाली अब सरकार के हाथों में है. मंत्रालय के दिशानिर्देशों के अनुसार कर्जदार विनिर्दिष्ट ऋण खातों पर एक मार्च से 31 अगस्त 2020 के लिये इस योजना (ब्याज राहत) का लाभ उठा सकते हैं.इसमें कहा गया, जिन कर्जदारों के ऋण खाते की मंजूर सीमा या कुल बकाया राशि 29 फरवरी तक दो करोड़ रुपये से अधिक नहीं है, वे इस योजना का लाभ उठाने के पात्र होंगे. दिशानिर्देशों में बतायी गयी पात्रता शर्तों के अनुसार, 29 फरवरी तक इन खातों का मानक होना अनिवार्य है।

मानक खाता उन खाताओं को कहा जाता है, जिन्हें गैर निष्पादित संपत्ति (एनपीए) नहीं घोषित किया गया हो. इस योजना के तहत आवास ऋण, शिक्षा ऋण, क्रेडिट कार्ड का बकाया, वाहन ऋण, एमएसएमई ऋण, टिकाऊ उपभोक्ता उत्पाद ऋण और उपभोग ऋण के धारकों को लाभ मिलेगा.योजना के तहत, कर्ज देने वाले संस्थानों को योजना की अवधि के लिये पात्र कर्जदारों के संबंधित खातों में संचयी ब्याज व साधारण ब्याज के अंतर की राशि जमा करनी होगी।

योजना में कहा गया है कि कर्जधारक ने रिजर्व बैंक की ओर से 27 मार्च 2020 को घोषित किस्त भुगतान से छूट योजना का पूर्णत: या अंशत: लाभ का विकल्प चुना हो यह नहीं, उसे ब्याज राहत का पात्र माना जायेगा. कर्ज राहत योजना का लाभ उन कर्जधारकों को भी मिलेगा जो नियमित किस्तों का भुगतान करते रहे.कर्ज देने वाले संस्थान दी गयी छूट के तहत संबंधित राशि कर्जधारक के खाते में जमा करने के बाद केंद्र सरकार से उसके बराबर राशि पाने के लिये दावा करेंगे।

उच्चतम न्यायालय ने 14 अक्टूबर को मामले की सुनवाई करते हुए कहा था, वह इस बारे में चिंतित है कि कर्जदारों को ब्याज राहत का लाभ किस तरह से दिया जाये. उच्चतम न्यायालय ने तब कहा था कि केंद्र सरकार ने आम लोगों की बदहाल स्थिति का संज्ञान लेते हुए अच्छा निर्णय लिया है. हालांकि शीर्ष न्यायालय ने इस बात पर चिंता व्यक्त की थी कि अब तक इस संबंध में कोई आदेश नहीं जारी किया गया है।

न्यायमूर्ति अशोक भूषण की अगुवाई वाली पीठ ने कहा था, कुछ ठोस किए जाने की जरूरत है। जितना जल्दी संभव हो सके, दो करोड़ रुपए तक के कर्जदारों को ब्याज से राहत देने की योजना का क्रियान्वयन किया जाना चाहिए। उच्चतम न्यायालय ने मामले की सुनवाई की अगली तारीख दो नवंबर तय करते हुए कहा बैंकों तथा केंद्र सरकार का पक्ष रख रहे वकीलों से कहा था, लोगों की दिवाली अब आपके हाथों में है।

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फारुक अब्दुला ने कहा- जम्मू-कश्मीर के हक में आवाज करते रहेंगे बुलंद

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फारुक अब्दुला ने कहा- जम्मू-कश्मीर के हक में आवाज करते रहेंगे बुलंद
फारुक अब्दुला ने कहा- जम्मू-कश्मीर के हक में आवाज करते रहेंगे बुलंद

नई दिल्ली, देशज न्यूज। जम्मू कश्मीर (Jammu Kashmir) में धारा 370 हटाने से नाराज राजनीतिक दलों ने केंद्र सरकार पर हमला बोला है। महबूबा मुफ्ती के कल ही विवादित बयान के बाद आज उनके आवास पर बैठक हुई। जिसमें हिस्सा लेने के बाद फारुख अब्दुल्ला ने साफ किया कि जम्मू-कश्मीर के अवाम के लिए आवाज उठाते रहेंगे। उन्होंने कहा कि वे बीजेपी विरोधी है। इसका मतलब यह नहीं कि देशद्रोही हो गए है।

दूसरी तरफ आज पीपल्स अलायंस बैठक हुई। जिसमें फारूक अब्दुल्ला को अध्यक्ष चुना गया। जबकि महबूबा मुफ्ती उपाध्यक्ष रहेगी। इस बैठक में सज्जाद लोन और उमर अब्दुला ने भी हिस्सा लिया। फारुक ने कहा कि संगठन का लक्ष्य सिर्फ लोगों को उसका हक दिलाना है। उन्होंने कहा कि धर्म के नाम पर बांटने की साजिश हमेशा से नाकाम रहेगी। उधर बिहार चुनाव प्रचार के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी ने जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाने का जिक्र किया। जिस पर महबूबा प्रतिक्रिया दे रही थी। वहीं कांग्रेस ने महबूबा के बयान को सोची-समझी राजनीति के तहत दिया गया बयान बताकर निंदा की।

इससे पहले कल ही महबूबा मुफ्ती ने कहा था कि धारा 370 लेकर वे रहेंगी। जब तक फिर से बहाल नहीं हो जाती है. तब तक चुनाव लड़ेगी। इसके साथ ही तिरंगा भी हाथ में लेने से मना कर दिया। जिसके बाद सभी राजनीतिक दलों ने जमकर आलोचना की।

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सिकुड़ता जा रहा NDA! बिहार चुनाव बाद लोजपा के भविष्य पर होगा फैसला…अंदर या बाहर

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सिकुड़ता जा रहा NDA! बिहार चुनाव बाद लोजपा के भविष्य पर होगा फैसला...अंदर या बाहर
सिकुड़ता जा रहा NDA! बिहार चुनाव बाद लोजपा के भविष्य पर होगा फैसला...अंदर या बाहर

नई दिल्ली, देशज न्यूज। एनडीए लगातार देश भर में सिकुड़ता जा रहा है। पहले शिवसेना उसके बाद अकाली और अब लोजपा के अलग होने से आने वाले दिनों में बीजेपी की मुश्किलें खड़ी हो सकती है। हालांकि बीजेपी के लिये संतोष की बात है कि केंद्र में मोदी सरकार को किसी भी तरह का खतरा का सामना नहीं करना पड़ रहा है। लेकिन एनडीए में ज्यादा से ज्यादा दलों को इकट्ठा रखने से बीजेपी को यूपीए पर मनोवैज्ञानिक तौर पर बढ़त हासिल होती है।   

ऐसे में, बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान में बमुश्किल चार दिन बचे है। इस बीच राज्य में सियासी घमासान तेज हो गया है। लेकिन बिहार के परिपेक्ष्य में एनडीए गठबंधन पर नजर दौड़ाने पर एक बात तो साफ नजर आ रही है, नुकसान होना तो तय है। यदि नीतीश कुमार की वापसी नहीं होती है तब भी एनडीए का बिखराव स्पष्ट दिख रहा है। ऐसे स्थिति में राज्य में नए समीकरण देखने को मिलें तो आश्चर्य नहीं होगा।

कारण, अगर नीतीश के नेतृ्व में फिर से सरकार बनती है तो चिराग पासवान की एनडीए में एंट्री थोड़े दिनों के लिए ठंडे बस्ते में चला जाएगा। ऐसे स्थिति में बिहार एनडीए में बीजेपी और जदयू ही रहेंगे। कारण, चिराग लगातार नीतीश व जदयू पर हमलावर हैं। नीतीश को जेल भेजने तक की बात कह रहे हैं।

चुनाव परिणाम बाद बिहार में बीजेपी व लोजपा मजबूती से एकसाथ आ सकते है। इसमें नीतीश के एनडीए में बने रहने पर संशय रह सकता है। हालांकि देखा गया है, किसी गठबंधन में दो अलग-अलग विरोेधी दल भी साथ-साथ गठबंधन धर्म निभाते रहते है। लेकिन नीतीश और चिराग में जिस तरह के मनमुटाव रहे है उससे एनडीए में एक साथ रहना फिलहाल मुश्किल ही नजर आ रहा है।

 

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