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1 नवंबर से बिना ओटीपी के नहीं मिलेगा रसोई गैस सिलेंडर,बदल रहा है गैस की डिलिवरी का नियम

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1 नवंबर से बिना ओटीपी के नहीं मिलेगा रसोई गैस सिलेंडर,बदल रहा है गैस की डिलिवरी का नियम
1 नवंबर से बिना ओटीपी के नहीं मिलेगा रसोई गैस सिलेंडर,बदल रहा है गैस की डिलिवरी का नियम

नई दिल्ली, देशज न्यूज। घरेलू रसोई गैस (एलपीजी सिलेंडर) की होम डिलिवरी से जुड़े नियमों में एक नवंबर से बड़ा बदलाव होने वाला है। दरअसल, एक नवंबर से देश के 100 स्मार्ट सिटीज में गैस की डिलिवरी के लिए वन टाइम पासवर्ड (ओटीपी) अनिवार्य हो जाएगा।

आईओसीएल से जुड़े सूत्रों ने बताया कि इस योजना का लक्ष्य यह है कि गैस सिलेंडर सही उपभोक्ता तक पहुंचे. इसे सुनिश्चित करने के लिए नई व्यवस्था लागू की जा रही है. इस नई व्यवस्था के तहत एलपीजी उपभोक्ता को गैस की बुकिंग के बाद एक ओटीपी प्राप्त होगा. इसके बाद जब डिलिवरी ब्वॉय आपके घर पर गैस सिलेंडर पहुंचाने आएंगे तो ग्राहक को ओटीपी बताना होगा. ओटीपी साझा किए बगैर एलपीजी सिलेंडर डिलिवर नहीं हो पाएगा।

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सूत्रों ने बताया कि राजस्थान की राजधानी जयपुर और तमिलनाडु के कोयंबटूर में इस व्यवस्था को पायलट आधार पर लागू किया गया था. उन्होंने बताया कि प्रायोगिक स्तर पर इस स्कीम के पूरी तरह सफल रहने के बाद एक नवंबर, 2020 से इस योजना का विस्तार देश के 100 स्मार्ट शहरों में किया जा रहा है. इन शहरों से मिलने वाले फीडबैक के आधार पर व्यवस्था का विस्तार देशभर में किया जाएगा।

नए प्रोसेस में क्या होगा

नई व्यवस्था के तहत एलपीजी सिलेंडर बुक करने के बाद उपभोक्ता को एक कोड प्राप्त होगा. एलपीजी सिलेंडर की डिलिवरी के समय उपभोक्ता को यह कोड डिलिवरी करने वाले व्यक्ति को दिखाना होगा. इस पहल का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि गैस की डिलिवरी किसी गलत व्यक्ति को नहीं हुई है।

हालांकि, इस व्यवस्था से ऐसे लोगों को थोड़ी असुविधा हो सकती है, जिन्होंने पेट्रोलियम कंपनी के साथ अपना मोबाइल नंबर अपडेट नहीं कराया है. यह नई व्यवस्था घरेलू सिलेंडरों के लिए लागू होगी और वाणिज्यिक सिलेंडरों की डिलिवरी पर इसका कोई असर नहीं होगा।

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हाईकोर्ट के मध्यप्रदेश में रैलियों पर प्रतिबंध लगाने के खिलाफ चुनाव आयोग पहुंचा सुप्रीम कोर्ट

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हाईकोर्ट के मध्यप्रदेश में रैलियों पर प्रतिबंध लगाने के खिलाफ चुनाव आयोग पहुंचा सुप्रीम कोर्ट
हाईकोर्ट के मध्यप्रदेश में रैलियों पर प्रतिबंध लगाने के खिलाफ चुनाव आयोग पहुंचा सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली, देशज न्यूज। मध्यप्रदेश उपचुनाव में उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देते हुए चुनाव आयोग सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया. दरअसल मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग के दिशानिर्देशों के तहत विधानसभा उपचुनावों में चुनाव प्रचार के लिए सीमित संख्या के साथ भौतिक राजनीतिक सभा के लिए दी गई अनुमति पर रोक लगा दी है।

मध्यप्रदेश में भाजपा में शामिल हुए ज्योतिरादित्य सिंधिया के प्रति निष्ठावान कांग्रेस विधायकों के इस्तीफे के बाद विधानसभा उपचुनाव कराए जा रहे हैं। हाईकोर्ट की ग्वालियर पीठ ने अपने आदेश में राजनीतिक दलों को भौतिक सभाओं से रोक दिया है, जब तक कि उन्हें जिलाधिकारियों और चुनाव आयोग से यह प्रमाणित नहीं किया गया हो कि वर्चु्अल चुनाव अभियान संभव नहीं है।

अगर भौतिक सभा करने की इजाजत मिल भी जाती है तो, राजनीतिक दल को इसके लिए धन राशि जमा कराने की आवश्यकता होगी. यह धन राशि सभा में अपेक्षित लोगों की संख्या की सुरक्षा और सैनेटाइजेशन के लिए जरूरी मास्क और सैनेटाइजर की दोगुनी खरीद करने के लिए पर्याप्त होनी चाहिए।

हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि संबंधित उम्मीदवार सभाओं में मौजूद लोगों को मास्क और सैनेटाइजर के वितरण के लिए व्यक्तिगत रूप से जिम्मेवार होंगे।

चुनाव आयोग ने तर्क दिया है कि हाईकोर्ट का 20 अक्तूबर का आदेश सुप्रीम कोर्ट की ओर से लगातार दिए गए आदेशों की अवहेलना करता है. आयोग ने कहा सर्वोच्च अदालत अपने आदेशों में यह कहता रहा है कि चुनाव आयोग चुनाव प्रक्रिया के संचालन और पर्यवेक्षण के लिए एकमात्र प्राधिकरण है और बहु-स्तरीय चुनाव प्रक्रिया में अदालतों को हस्तक्षेप करने से रोकता है।

मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की ग्वालियर पीठ ने पिछले हफ्ते कोरोना महामारी के बीच सामाजिक दूरी (सोशल डिस्टेंसिंग) को सुनिश्चित करने के लिए चुनावी रैलियों में 100 से अधिक लोगों को शामिल करने वाली किसी भी राजनीतिक रैली के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की अनुमति दी थी।

ग्वालियर पीठ के न्यायमूर्ति शील नागू और न्यायमूर्ति राजीव कुमार श्रीवास्तव की पीठ ने अधिवक्ता आशीष प्रताप द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान कोरोना वायरस महामारी को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया था।

मध्यप्रदेश में विधानसभा की 28 सीटों पर उपचुनाव होने हैं. चुनाव आयोग ने उपचुनाव के लिए मंगलवार (29 सितंबर) को तारीखों की घोषणा की थी. चुनाव की घोषणा के साथ ही राज्य में आदर्श आचार संहिता भी लागू हो गई है. इसी के साथ राज्य में चुनावी रैलियों का दौर शुरू हो चुका है।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को गुरुवार को अपनी चुनावी रैलियों को निरस्त करना पड़ा था. इसे लेकर राज्य के मुख्यमंत्री चौहान ने गुरुवार को कहा था, हम उच्च न्यायालय की ग्वालियर पीठ के आदेश के खिलाफ उच्चतम न्यायालय जा रहे हैं. बिहार में हर दिन राजनीतिक रैलियां हो रही हैं। एक देश में इस तरह का विरोधाभासी कानून नहीं हो सकता है।

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चुनाव से बेफ्रिक प्याज ने बिगाड़ा रसोई का बजट! पिछले एक महीने में 4 गुना बढ़ी कीमत

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चुनाव से बेफ्रिक प्याज ने बिगाड़ा रसोई का बजट! पिछले एक महीने में 4 गुना बढ़ी कीमत
चुनाव से बेफ्रिक प्याज ने बिगाड़ा रसोई का बजट! पिछले एक महीने में 4 गुना बढ़ी कीमत

नई दिल्ली, देशज न्यूज। देश में नवरात्रि के समय प्याज की मांग कम हो जाती है लेकिन इसके बावजूद भी आलू और प्याज के दाम इस समय आसमान पर पहुंच गए हैं।

सरकार के कई कदम उठाने के बाद भी पिछले कई हफ्तों से प्याज के दाम में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है। इसके कारण आम आदमी के रसोई का बजट बिगाड़ गया है। पिछले एक महीने में बेंगलुरू में प्याज के मूल्यों में चार गुना वृद्धि दर्ज की गई है।

20 सितंबर को बेंगलुरू में 22 रुपये किलो बिकने वाला प्याज इस महीने 88 रुपये प्रति किलोग्राम पर बिक रहा है, वहीं तिरुवनंतपुरम में प्याज 90 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से बिका। राजधानी दिल्ली की बात करें तो पिछले एक हफ्ते में प्याज के भाव भी पिछले हफ्ते में 8 रुपये प्रति किलो बढ़े हैं।

शहरों में खुदरा प्याज की कीमतों के तुलनात्मक विश्लेषण से पता चलता है कि दक्षिणी राज्यों में पिछले 30 दिनों में दो से तीन गुना प्याज की कीमत में इजाफा हुआ है. बढ़ी हैं।

तमिलनाडु में तिरुचिरापल्ली को छोड़कर सभी केंद्रों पर खुदरा मूल्य दोगुने से अधिक हो गए। तेलंगाना में सभी केंद्रों पर कीमतें दोगुनी रही. कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में भी यही हाल रहा। प्याज के भाव में राहत मिलने में अभी थोड़ा और समय लग सकता है, क्योंकि भारी बारिश के कारण महाराष्ट्र और कर्नाटक में ताजा फसल को बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है, इसके चलते आयात आने में अभी कुछ समय और लगेगा।

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भारतीय रेलवे अब रेल कोच और घर तक पहुंचायेगा यात्रियों का सामान, शुरू की सेवा

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भारतीय रेलवे अब रेल कोच और घर तक पहुंचायेगा यात्रियों का सामान, शुरू की सेवा
भारतीय रेलवे अब रेल कोच और घर तक पहुंचायेगा यात्रियों का सामान, शुरू की सेवा

नई दिल्ली, देशज न्यूज। भारतीय रेलवे नए उपायों से राजस्व को बढ़ाने के लिए प्रयासरत है. इसी अंतर्गत रेलवे ने दिल्ली मंडल में गैर किराया राजस्व अर्जन योजना के तहत ऐप आधारित बैग्स ऑन व्हील्स सेवा शुरू की है।

देश में रेलयात्रियों के लिए यह अपनी तरह की पहली सेवा होगी. BOW ऐप  के द्वारा रेलयात्री अपने सामान को अपने घर से रेलवे स्टेशन तक लाने अथवा रेलवे स्टेशन से घर तक पहुंचाने के लिए आवेदन करेंगे। यात्री का सामान सुरक्षित तरीके से लेकर रेलयात्री के बुकिंग विवरण के अनुसार उसके कोच या घर तक पहुंचाने का कार्य ठेकेदार द्वारा किया जाएगा।

नाम मात्र के शुल्क पर रेलयात्रियों को सामान की डोर-टू-डोर सेवा फर्म द्वारा उपलब्ध कराई जाएगी और यात्री के घर से उसका सामान रेलगाड़ी में उसके कोच तक अथवा उसके कोच से उसके घर तक सुगमता से पहुंचाया जाएगा. यह सेवा रेलयात्रियों विशेषकर वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांग जनों और अकेले यात्रा कर रही महिला यात्रियों के लिए बहुत ही लाभदायक सिद्ध होगी।

इस सेवा की खास खूबी यह है कि सामान की सुपुर्दगी रेलगाड़ी के प्रस्थान से पहले सुनिश्चित की जाएगी. इसके फलस्वरूप यात्री कोच तक सामान लाने या ले जाने की परेशानी से मुक्त हो एक अलग ही प्रकार की यात्रा का अनुभव करेंगे. शुरूआत में यह सेवा नई दिल्ली, दिल्ली हजरत निजामुद्दीन, दिल्ली छावनी, दिल्ली सराय रोहिला, गाजियाबाद और गुडगांव रेलवे स्टेशनों से चढ़ने वाले रेलयात्रियों के लिए उपलब्ध होगी।

इस सेवा से न केवल यात्री लाभान्वित होंगे बल्कि रेलवे को भी सालाना 50 लाख रुपए के गैर किराया राजस्व की प्राप्ति के साथ ही साथ में एक वर्ष की अवधि के लिए 10 फीसदी की हिस्सेदारी भी प्राप्त होगी। भारतीय रेलवे के यात्रियों ने अब तक पैलेस ऑन व्हील्स सेवा का आनंद उठाया है, अब वे बैग्स ऑन व्हील्स सेवा का भी आनंद ले सकेंगे।

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