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मंत्री कपिलदेव कामत का निधन : कांग्रस से किया राजनीति की शुआत,जदयू में ली अंतिम सांस

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मंत्री कपिलदेव कामत का निधन : कांग्रस से किया राजनीति की शुआत,जदयू में ली अंतिम सांस
मंत्री कपिलदेव कामत का निधन : कांग्रस से किया राजनीति की शुआत,जदयू में ली अंतिम सांस

लदनियां, देशज टाइम्स मधुबनी ब्यूरो। बाबूबरही विधानसभा क्षेत्र के विधायक व पंचायती राज मंत्री कपिलदेव कामत का निधन गुरुवार का रात इलाज के दौरान पटना स्थित एम्स में हो गया। बताया जा है कि वे कोरोना से संक्रमित थे। मंत्री कपिलदेव कामत 69 के थे। लदनियां प्रखंड के मोतनाजे गांव में जन्म लिए पंचायती राज मंत्री कपिलदेव कामत के निधन की खबर सुनते क्षेत्र में शोक की लहर दौर गई।

मंत्री कपिलदेव कामत अपना राजनीतिक की शुआत 1977 ई से किया था। उन्होंने अपने राजनीतिक गुरु कांग्रेस के दिग्गज नेता पूर्व विधायक पं. स्व. महेन्द्र नारायण झा के सानिध्य में रहकर कांग्रेस पार्टी से सक्रिय राजनीति पारी शुरू किया। पूर्व विधायक महेंद्र बाबू मंत्री जी को मुनि जी कहकर पुकारते थे।

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1979 में वे राजनीतिक आंदोलन में 20 दिनों तक भागलपुर जेल में बन्द रहे। 1985 में विधानसभा चुनाव में बाबूबरही विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के गुणनन्द झा एवं पूर्व विधानसभा अध्यक्ष स्व. देवनारायण यादव के खिलाफ निर्दलीय प्रत्याशी के रुप भाग्य अजमाया। जिसमें हार का मुंह देखना पड़ा। 2001 में वे त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में लदनियां प्रखंड पंचायत समिति सदस्य चुने गये। प्रखंड प्रमुख पद के चुनाव में राजद के भोगेन्द्र यादव से आमने सामने के टक्कर में तीन मतों से पराजित हुए। प्रमुख पद पर हार जीत फैसले को लेकर मारपीट की घटना में पद्मा चोक पर गोली चली थी।

लदनियां थाना अलग अलग हुई केस में वे आरोपित बने। 2005 के विधानसभा चुनाव में पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. जगन्नाथ मिश्र की कृपा से जदयू का चुनाव चिन्ह मिला। चुनाव चिन्ह मिलते ही पुलिस पूर्व मामले में बाबूबरही विधानसभा क्षेत्र से नामांकन के बाद लदनियां थाना पुलिस गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत मधुबनी भेज दिया। वे उक्त मामले में मधुबनी मंडल कारा में 10 दिनों तक बन्द रहे। 2005 में जदयू के चुनाव चिन्ह पर फरवरी माह में बाबूबरही विधानसभा चुनाव लड़े। वे राजद के निर्वतमान विधायक प्रो. उमा कांत यादव से चुनाव हार गये।

2005 के नवम्बर में हुए विधानसभा चुनाव में उन्होंने राजद विधायक प्रो.उमा कांत यादव को पराजित कर पहलीबार विधानसभा पहुंचा। उन्हें 2010 के विधानसभा चुनाव में प्रो.उमा कांत यादव से हार का मुंह देखना पड़ा। 2015 में उन्होंने फिर जदयू प्रत्याशी के रूप में बाबूबरही विधानसभा क्षेत्र से ही विधायक पद के लिए भाग्य अजमाया। लोजपा प्रत्याशी पूर्व विधान पार्षद प्रो. विनोद कुमार सिंह को हराकर विधानसभा पहुंचे।

उन्हें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने कैबिनेट में मंत्री बनाकर पंचायती राज विभाग संभालने का जिम्मेदारी दिया। उन्होंने अपने मंत्री काल में सड़क, पुल, पुलिया, स्वास्थ्य, शिक्षा के क्षेत्र में कार्य का प्राथमिकता दिया। उन्होंने 18 सितंबर को सिधपकला चोक के पास साढ़े 26 करोड़ के लागत से निर्माण होने वाले विभिन्न गांव के सड़कों का शिलान्यास एवं कार्य आरंभ किया। आधा दर्जन योजनाओं का उद्घाटन किया।

उन्होंने अपने सम्बोधन में कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कृपा से इस पंच वर्षीय में डेढ़ अरब से अधिक के लागत से सड़क एवं पुल पुलिया निर्माण करवाया। धर्मवन योगा टोल एवं एकहरी के बीच साढ़े तीन करोड़ के लागत से पुल निर्माण होगा। योजना टेंडर में है। साथ ही कविलाशा-मोहनपुर के बीच सोनी नदी पर साढ़े तीन करोड़ के लागत से पुल निर्माण होगा।

प्रक्रिया टेंडर में है। अगर ये दोनों पुल निर्माण हो जाता है तो इसके बाद बाबूबरही विधानसभा क्षेत्र में कोई सड़क या पुल निर्माण कार्य नहीं रह जायेगा। कौन जानता था कि मंत्री कपिलदेव कामत का अपने गृह प्रखण्ड एवं विधानसभा क्षेत्र का अंतिम दौड़ा है।

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72 तालाब के गांव अकौर में खत्म हो गई तालाब, अब बुजुर्ग सुनाते अपनी जुबानी उसकी कहानी

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72 तालाब के गांव अकौर में खत्म हो गई तालाब, अब बुजुर्ग सुनाते अपनी जुबानी उसकी कहानी
72 तालाब के गांव अकौर में खत्म हो गई तालाब, अब बुजुर्ग सुनाते अपनी जुबानी उसकी कहानी

बेनीपट्टी, मधुबनी देशज  टाइम्स ब्यूरो। तालाबों का गांव के रुप में मशहूर बेनीपट्टी का अकौर गांव, आज सरकारी उदासीनता के कारण अपनी मौलिक पहचान खोने के कगार पर पहुंच चुका है। एक गांव में 72 तालाब,सुनकर थोड़ा अजीब लगेगा,परंतु ये सच है। बेनीपट्टी प्रखंड मुख्यालय के करीब 15 किमी उत्तरी-पूर्वी कोने पर बसा अकौर गांव,आज भी आध्यात्मिक गांव के तौर पर जाना जाता है।

अकौर गांव में 72 तालाब का होना अपने आप ही प्राकृतिक व धार्मिकता से लगाव के बारें में बता रहा है। प्रशासनिक उदासीनता एवं रखरखाव में कमी आने के कारण आज गांव का सोलह तालाब अस्तित्व से ही बाहर हो चुका है। स्थिति इतनी खराब है कि तालाब से परिपूर्ण रहने वाला गांव में आज इक्का-दुक्का तालाब ही सुरक्षित रह गये है।

ग्रामीणों के अनुसार कुछ तालाब को अतिक्रमण कर समतल कर दिया गया है। हैरत की बात है कि 72 तालाबों में से मात्र चार तालाब रक्साही, कमलदही, मलमालत व भटनी ही आज सैरात के काबिल रह गया है। जिससे मछुआ सोसायटी के माध्यम से मत्स्य विभाग को राजस्व प्राप्ति होती है।

वहीं पटवा संस्कृत उच्च विद्यालय एवं एक तालाब शिवसर राजकीय बुनियादी विद्यालय के अधीन रह गया है। जानकारी के अनुसार इन दो तालाबों की आमदनी विद्यालयों को दिया जाता है। वहीं अन्य करीब चार दर्जन तालाबों को स्थानीय लोगों ने स्वामित्व स्थापित कर लिया है। उधर शेष बचे तालाबों पर वर्षों से कब्जा किया जा चुका है।

अकौर में विराजमान है पिंडस्वरुपा भुवनेश्वरी भगवती

अकौर गांव धार्मिक दृष्टिकोण से बहुत ही महत्वपूर्ण है।यहां साक्षात भगवती पिंडस्वरुपा माता भुवनेश्वरी विराजमान है। जो गांव के मुख्य सड़क के किनारे ही अवस्थित है। किवदंती है कि अकौर कभी अकरुर महाराज की राजधानी हुआ करती थी। जिसके प्रमाण आज भी अक्सर देखने को मिलता है। अकौर गांव के तालाबों एवं अन्य स्थलों से खुदाई के समय कई देवी-देवताओं की मूर्ति प्राप्त होती है।

माना जाता है कि कभी यहां तालाबों के साथ कई देवी-देवताओं के मंदिर भी हुआ करती थी, जिसके कारण आज भी देवी के मूर्ति उखड़ते रहते है। माना जाता है कि माता भुवनेश्वरी के दरबार से आज तक कोई भक्त खाली हाथ नहीं लौटा है। माता सभी श्रद्धालुओं की मनोकामना पूर्ण करती है।

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विकास की शोर में बोकहा की सड़कों की बोलती बंद, हो चुका शर्म से खंड-खंड, कोने में पड़ा जर्जर

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विकास की शोर में बोकहा की सड़कों की बोलती बंद, हो चुका शर्म से खंड-खंड, कोने में पड़ा जर्जर

बेनीपट्टी, मधुबनी देशज टाइम्स ब्यूरो। जनप्रतिनिधियों के अड़ियल रवैया के कारण मधवापुर प्रखंड के सलेमपुर पंचायत का बोकहा गांव आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहा है। गांव के करीब बारह सौ परिवारों के वोट पर न जाने कितने जनप्रतिनिधि निर्वाचित होकर अपने भाग्य को पलट लिया, लेकिन इन मतदाताओं के भाग्य को पलटने की हिम्मत अब तक किसी ने नहीं दिखाई है। जिसके कारण बोकहा के लोगों को आज भी पगडंडी होकर आवाजाही कर रहे है।

 

पगडंडी की स्थिति भी इतनी खराब है कि बारिश के मौसम में तो दूर रातों को आपात स्थिति में निकलने से भी परहेज करते है। जगह-जगह असमान्य कच्ची पथ है। वहीं कैनाल के समीप तो पथ की स्थिति अत्यंत ही खराब है। गौरतलब है कि बोकहा गांव के बसे दो पूर्वी व पश्चिमी मुहल्लें में करीब बारह सौ परिवार बसते है। गांव के कुछ जगहों पर वर्षों पूर्व निर्मित सड़कें है। वहीं पांच माह पूर्व आए बाढ़ में गांव के मुख्य पूल के समीप कटाव हो गया था। जिसे मिट्टी डालकर भर दिया गया है।

पुल पर चढ़ने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कटाव स्थल पर डाले गए ईंट-पत्थर के असमान्य होने से आवाजाही में ठोकर लगने की संभावना बनी रहती है। ऐसी स्थिति बीमार लोगों अथवा प्रसव वेदना से पीड़ित गर्भवती महिलाओं को किस प्रकार मुख्यालय ले जाया जाता होगा, इसका अंदाजा लगाना सहज है।

गांव के महेन्द्र यादव, नीरज यादव, पंडित यादव, छोटकन यादव, रामस्वार्थ यादव समेत कई लोगों ने बताया कि मुख्य सड़क के अभाव में बारिश के समय काफी परेशानी होती है। लगातार बारिश होने पर गांव में बाईक ले आना, संभव नहीं होता है। जानकारी दें कि साहरघाट-बेनीपट्टी मुख्य पथ से करीब दो किमी दूरी पर बोकहा गांव अवस्थित है। गांव में यादवों की जनसंख्या अधिक है। गांव में विकास कार्य धरातल पर नहीं होने के कारण गांव में मूलभूत सुविधाओं की घोर कमी देखी गयी।

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चिकित्सा प्रभारी के नाम पर चल रहा अवैध अल्ट्रासाउंड सेंटर, बोर्ड पर लिखा है प्रभारी का नाम-डिग्री

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चिकित्सा प्रभारी के नाम पर चल रहा अवैध अल्ट्रासाउंड सेंटर, बोर्ड पर लिखा है प्रभारी का नाम-डिग्री
चिकित्सा प्रभारी के नाम पर चल रहा अवैध अल्ट्रासाउंड सेंटर, बोर्ड पर लिखा है प्रभारी का नाम-डिग्री

हरलाखी, देशज टाइम्स मधुबनी ब्यूरो। स्थानीय प्रखंड मुख्यालय उमगांव में वर्षों से दर्जनों फर्जी निजी नर्सिंग होम संचालित है। जहां आए दिन झोलाछाप चिकित्सकों की लापरवाही से कई मरीजों की मौतें भी हो चुकी है। लेकिन लाख शिकायत व खबर प्रकाशन के बावजूद अवैध फर्जी निजी नर्सिंग संचालकों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।

दरसअल विभागीय प्रशासन की मिलीभगत से अवैध निजी नर्सिंग होम बेरोकटोक चल रहे हैं। इतना ही नहीं उमगांव सीएचसी के बगल में प्रभारी चिकित्सा प्रभारी के नाम पर एक अवैध निजी नर्सिंग होम व एक अल्ट्रासाउंड सेंटर भी चल रहे हैं। जय मिथिला अल्ट्रासाउंड सेंटर के बोर्ड पर उमगांव सीएचसी के प्रभारी चिकित्सा प्रभारी का नाम डॉ. अजीत कुमार सिंह व डिग्री एमबीबीएस पीएचडी लिखा हुआ है।

वहीं मां जानकी सेवा सदन के बोर्ड पर भी प्रभारी का सॉर्ट नेम डॉ. एके सिंह व डिग्री एमबीबीएस पीएचडी लिखा हुआ है। इस बारे में पूछे जाने पर नर्सिंग होम संचालक व अल्ट्रासाउंड के संचालक महेश ठाकुर ने बताया कि प्रभारी से सहमति लेकर उनका नाम लिखा गया है। वहीं सीएचसी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अजीत कुमार सिंह ने बताया कि बोर्ड से नाम हटाने का निर्देश दे दिया गया है। आज से कल तक मे नाम हटा दिया जाएगा।

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