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नोटबंदी के चार साल पूरे, कांग्रेस ने बताया काला दिन तो भाजपा ने गिनाए फायदे

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नोटबंदी के चार साल पूरे, कांग्रेस ने बताया काला दिन तो भाजपा ने गिनाए फायदे

नई दिल्ली, देशज न्यूज। नोटबंदी के चार साल पूरे हो गए हैं. इस कड़ी में भाजपा ने नोटबंदी के फायदे गिनाए हैं. भाजपा प्रवक्ता राजीव चंद्रशेखर ने कहा है कि नोटबंदी से देश की अर्थव्यवस्था को साफ-सुथरा बनाने में मदद मिली। इसके कारण अर्थव्यवस्था औपचारिक रूप से मजबूत हुई और बड़ी संख्या में गरीबों की मदद की गई।

चंद्रशेखर ने कहा कि नोटबंदी के बाद से डिजिटल ट्रांजेक्शन को बढ़ावा मिल रहा है।

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अक्तूबर 2020 के दौरान देश में 207.16 करोड़ डिजिटल ट्रांजेक्शन हुए. एनपीसीआई  के मुताबिक, अब तक 3.86 लाख करोड़ रुपये के यूपीआई ट्रांजेक्शन हो चुके हैं. वहीं, दूसरी तरफ नोटबंदी के चार सार पूरे होने पर कांग्रेस ने केंद्र की मौजूदा मोदी सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने नोटबंदी को काला दिन बताया और सरकार से माफी मांगने को कहा है।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अपने वीडियो ट्वीट में कहा, नोटबंदी पीएम की सोची समझी चाल थी, ताकि आम जनता के पैसे से मोदी-मित्र पूंजीपतियों का लाखों करोड़ रुपय कर्ज माफ किया जा सके. गलतफहमी में मत रहिए- गलती हुई नहीं, जानबूझकर की गई थी. इस राष्ट्रीय त्रासदी के चार साल पर आप भी अपनी आवाज बुलंद कीजिए।

गौरतलब है कि आज ही के दिन साल 2016 (8 नवंबर 2016) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रात आठ बजे ये एलान किया था कि रात 12 बजे से 1000 और 500 रुपये के नोट अब बंद हो जाएंगे यानी 1000 और 500 के नोट की कीमत कागज के टुकड़ों के बराबर होगी।

बता दें मोदी सरकार ने नोटबंदी लाने की कई वजहें बताई थीं. इसमें कालेधन का खात्मा करना, सर्कुलेशन में मौजूद नकली नोटों को खत्म करना, आतंकवाद और नक्सल गतिविधियों पर लगाम कसने समेत कैशलेस इकॉनमी को बढ़ावा देना शामिल हैं।

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साठ वर्ष से ऊपर के सभी लोगों को एक मार्च से लगेगा मुफ्त कोरोना टीका

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45 वर्ष से ऊपर के बीमार लोगों का भी होगा टीकाकरण

नई दिल्ली। कोरोना महामारी से बचाव के लिए टीकाकरण को लेकर केंद्र सरकार ने बुधवार को बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने कहा है कि 45 वर्ष से ऊपर के गंभीर बीमार और 60 वर्ष से ऊपर के सभी लोगों का 10 हजार सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर मुफ्त टीकाकरण किया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल cabinet-corona vaccination-age 60-free की बैठक में यह फैसला लिया गया।

मंत्रिमंडल के फैसले के बाद केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने संवाददाता सम्मेलन में बताया कि 10 हजार सरकारी और 20 हजार निजी अस्पतालों में टीकाकरण एक मार्च से शुरूcabinet-corona vaccination-age 60-free होगा। उन्होंने बताया कि 60 वर्ष की आयु के सभी लोगों को कोरोना से बचाव का टीका लगाया जाएगा।

इसके साथ ही 45 वर्ष की आयु से अधिक के वे लोग जिनको कोई दूसरी गंभीर बीमारी है, उन्हें एक मार्च से टीका लगाया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकारी केंद्रों में यह टीका मुफ्त लगेगा। निजी अस्पताल में कोरोना का टीका लगवाने पर उसकी कीमत देनी होगी। जावड़ेकर ने कहा कि निजी अस्पताल में टीका लगवाने पर उसकी कीमत क्या होगी, यह स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय तीन-चार दिन में तय कर बताएगा। देश में 10.40 करोड़ लोगों की उम्र 60 वर्ष से ऊपर है।

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भारत को स्वस्थ रखने के लिए सरकार चार मोर्चों पर एक साथ कर रही है कामः पीएम मोदी

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स्वास्थ्य बजट को बताया अभूतपूर्व
नई दिल्ली। स्वास्थ्य क्षेत्र से संबंधित बजट कार्यान्वयन पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को एक वेबिनार के दौरान केन्द्रीय स्वास्थ्य के क्षेत्र के लिए आवंटित बजट को अभूतपूर्व बताया। उन्होंने pm on health budget  कहा कि ये हर देशवासी को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देने की केन्द्र सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि कोरोना महामारी ने हमें भविष्य में ऐसी चुनौतियों से लड़ने के लिए तैयार कर दिया है। कोरोना के दौरान भारत के हेल्थ सेक्टर ने जो मजबूती दिखाई है, अपने जिस अनुभव और अपनी शक्ति का प्रदर्शन किया है, उसे दुनिया ने बहुत बारीकी से नोट किया है। आज पूरे विश्व में भारत के हेल्थ सेक्टर की प्रतिष्ठा और भारत के हेल्थ सेक्टर पर भरोसा, नए स्तर पर है।
चार मोर्चे पर एक साथ काम 
उन्होंने कहा कि भारत को स्वस्थ रखने के लिए हम चार मोर्चों पर एक साथ काम कर रहे हैं। पहला मोर्चा है, बीमारियों को रोकना यानि स्वास्थ्य को होलिस्टिक तरीके से देखना। दूसरा मोर्चा, गरीब से गरीब को सस्ता और प्रभावी इलाज देने का है। आयुष्मान भारत योजना और प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र जैसी योजनाएं यही काम कर रही हैं। तीसरा मोर्चा है, हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर और हेल्थ केयर प्रोफेशनल्स की संख्या और गुणवत्ता में बढ़ोतरी करना और चौथा मोर्चा है, समस्याओं से पार पाने के लिए मिशन मोड पर काम करना। मिशन इंद्रधनुष का विस्तार देश के आदिवासी और दूरदराज के इलाकों तक किया गया है।
निजी क्षेत्र की भागीदारी  
प्राइवेट सेक्टर, पीएमजेएवाई में हिस्सेदारी के साथ-साथ सरकारी स्वास्थ्य लैब का नेटवर्क बनाने में पीपीपी मॉडल्स को भी सपोर्ट कर सकता है। नेशनल डिजिटल हेल्थ मिशन, नागरिकों के डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड और दूसरी आधुनिक तकनीकी को लेकर भी साझेदारी हो सकती है। देश से टीबी को खत्म करने के लिए हमने वर्ष 2025 तक का लक्ष्य रखा है। टीबी भी संक्रामक बीमारी है। टीबी की रोकथाम में भी मास्क पहनना, पहले बीमारी का पता लगाना और समय से उपचार, तीनों ही अहम हैं।
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‘Budget Announcements 2021-22’-India’s Defence केंद्रीय रक्षामंत्री राजनाथ सिंह का नया मंत्र- ‘मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड’

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‘Budget Announcements 2021-22’-India’s Defence केंद्रीय रक्षामंत्री राजनाथ सिंह का नया मंत्र- 'मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड'
– देश का रक्षा बजट 15 वर्षों में सबसे अधिक 18.75% बढ़ाया गया 
– भारत ने 2024 तक 35,000 करोड़ रुपये के निर्यात का लक्ष्य रखा 
– पिछले छह वर्षों में भारत के रक्षा निर्यात में 700% की वृद्धि हुई
 
नई दिल्ली। केंद्रीय रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि देश के रक्षा बजट में पिछले वर्ष की तुलना में पूंजीगत परिव्यय में 18.75% की अभूतपूर्व वृद्धि की गई है। यह पिछले वर्ष की तुलना में 30% और पिछले 15 वर्षों में सबसे अधिक है। भारत ने 2024 तक 35,000 करोड़ रुपये के स्वदेशी रक्षा उत्पादों का निर्यात करके 1,75,000 करोड़ रुपये का टर्नओवर प्राप्त करने का लक्ष्य रखा है। उन्होंने रक्षा उद्योग में ​देश की तकनीकी प्रगति के साथ दुनिया का जरूरतों को पूरा करने के लिए ‘मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड’ का नया नारा भी दिया।
रक्षामंत्री ने यह उपलब्धियां ​सोमवार को ’बजट​ घोषणाएं 2021-22’ और भारत की रक्षा पर वेबिनार में बताईं। उन्होंने कहा कि  स्वदेशी सैन्य उड्डयन सेवा में अब तक का सबसे बड़ा 48 हजार करोड़ रुपये का सौदा हाल ही में 83 एलसीए तेजस मार्क-ए के लिए एचएएल से किया गया है। अब स्वदेशी रूप से डिजाइन किए गए लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर (एलसीएच) के अनुबंध पर भी जल्द ही हस्ताक्षर होने की संभावना है। रक्षा मंत्रालय ने ऐसे कई कदम उठाए हैं, जिनमें से एक घरेलू और विदेशी पूंजी खरीद मार्गों में पूंजी खरीद बजट का द्विभाजन किया जा रहा है, ताकि घरेलू उद्योगों से खरीद सुनिश्चित की जा सके। राजनाथ सिंह ने कहा कि रक्षा निर्माण में स्वदेशीकरण का दीर्घकालिक महत्व यह बताता है कि हम भविष्य के लिए भारतीय रक्षा उद्योग का निर्माण करने के लिए स्वेच्छा से अपनाएंगे।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2021-2022 के लिए केंद्रीय बजट हमारी सरकार की अनूठी पहल है। इसे दूरदर्शी एजेंडा के तहत बनाया गया है जो देश की रक्षा और सुरक्षा के लिए सहायता प्रदान करेगा। कोरोना महामारी विशेष रूप से सामान्य और औद्योगिक क्षेत्र में आर्थिक विकास के लिए एक गंभीर झटका थी, इसीलिए यह पहला डिजिटल केंद्रीय बजट कोविड-19 को ध्यान में रखते हुए लाया गया है। कोरोना महामारी के दौरान सबसे ज्यादा लघु उद्योगों के सामने चुनौतियां आईं थीं, इसीलिए हमारा उद्देश्य न केवल अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाना था, बल्कि इस चुनौती के परिणामस्वरूप अवसरों की तलाश भी करना था। रक्षा खरीद में दिक्कतों का सामना हम अपनी आकांक्षाओं, क्षमता विकास की पहल और प्रौद्योगिकी में प्रगति से कर रहे हैं।
राजनाथ सिंह ने रक्षा उद्योग के भागीदारों और उपयोगकर्ताओं से आगे आने का आह्वान करते हुए कहा कि इस पारस्परिक रूप से लाभकारी संबंध को आगे बढ़ाने के लिए प्रौद्योगिकी में उन्नति का कारण बनें। ​रक्षा मंत्री ने कहा कि घरेलू खरीद पर 2021-22 के लिए परिव्यय का लगभग 63% निवेश करने की योजना बनाई गई है, यानी 2021-22 के दौरान घरेलू रक्षा खरीद पर लगभग 70221 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इससे लघु उद्योगों और स्टार्ट-अप सहित घरेलू खरीद पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा और इससे रक्षा क्षेत्र में रोजगार भी बढ़ेगा। भारत सरकार ने पिछले छह वर्षों में कई सुधार किए हैं। विदेशी निवेश को प्रोत्साहित करने, भारत में विनिर्माण इकाइयां स्थापित करने और संयुक्त उद्यम विकसित करने और रक्षा क्षेत्र में निजी भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ पर सरकार का सबसे ज्यादा जोर है।
उन्होंने कहा कि रक्षा उपकरणों के स्वदेशी डिजाइन और विकास को बढ़ावा देने के लिए डीएपी-2020 में स्वदेशी उपकरणों की खरीद को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। वर्तमान वर्ष के दौरान 75000 करोड़ मूल्य के समझौते किये गए हैं जिसमें से 87% भारत में बनाने से संबंधित हैं। इन सुधारों के कारण रक्षा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में 200% से अधिक की वृद्धि हुई है। पिछले छह वर्षों में रक्षा क्षेत्र में एफडीआई के लायक 2,871 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है। भारत सरकार ने रक्षा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में 100% तक की वृद्धि की है। हमारी पहल से पिछले छह वर्षों में रक्षा निर्यात में 700% की वृद्धि हुई है। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीपरी) ने 2020 में दुनिया के शीर्ष 25 निर्यातकों की सूची में भारत को भी शामिल किया है।
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