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Bihar

लोक आस्था के महापर्व पर अक्सर लिखते रहने वाली गोवा की राज्यपाल मृदुला सिन्हा का निधन

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लोक आस्था के महापर्व पर अक्सर लिखते रहने वाली गोवा की राज्यपाल मृदुला सिन्हा का निधन
लोक आस्था के महापर्व पर अक्सर लिखते रहने वाली गोवा की राज्यपाल मृदुला सिन्हा का निधन

पटना, देशज न्यूज। गोवा की राज्यपाल मृदुला सिन्हा का निधन हो गया है. वे शुरू से जनसंघ से जुड़ी रही हैं. भाजपा की प्रभावी नेता थीं. उनका जन्म 27 नवंबर 1942 को मुजफ्फरपुर में हुआ था। उनके निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सहित भाजपा के नेताओं ने गहरी शोक संवेदना व्यक्त की है।

लोक आस्था के महापर्व पर अक्सर लिखती रहीं हैं

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मृदुला सिन्हा पांचवां स्तम्भ नाम से एक सामाजिक पत्रिका भी निकाल चुकी हैं। वे एक हिन्दी लेखिका के साथ-साथ भारतीय जनता पार्टी की केन्द्रीय कार्यसमिति की सदस्य भी थीं. अटल बिहारी वाजपेयी जब प्रधानमंत्री थे, तब उनके कार्यकाल में केन्द्रीय समाज कल्याण बोर्ड की अध्यक्ष भी रह चुकी हैं. उनकी पुस्तक पर एक फिल्म भी बनी थी।

मृदुला सिन्हा एक सफल राजनीतिज्ञ के अलावा लोक परंपराओं के बारे में भी लिखती रही हैं. लोक आस्था के महापर्व छठ महापर्व पर जब लिखती थीं, तो लगता था जैसे-गांव की मिट्टी की सोंधी सुगंध बिखर गई हो।

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Darbhanga

अंग्रेजी के विद्वान, प्रखर वक्ता प्रो.अरुण कुमार झा का यूं अचानक जाना संपूर्ण मिथिला की क्षति

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अंग्रेजी के विद्वान, प्रखर वक्ता प्रो.अरुण कुमार झा का यूं अचानक जाना संपूर्ण मिथिला की क्षति
अंग्रेजी के विद्वान, प्रखर वक्ता प्रो.अरुण कुमार झा का यूं अचानक जाना संपूर्ण मिथिला की क्षति

मुख्य बातें
सीएम कॉलेज के प्रधानाचार्य की अध्यक्षता में शोकसभा आयोजित, प्रो. अरुण कुमार झा प्रखर वक्ता व मूर्धन्य विद्वान के रूप में सदा याद किए जाएंगे : प्रो. विश्वनाथ, मानवीय गुणों से युक्त अरुण कुमार arun kumar jha आदर्श और मिलनसार शिक्षक रहे : प्रो इंदिरा, दिवंगत आत्मा की शांति के लिए महाविद्यालय में रखा गया 2 मिनट का मौन

दरभंगा, देशज टाइम्स ब्यूरो। अंग्रेजी के मूर्धन्य विद्वान एवं प्रखर वक्ता के रूप में प्रो. अरुण कुमार झा सदा याद किए जाएंगे।मैथिली साहित्य के विकास में भी उनका योगदान अविस्मरणीय है। बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी प्रो. झा arun kumar jha  एक अपराजेय शिक्षक थे। उक्त बातें सी एम कॉलेज, दरभंगा के प्रधानाचार्य प्रो. विश्वनाथ झा ने महाविद्यालय के पूर्व अंग्रेजी विभागाध्यक्ष प्रो अरुण कुमार झा के असामयिक निधन के कारण महाविद्यालय में आयोजित शोकसभा की अध्यक्षता करते हुए कहा।अंग्रेजी के विद्वान, प्रखर वक्ता प्रो.अरुण कुमार झा का यूं अचानक जाना संपूर्ण मिथिला की क्षतिशोकसभा में अंग्रेजी विभागाध्यक्ष प्रो इंदिरा झा,प्रो. मंजू राय, डॉ. अमरेंद्र शर्मा,डॉ. प्रीति कनोडिया,डॉ. मनोज कुमार सिंह,डॉ. पी के चौधरी, संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ. आर एन चौरसिया, डॉ. नरेंद्र कुमार झा, प्रो, शिप्रा सिन्हा, डॉ. रीना कुमारी,परीक्षा नियंत्रक डॉ. मयंक श्रीवास्तव,इतिहास विभागाध्यक्ष प्रो, दिवाकर कुमार, प्रो.ललित शर्मा,डॉ. संजय कुमार,डॉ. अखिलेश कुमार ‘विभु’,विपिन कुमार, सृष्टि चौधरी, डा, बिरेंद्र कुमार झा,प्रतुल कुमार सहित अनेक शिक्षक,कर्मचारी एवं छात्र-छात्राएं शामिल हुए।

प्रो. इंदिरा झा ने कहा कि अरुण कुमार झा एक आदर्श एवं अत्यधिक लोकप्रिय शिक्षक थे,जिनकी शिक्षण-शैली काफ़ी प्रभावशाली थी। मानवीय गुणों से युक्त प्रो. झा एक कुशल प्रशासक एवं प्रबंधक थे। डॉ. अमरेंद्र शर्मा ने कअंग्रेजी के विद्वान, प्रखर वक्ता प्रो.अरुण कुमार झा का यूं अचानक जाना संपूर्ण मिथिला की क्षतिहा कि संवेदनशील व्यक्तित्व के धनी प्रो झा सबों के प्रिय तथा मधुर एवं मितभाषी थे। अंग्रेजी साहित्य के अनुसंधान क्षेत्र में उनका महत्वपूर्ण एवं सराहनीय योगदान है।

प्रो. मंजू राय ने कहा कि अरुण बाबू की अंग्रेजी साहित्य में गहरी पैठ थी।वे शिक्षकों को भी अध्ययन- पद्धति की जानकारी देते थे। राष्ट्र स्तरीय एवं उत्कृष्ट जर्नल ‘दि एविल’ के प्रधान संपादक के रूप में शोधार्थियों एवं शिक्षकों से उत्कृष्ट आलेख तैयार करवाते थे।

जानकारी के अनुसार, 1975 में सी एम कॉलेज,दरभंगा में अंग्रेजी व्याख्याता के रूप में सेवा प्रारंभ करने वाले अरुण कुमार झा 2008 ईस्वी में विश्वविद्यालय अंग्रेजी विभाग के अध्यक्ष बन कर गए, जहां वे मानविकी संकाय की डीन बनकर नवंबर 2015 में अवकाश ग्रहण किया।20 नवंबर 2020 को प्रो. अरुण कुमार झा का असामयिक निधन हो गया। शोकसभा के अंत में दिवंगत आत्मा की शांति के लिए 2 मिनट का मौन रखा गया।

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Madhubani

मधुबनी सदर अस्पताल के पोस्टमार्टमकर्मी पर शंकर चौक पर दिन-दहाड़े जानलेवा हमला

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मधुबनी सदर अस्पताल के पोस्टमार्टमकर्मी पर शंकर चौक पर दिन-दहाड़े जानलेवा हमला
मधुबनी सदर अस्पताल के पोस्टमार्टमकर्मी पर शंकर चौक पर दिन-दहाड़े जानलेवा हमला

मधुबनी,madhubni देशज टाइम्स ब्यूरो। शहर के बाटा चौक मोहल्ला में बुधवार दोपहर लोगों ने सदर अस्पताल के पोस्टमार्टम कर्मी गुड्डू कुमार मल्लिक पर जानलेवा हमले कर दिये। सिर पर गंभीर चोट आने से वह बुरी तरह जख्मी हो गया।

परिजन उन्हें बचाने आए तो उसके साथ भी बुरी तरह मारपीट की गई। घटना में तीन लोग जख्मी हुए हैं। स्थानीय लोगों ने जख्मियों को सदर अस्पताल में भर्ती कराया है। सूचना मिलते ही नगर पुलिस घटनास्थल पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। दारोगा महेश सिंह ने सदर अस्पताल पहुंचकर जख्मियों का बयान कलमबंद किया है।

उन्होंने बताया कि आधा दर्जन से अधिक लोगों पर मारपीट करने का आरोप लगाया है। जख्मी मीरा देवी ने बताया कि उसका लड़का गुड्डू मल्लिक अस्पताल से खाना खाने घर आ रहे था।

इसी दौरान कैलाश मल्लिक, सन्नी मल्लिक, राहुल मल्लिक, आकाश मल्लिक एवं अन्य लोगों ने चाकू, लोहे के रड और ईट पत्थर से हमला कर दिये। वह बचाने गई तो इनके साथ भी बुरी तरह मारपीट की। नगर थानाध्यक्ष धरमपाल ने बताया कि जख्मी के बयान पर प्राथमिकी दर्ज कर दोषी लोगों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।मधुबनी सदर अस्पताल के पोस्टमार्टमकर्मी पर शंकर चौक पर दिन-दहाड़े जानलेवा हमला

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बच्चों को शिक्षित, शिक्षित समाज की जुनून वाले अंधराठाढ़ी के पहले इंजीनियर शिवदत्त झा नहीं रहे

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बच्चों को शिक्षित, शिक्षित समाज की जुनून वाले अंधराठाढ़ी के पहले इंजीनियर शिवदत्त झा नहीं रहे
बच्चों को शिक्षित, शिक्षित समाज की जुनून वाले अंधराठाढ़ी के पहले इंजीनियर शिवदत्त झा नहीं रहे

अंधराठाढ़ी देशज रिपोर्टर/मधुबनी ब्यूरो। स्थानीय प्रखंड के ठाढ़ी गांव निवासी और गांव के पहले इंजीनियर शिवदत्त झा का आकस्मिक निधन हो गया। कुछ दिन पहले ही वो अचानक बीमार हो गए थे। इलाज के दौरान ही उनका निधन हो गया। श्री झा के निधन से उनके पैतृक गांव में शोक की लहर है। वामपंथी विचारधारा के 85 वर्षीय श्री झा बच्चों को शिक्षित करने और शिक्षित समाज की स्थापना के जुनून में उन्होंने इंजीनियर की नौकरी छोड़ दी।

उन्होंने पहली नौकरी गोरगामा हाई स्कूल से शुरू की। बाद में कई स्कूलों में विज्ञान शिक्षक की जिम्मेदारी निभाते हुए प्रोजेक्ट बालिका उच्च विद्यालय अंधराठाढ़ी से सेवानिवृत्त हुए। उस समय शिक्षकों का आर्थिक हाल अच्छा नही था। लोगों ने उनके इस क्रान्तिकाती कदम की खूब आलोचना की। मगर दृढ़ निश्चयी झा अपने निर्णय पर अडिग रहे। एक शानदार कैरियर को लात मारकर श्री झा ने ग्रामीण बच्चों के लिए शिक्षा का जो दीप जलाया वो आज भी रौशन है।

उनके दर्जनों बच्चे आज उच्च मुकाम हासिल कर उनके सपनो को सच कर रहे हैं। साधारण ग्रामीण परिवेश से सफलता के जिस उच्चतम सोपान तक पहुंचे वो लोगो के लिए आदर्श है। साधारण किसान के बेटे श्री झा पश्चिम बंगाल से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। लेकिन शिक्षा से लगाव होने के चलते इंजीनियर की नौकरी के बजाए उन्होंने शिक्षक बनना पसंद किया। श्री झा अपने पीछे दो पुत्र, एक पुत्री, और पोते पोतियों सहित भरा पूरा परिवार छोड़ कर गए हैं।

मुखाग्नि उनके ज्येष्ठ पुत्र गणेशदत्त झा ने दी। महेश दत्त झा विष्णु दत्त झा ब्रह्म दत्त झा देवदत्त झा जय दत्त झा शंभू दत्त झा धर्म दत्त झा केशव दत्त झा कृष्ण दत्त झा शंकर दत्त झा भगवान दत्त झा, प महेश झा, पुरषोत्तम झा, सियाराम झा, राधेश्याम झा, बाबुनन्दन झा, रामनारायण झा, बासुकीनाथ झा आदि ने गहरी शोक संवेदना व्यक्त की है।बच्चों को शिक्षित, शिक्षित समाज की जुनून वाले अंधराठाढ़ी के पहले इंजीनियर शिवदत्त झा नहीं रहे

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