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धौंस दिखा रही बिस्फी में धौंस,दमला से कमतौल सड़क पर तेज बहाव, कई डार्यवसन पर पानी

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धौंस दिखा रही बिस्फी में धौंस,दमला से कमतौल सड़क पर तेज बहाव, कई डार्यवसन पर पानी
धौंस दिखा रही बिस्फी में धौंस,दमला से कमतौल सड़क पर तेज बहाव, कई डार्यवसन पर पानी

बिस्फी, मधुबनी देशज टाइम्स ब्यूरो। सरकार जनप्रतिनिधि व प्रशासनिक अधिकारी बाढ़ से निपटने को लेकर ताना-बाना कागजों पर बुनते रहे हैं। कमला व धौंस नदी का पानी क्षेत्र में दूसरी बार बाढ़ बनकरफैल गया। धौस नदी से निकलने वाली पानी चोर व सड़कों पर फैल गया। इससे हजारों एकड़ में लगी धान समेत साग-सब्जी की फसल नष्ट हो गई।

कई दशकों से बाढ़ व सुखाड़ का दंश झेलते आ रहे बिस्फी प्रखंड क्षेत्र के किसानों को फिर से नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। धौंस नदी में बाढ़ का पानी बढ़ रहा है। यदि इसी वृद्धि हुई तो कई गांव में फैलने के साथ सड़कों का संपर्क भंग हो सकता है। वहीं, बलहा,जगवन पूर्वी, पश्चिमी पंचायत, भैरवा,रथौस,रधौली पंचायतों के कई क्षेत्रों में बाढ़ का पानी फैल गया है।

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जानकारी के अनुसार कमलाबारी-माधोपुर, मुनीराबाद स्कूल के नजदीक सड़क संपर्क भंग हो गया। वहीं, दमला से कमतौल, मुनीटोल से बलहा घाट,कमलाबारी से दमला के बीच में सड़क पर बाढ़ का पानी चढ़ जाने व तेज बहाव के कारण सड़क संपर्क भंग होने से लोगों की परेशानी बढ़ती जा रही है।

प्रशासन की ओर से तत्काल दो नाव लगाई गई है। वहीं जानीपुर मुसहरी,कमलाबारी,मुनीराबाद सहित आधा दर्जन से अधिक विद्यालयों में पानी भर जाने के कारण स्कूल में शिक्षकों का आना जाना बंद सा हो गया है।

बिस्फी चहुटा सदुल्लहपुर सहित कई पंचायत के गांव पर खतरा मंडराने लगा है। धौंस नदी कि उफनाहट देखकर इन गांव के लोग रतजगा कर रहे हैं। वहीं कई जगह पर डायवर्सन पर पानी चढ़ने के कारण सामुदायिक स्वास्थ्य व शिक्षा खाद्य आपूर्ति पर भी प्रभाव पड़ने लगा है। अस्पताल ले जाने में परिजनों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

क्या कहते हैं सीओ
बिस्फी अंचलाधिकारी प्रभात कुमार ने देशज टाइम्स को बताया, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों पर नजर रखी जा रही है। जहां नाव की आवश्यकता होगी तत्काल मुहैया कराया जाएगा।

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नरेन्द्र मोदी के शासन में हुआ राम मंदिर निर्माण शुरूः रवि शंकर प्रसाद

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नरेन्द्र मोदी के शासन में हुआ राम मंदिर निर्माण शुरूः रवि शंकर प्रसाद
नरेन्द्र मोदी के शासन में हुआ राम मंदिर निर्माण शुरूः रवि शंकर प्रसाद

मधुबनी, देशज न्यूज डेस्क। केन्द्रीय कानून मंत्री रविषंकर प्रसाद ने कहा है कि वर्षो से राम मंदिर का विवाद उलझा हुआ था। मोदी जी के शासनकाल में अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण कराया। उक्त बाते उन्होने बेनीपट्टी से भाजपा प्रत्याषी सह मंत्री बिनोद नारायण झा के नामांकन के बाद आयोजित सभा को सम्बोधित करते हुए कहा। श्री प्रसाद ने कहा कि राज्य में डबल इंजन की सरकार में बिहार का समुचित विकास हुआ है। उन्होंने कहा कि बिहार में 15 वर्ष के शासनकाल में राज्य के सभी क्षेत्रों का विकास हुआ।

अपराध नियंत्रण से लेकर गांव को मुख्य सड़कों से जोड़ने का काम हुआ। कानून मंत्री ने भाजपा प्रत्याशी विनोद नारायण झा को अपार समर्थन देकर अपना कीमती मत देने की अपील की। जबकि भाजपा नेता सह सांसद रामकृपाल यादव ने कहा कि उन्होंने राजद में 30 वर्षो तक सेवा की। परंतु,अपने परिवार के लिए राजद ने उन्हें दूध में मक्खी की तरह उन्हें फेंक दिया। मौके पर प्रत्याशी विनोद नारायण झा,विमल झा,सांसद अशोक यादव,खुशबू कुमारी,किरण झा,शंकर झा सहित भाजपा व राजग के कई नेता उपस्थित थे।

 

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72 तालाब के गांव अकौर में खत्म हो गई तालाब, अब बुजुर्ग सुनाते अपनी जुबानी उसकी कहानी

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72 तालाब के गांव अकौर में खत्म हो गई तालाब, अब बुजुर्ग सुनाते अपनी जुबानी उसकी कहानी
72 तालाब के गांव अकौर में खत्म हो गई तालाब, अब बुजुर्ग सुनाते अपनी जुबानी उसकी कहानी

बेनीपट्टी, मधुबनी देशज  टाइम्स ब्यूरो। तालाबों का गांव के रुप में मशहूर बेनीपट्टी का अकौर गांव, आज सरकारी उदासीनता के कारण अपनी मौलिक पहचान खोने के कगार पर पहुंच चुका है। एक गांव में 72 तालाब,सुनकर थोड़ा अजीब लगेगा,परंतु ये सच है। बेनीपट्टी प्रखंड मुख्यालय के करीब 15 किमी उत्तरी-पूर्वी कोने पर बसा अकौर गांव,आज भी आध्यात्मिक गांव के तौर पर जाना जाता है।

अकौर गांव में 72 तालाब का होना अपने आप ही प्राकृतिक व धार्मिकता से लगाव के बारें में बता रहा है। प्रशासनिक उदासीनता एवं रखरखाव में कमी आने के कारण आज गांव का सोलह तालाब अस्तित्व से ही बाहर हो चुका है। स्थिति इतनी खराब है कि तालाब से परिपूर्ण रहने वाला गांव में आज इक्का-दुक्का तालाब ही सुरक्षित रह गये है।

ग्रामीणों के अनुसार कुछ तालाब को अतिक्रमण कर समतल कर दिया गया है। हैरत की बात है कि 72 तालाबों में से मात्र चार तालाब रक्साही, कमलदही, मलमालत व भटनी ही आज सैरात के काबिल रह गया है। जिससे मछुआ सोसायटी के माध्यम से मत्स्य विभाग को राजस्व प्राप्ति होती है।

वहीं पटवा संस्कृत उच्च विद्यालय एवं एक तालाब शिवसर राजकीय बुनियादी विद्यालय के अधीन रह गया है। जानकारी के अनुसार इन दो तालाबों की आमदनी विद्यालयों को दिया जाता है। वहीं अन्य करीब चार दर्जन तालाबों को स्थानीय लोगों ने स्वामित्व स्थापित कर लिया है। उधर शेष बचे तालाबों पर वर्षों से कब्जा किया जा चुका है।

अकौर में विराजमान है पिंडस्वरुपा भुवनेश्वरी भगवती

अकौर गांव धार्मिक दृष्टिकोण से बहुत ही महत्वपूर्ण है।यहां साक्षात भगवती पिंडस्वरुपा माता भुवनेश्वरी विराजमान है। जो गांव के मुख्य सड़क के किनारे ही अवस्थित है। किवदंती है कि अकौर कभी अकरुर महाराज की राजधानी हुआ करती थी। जिसके प्रमाण आज भी अक्सर देखने को मिलता है। अकौर गांव के तालाबों एवं अन्य स्थलों से खुदाई के समय कई देवी-देवताओं की मूर्ति प्राप्त होती है।

माना जाता है कि कभी यहां तालाबों के साथ कई देवी-देवताओं के मंदिर भी हुआ करती थी, जिसके कारण आज भी देवी के मूर्ति उखड़ते रहते है। माना जाता है कि माता भुवनेश्वरी के दरबार से आज तक कोई भक्त खाली हाथ नहीं लौटा है। माता सभी श्रद्धालुओं की मनोकामना पूर्ण करती है।

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विकास की शोर में बोकहा की सड़कों की बोलती बंद, हो चुका शर्म से खंड-खंड, कोने में पड़ा जर्जर

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विकास की शोर में बोकहा की सड़कों की बोलती बंद, हो चुका शर्म से खंड-खंड, कोने में पड़ा जर्जर

बेनीपट्टी, मधुबनी देशज टाइम्स ब्यूरो। जनप्रतिनिधियों के अड़ियल रवैया के कारण मधवापुर प्रखंड के सलेमपुर पंचायत का बोकहा गांव आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहा है। गांव के करीब बारह सौ परिवारों के वोट पर न जाने कितने जनप्रतिनिधि निर्वाचित होकर अपने भाग्य को पलट लिया, लेकिन इन मतदाताओं के भाग्य को पलटने की हिम्मत अब तक किसी ने नहीं दिखाई है। जिसके कारण बोकहा के लोगों को आज भी पगडंडी होकर आवाजाही कर रहे है।

 

पगडंडी की स्थिति भी इतनी खराब है कि बारिश के मौसम में तो दूर रातों को आपात स्थिति में निकलने से भी परहेज करते है। जगह-जगह असमान्य कच्ची पथ है। वहीं कैनाल के समीप तो पथ की स्थिति अत्यंत ही खराब है। गौरतलब है कि बोकहा गांव के बसे दो पूर्वी व पश्चिमी मुहल्लें में करीब बारह सौ परिवार बसते है। गांव के कुछ जगहों पर वर्षों पूर्व निर्मित सड़कें है। वहीं पांच माह पूर्व आए बाढ़ में गांव के मुख्य पूल के समीप कटाव हो गया था। जिसे मिट्टी डालकर भर दिया गया है।

पुल पर चढ़ने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कटाव स्थल पर डाले गए ईंट-पत्थर के असमान्य होने से आवाजाही में ठोकर लगने की संभावना बनी रहती है। ऐसी स्थिति बीमार लोगों अथवा प्रसव वेदना से पीड़ित गर्भवती महिलाओं को किस प्रकार मुख्यालय ले जाया जाता होगा, इसका अंदाजा लगाना सहज है।

गांव के महेन्द्र यादव, नीरज यादव, पंडित यादव, छोटकन यादव, रामस्वार्थ यादव समेत कई लोगों ने बताया कि मुख्य सड़क के अभाव में बारिश के समय काफी परेशानी होती है। लगातार बारिश होने पर गांव में बाईक ले आना, संभव नहीं होता है। जानकारी दें कि साहरघाट-बेनीपट्टी मुख्य पथ से करीब दो किमी दूरी पर बोकहा गांव अवस्थित है। गांव में यादवों की जनसंख्या अधिक है। गांव में विकास कार्य धरातल पर नहीं होने के कारण गांव में मूलभूत सुविधाओं की घोर कमी देखी गयी।

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