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Lunar Eclipse 2020: 30 तारीख को साल का आखिरी चंद्र ग्रहण, जानिए भारतीय समय, क्यों है खास

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Lunar Eclipse 2020: 30 तारीख को साल का आखिरी चंद्र ग्रहण, जानिए भारतीय समय, क्यों है खास

नई दिल्ली, देशज न्यूज। Lunar Eclipse 2020: साल 2020 का आखिरी चंद्रगहण (Lunar Eclipse) 30 नवंबर को लगेगा. यह एक पेनुब्रल (Penumbral) ग्रहण होगा. इसमें सूर्य (Sun) से चंद्रमा (Moon) पर सीधी जाने वाली रोशनी (Light) के कुछ हिस्से को पृथ्वी (Earth) की बाहरी परछाई रोकती है।

जानकारी के अनुसार, इस दौरान 82 फीसदी हिस्से पर पृथ्वी की छाया सूर्य की रोशनी रोकेगी, इसकी कारण चंद्रमा की चमक फीकी पड़ जाएगी। भारतीय समय के अनुसार, साल का आखिरी चंद्रग्रहण दोपहर 1.04 बजे से शुरू होकर शाम 5.22 बजे तक रहेगा।

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इस दिन कार्तिक पूर्णिमा है इसलिए इसे देश के कई हिस्सों में नहीं देखा जा सकेगा. वहीं, चंद्रोदय के समय यह देश के उत्तरी, मध्य और पूर्वी राज्यों में आंशिक रूप से देखा जा सकता है। इन क्षेत्रों में यूपी, बिहार, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, उत्तराखंड, जम्मू कश्मीर और पूर्वोत्तर के सभी राज्य शामिल हैं।

145 साल पुराने दरभंगा से पहली बार खबरों का गरम भांप ...असंभव से आगे देशज टाइम्स हिंदी दैनिक। वेब पेज का संपूर्ण अखबार। दरभंगा खासकर मिथिलाक्षेत्रे, हमार प्रदेश, सारा जहां की ताजा खबरें। रोजाना नए कलेवर में। फिल्म-नौटंकी के साथ सरजमीं को समेटे। सिर्फ देशज टाइम्स में, पढि़ए, जाग जाइए।

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नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में CRPF को चिकित्सा सुविधा मुहैया कराने बाइक एंबुलेंस ‘रक्षिता’ लॉन्च

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Bike ambulance 'Rakshitha' launched to provide medical care to CRPF in Naxalite affected areas
– मुठभेड़ों में घायल होने पर सीआरपीएफ के जवानों और पैरामेडिक्स को सहायता मिलेगी 
– माओवादी क्षेत्रों के तंग इलाकों और संकरी सड़कों पर तेजी से पहुंचना होगा आसान 
नई दिल्ली, देशज न्यूज।  केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के जवानों को तत्काल चिकित्सा सुविधा मुहैया कराने के लिए सोमवार को बाइक एम्बुलेंस ‘रक्षिता’ लॉन्च की गई। यह (Bike ambulance ‘Rakshitha’ launched to provide medical care to CRPF in Naxalite affected areas) बाइक एम्बुलेंस नक्सल प्रभावित क्षेत्र में चिकित्सा आपातकाल या मुठभेड़ के दौरान घायल होने की स्थिति में सुरक्षा बल के जवानों की जरूरतों को पूरा करने के लिए विकसित की गई है।
डीआरडीओ ने ​नक्सल क्षेत्रों में ​मुठभेड़ के दौरान घायल हुए सुरक्षा बलों के जवानों को तत्काल ​चिकित्सा ​जरूरत उपलब्ध कराने के लिए एम्बुलेंस (Bike ambulance ‘Rakshitha’ launched to provide medical care to CRPF in Naxalite affected areas) बाइक विकसित की है। ​​आज इस एम्बुलेंस बाइक का शुभारंभ डीआरडीओ ​के इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूक्लियर मेडिसिन एंड एलाइड साइंसेज (आईएनएमएएस) में किया गया।
यह बाइक मुठभेड़ों के दौरान घायल होने की स्थिति में सीआरपीएफ के जवानों और पैरामेडिक्स को सहायता देगी। सीआरपीएफ के एक अधिकारी ने कहा कि ये बाइक छत्तीसगढ़ के बीजापुर, सुकमा, दंतेवाड़ा आदि क्षेत्रों में अधिक उपयोगी होगी, क्योंकि (Bike ambulance ‘Rakshitha’ launched to provide medical care to CRPF in Naxalite affected areas) जंगल के अंदर बड़े वाहनों या एम्बुलेंस को ले जाना कठिन होता है।
डीआरडीओ सूत्रों का कहना है कि विशेष रूप से माओवादी क्षेत्रों के तंग इलाकों और संकरी सड़कों पर तेजी से पहुंचने के लिए सीआरपीएफ की जरूरतों को देखने के बाद इस बाइक का विकास (Bike ambulance ‘Rakshitha’ launched to provide medical care to CRPF in Naxalite affected areas) किया गया है। ऐसे कई उदाहरण हैं जहां चिकित्सा सुविधाएं समय पर न पहुंचने और चिकित्सा सहायता में देरी से मुठभेड़ों में घायल जवानों की स्थिति और गंभीर हो गई।
इस एम्बुलेंस बाइक का विकास इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूक्लियर मेडिसिन एंड एलाइड साइंसेज ने किया जो बायोमेडिकल और क्लिनिकल रिसर्च के क्षेत्र में (Bike ambulance ‘Rakshitha’ launched to provide medical care to CRPF in Naxalite affected areas) रेडिएशन, न्यूरोकाॅग्निटिव इमेजिंग और रिसर्च के संदर्भ में भी काम करता है। यह रक्षा मंत्रालय का अनुसंधान और विकास विंग है​ जो डीआरडीओ के तहत कार्य करता है​​
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Corona Update : पिछले 24 घंटे में कोरोना के 13,788 नए मामले, 145 लोगों की मौत

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corona update--13788 new cases
नई दिल्ली, देशज न्यूज। देश में कोरोना मरीजों की संख्या एक करोड़ पांच लाख के पार पहुंच गई है। पिछले 24 घंटे में कोरोना के 13 हजार 788 नए मामले सामने आए हैं। इसके साथ ही कोरोना के मरीजों की संख्या बढ़कर 1,05,71,773 पर पहुंच गई है। इस दौरान 145 लोगों की मौत हो गई। इसके साथ ही इस बीमारी से मरने वालों (corona update–13788 new cases) की संख्या 1,52,419 तक पहुंच गई है।
सोमवार सुबह केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक देश में 2,08,012 एक्टिव मरीज हैं। राहत भरी खबर है कि कोरोना से अबतक 1,02,11,342 मरीज स्वस्थ हो चुके हैं। जबकि (corona update–13788 new cases) देश का रिकवरी रेट बढ़कर 96.59 प्रतिशत हो गया है।
पिछले 24 घंटे में 05 लाख से अधिक टेस्ट
देश में पिछले 24 घंटे में 05 लाख से अधिक कोरोना के टेस्ट किए गए हैं। आईसीएमआर के मुताबिक 17 जनवरी को 05,48,168 टेस्ट किए गए। अबतक देश में कुल 18,70,93,036 टेस्ट किए (corona update–13788 new cases) जा चुके हैं।
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चीन की ओर से खूनी संघर्ष के बाद भी आखिरकार भारत ने बनाई गलवान घाटी तक सड़क

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After the bloody struggle from the Chinese side, India finally made the road to Galvan valley
– लेह-काराकोरम के बीच रणनीतिक ऑल-वेदर रोड डीएसडीबीओ का निर्माण पूरा
– इसी सड़क के निर्माण से नाराज होकर चीन ने गलवान में किया था खूनी संघर्ष 
– अब चीन के खिलाफ भारत को मोर्चाबंदी करने में होगी बेहद आसानी 
 
 
नई दिल्ली, देशज न्यूज। चीन के तमाम विरोधों और गलवान की हिंसा में 20 जवान खोने के बाद आखिरकार भारत ने पूर्वी लद्दाख में लेह और काराकोरम के बीच 255 किलोमीटर लम्बी रणनीतिक ऑल-वेदर रोड का निर्माण पूरा कर लिया है। दुरबुक-श्योक-दौलत बेग ओल्डी (डीएसडीबीओ) रोड के बनने की वजह से नाराज (After the bloody struggle from the Chinese side, India finally made the road to Galvan valley) होकर चीन ने गलवान में भारतीय सैनिकों के साथ खूनी भिड़ंत की थी। अब इस मार्ग से केवल गलवान घाटी तक ही नहीं बल्कि उत्तरी क्षेत्रों में भी भारत की पहुंच आसान हो गई है।
 
पूर्वी लद्दाख की सीमा एलएसी पर भारत की अंतिम चौकी दौलत बेग ओल्डी (डीबीओ) के पास चीन ने करीब 50 हजार सैनिकों की तैनाती की है। यहां से चीन के कब्जे वाला अक्साई चिन महज 7 किमी. दूर है। दरअसल यहां चीन अपनी सेना की तैनाती करके एक साथ डेप्सांग घाटी, अक्साई चिन और दौलत बेग ओल्डी पर नजर रख रहा है।
चीन ने पहले ही डेप्सांग घाटी में नए शिविर और वाहनों के लिए ट्रैक बनाए हैं, जिसकी पुष्टि सेटेलाइट की तस्वीरों और जमीनी ट्रैकिंग के जरिये भी हुई है। पूर्वी लद्दाख का डेप्सांग प्लेन्स इलाका भारत-चीन सीमा के सामरिक दर्रे काराकोरम पास के बेहद करीब है। इसी के करीब चीन सीमा पर भारत की अंतिम चौकी (After the bloody struggle from the Chinese side, India finally made the road to Galvan valley) दौलत बेग ओल्डी (डीबीओ) है। 255 किलोमीटर लम्बी दुरबुक-श्योक-दौलत बेग ओल्डी रोड यानी (डीएसडीबीओ) इसी के करीब से होकर जाती है। यहां से दौलत बेग ओल्डी की दूरी 30 किलोमीटर है।
 
लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल ( एलएसी) के पास स्थित डेप्सांग मैदानी इलाके में चीनी सेना भारतीय सैनिकों की पेट्रोलिंग में बाधा डाल रही है, जो भारत-चीन (After the bloody struggle from the Chinese side, India finally made the road to Galvan valley) सीमा के सामरिक दर्रे काराकोरम पास के बेहद करीब का इलाका है। दुरबुक-श्योक-दौलत बेग ओल्डी रोड यानी (डीएसडीबीओ) इसी के करीब से होकर जाती है।
यहां से दौलत बेग ओल्डी की दूरी 30 किलोमीटर है। इस डेप्सांग प्लेन में कुल पांच पेट्रोलिंग प्वाइंट (पीपी) 10, 11, 11ए, 12 और 13 हैं जहां चीनी सेना भारतीय सैनिकों को गश्त करने से लगातार रोक रही है। दरअसल यहां एक वाई-जंक्शन बनता है, जो बुर्तसे से कुछ किलोमीटर पर है। उसी से सटे दो नालों (After the bloody struggle from the Chinese side, India finally made the road to Galvan valley) जीवन नाला और रकी नाला के बीच में ये पांच पेट्रोलिंग प्वाइंट हैं। साफ है कि गलवान घाटी, फिंगर-एरिया, पैंगोंग झील और गोगरा (हॉट स्प्रिंग) के बाद पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर भारत और चीन की सेनाओं के बीच ये पांचवांं विवादित इलाका है।
 
पुराना कारवां मार्ग भारत ने किया पुनर्जीवित 
भारत ने लद्दाख के संवेदनशील क्षेत्रों तक पहुंचने के लिए 17 हजार 800 फीट की ऊंचाई पर एक पुराने कारवां मार्ग को वैकल्पिक मार्ग के रूप तैयार किया है, जिससे डेप्सांग प्लेन्स, डीबीओ, डीएसडीबीओ तक आसानी से पहुंचा जा सकेगा। यह पुराना मार्ग सियाचिन ग्लेशियर और डेप्सांग प्लेन्स के बीच था (After the bloody struggle from the Chinese side, India finally made the road to Galvan valley) जिसे भारत ने पुनर्जीवित किया है।
वास्तविक नियंत्रण रेखा के करीब होने की वजह से दुरबुक-श्योक-दौलत बेग ओल्डी रोड (डीएसडीबीओ) के कई बिंदुओं पर सैन्य जोखिम हैं। यह नई सड़क सियाचिन ग्लेशियर के बेस के पास ससोमा से शुरू होकर 17 हजार 800 फुट ऊंचे सासेर ला के पूर्व तक जाती है। फिर डेप्सांग प्लेन्स में मुर्गो के पास गेपसम में उतरकर मौजूदा (डीएसडीबीओ) से जुड़ जाएगी। अभी फिलहाल भारतीय सेना के वाहन ससोमा से सासेर ला तक जा पाते हैं लेकिन आगे के बाकी इलाकों में पैदल ही जाना पड़ता है।
 
लेह के लिए वैकल्पिक सड़क लिंक
लेह के लिए एक और वैकल्पिक सड़क लिंक भी बीआरओ ने विकसित की है जिसका भी निर्माण कार्य पूरा होने के अंतिम चरण में है। नीमू-पद्म-दार्चा सड़क जल्द ही चालू हो जाएगी, लेकिन इसे एक ऑल वेदर रोड बनाने के लिए 4.15 किलोमीटर लंबी सुरंग 16 हजार 703 फीट की ऊंचाई पर सिनका ला पास पर बनानी होगी। इस सड़क से मौजूदा जोजिला पास वाले रास्ते और सार्चु से होकर मनाली से लेह तक के रूट के मुकाबले समय की काफी बचत होगी। 
यानी कि नई सड़क से मनाली और लेह की दूरी 3-4 घंटे कम हो जाएगी। साथ ही लद्दाख तक तेजी से सैन्य मूवमेंट हो सकेगा। यह ऐसा मार्ग होगा जिससे भारतीय सेना की आवाजाही, तैनाती व लद्दाख तक तोप, टैंक जैसे भारी हथियारों की मूवमेंट की दुश्मन को भनक तक नहीं लगेगी। मनाली से लेह तक इस सड़क के बनने के बाद भारत के पास अब लद्दाख तक पहुंचने के तीन रास्ते उपलब्ध हो जायेंगे, इसलिए चीन के साथ पूर्वी लद्दाख में चल रहे टकराव के कारण (After the bloody struggle from the Chinese side, India finally made the road to Galvan valley) भारत का यह कदम रणनीतिक तौर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 
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