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Darbhanga

NDRF की टीम पहुंची दरभंगा, बढ़ेगी मोटर बोट की संख्या, एक टीम की रहेगी बिरौल में चौकसी

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NDRF की टीम पहुंची दरभंगा, बढ़ेगी मोटर बोट की संख्या, एक टीम की रहेगी बिरौल में चौकसी

दरभंगा, देशज टाइम्स ब्यूरो। डीएम डॉ. त्यागराजन एसएम ने अंचलाधिकारी, बहेड़ी, बिरौल, हनुमाननगर व बहादुरपुर को बज्रपात से मरे लोगों के निकटतम आश्रित को आपदा प्रावधान के तहत अनुग्रह अनुदान की राशि का आज ही भुगतान करने को कहा है। वहीं, संबंधित अंचलाधिकारियों ने डीएम डॉ.एसएम को बताया है, उनके अंचल में एक-एक व्यक्ति की वज्रपात से मौत हुई है।  शव का पंचनामा/पोस्टमोर्टम आदि की प्रक्रिया पूरी करके उनके आश्रितों को 04-04 लाख अनुग्रह अनुदान की राशि आज ही सौप दी जाएगी।

डीएम डॉ.एसएम ने अन्य सभी अंचलाधिकारियों को भी किसी व्यक्ति के बाढ़/ वज्रपात के कारण मृत्यु हो जाने पर आपदा प्राबधान के तहत उनके आश्रित को तुरंत अनुदान की राशि का भुगतान कर देने का निर्देश दिया है। कहा है, बाढ़ आपदा से प्रभावित पीड़ित व्यक्ति को फौरी तौर पर सभी सहूलियतें पहुंचाई जाएं। इस कार्य में तनिक भी लापरबाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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NDRF की टीम पहुंची दरभंगा, बढ़ेगी मोटर बोट की संख्या, एक टीम की रहेगी बिरौल में चौकसीकहा, संकट के समय में लोगों को हर सम्भव सहायता पहुंचाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है।  उन्होंने यह बातें कार्यालय प्रकोष्ठ में आयोजित बाढ़-आपदा की समीक्षा बैठक में कहीं। डीएम डॉ.एसएम ने सभी अंचलाधिकारी/बीडीओ को वर्षापात व नदियों के जलस्तर में वृद्धि की स्थिति पर बराबर नजर रखने व जिला आपदा कार्यालय में प्रतिवेदन भेजते रहने को कहा है।

उन्होंने कहा है, एनडीआरएफ की 24 सदस्यीय टीम सभी साजो समान के साथ दरभंगा में आ चुकी है। उन्होंने  एनडीआरएफ के इंस्पेक्टर राजीव कुमार को टीम मेंबर व मोटर बोट की संख्या बढ़ाने व एक टीम बिरौल में रखने का निर्देश दिया है,  ताकि उक्त क्षेत्र में आपातकालीन स्थिति में राहत एवं बचाव कार्य तेजी से शुरू किया जा सके।

डीएम डॉ.एसएम ने  आज गत वर्ष के बाढ़ में क्षतिग्रस्त हुए मकानों के लाभुकों को मुआवजे की राशि का भुगतान की स्थिति की समीक्षा करते हुए पाया कि क्षतिग्रस्त मकान के जियो फोटोग्राफ व सत्यापन के अभाव में कतिपय लाभार्थियों को मुआवजे की राशि का भुगतान नहीं हो पाया है। इसमें 543 क्षतिग्रस्त मकानों का सत्यापन नहीं पाया गया है। 502 क्षतिग्रस्त मकानों का जियोटैग फोटो प्राप्त नहीं हुआ है। पूर्व में 442 लाभुकों को अंचल स्तर पर व 1290 लाभुकों को जिला स्तर पर मुआवजे की राशि का भुगतान किया जा चुका है।

NDRF की टीम पहुंची दरभंगा, बढ़ेगी मोटर बोट की संख्या, एक टीम की रहेगी बिरौल में चौकसीडीएम डॉ.एसएम ने  ने सभी अंचलाधिकारी को छूटे हुए पात्र लाभुकों को मुआवजे की राशि का भुगतान करने के लिए स्पष्ट अनुशंसा के साथ दो दिनों के अंदर रिपोर्ट भेजने का निर्देश दिया है। कहा है, अंचलाधिकारी के अनुशंसा के आधार पर जिला आपदा कार्यालय से लाभुको को मुआवजे की राशि का भुगतान तुरंत कर दी जाएगी।

उन्होंने  सभी अंचलाधिकारी को पुनः पर्याप्त संख्या में नावों की व्यवस्था सुनिश्चित करा लेने, शरण स्थली में सभी बुनियादी सुविधाएं दुरूस्त कर लेने का निदेश दिया है। बैठक में अपर समाहर्त्ता विभूति रंजन चौधरी, आपदा प्रभारी, एन.डी.आर.एफ. के इंस्पेक्टर, सभी अंचलाधिकारी, सभी प्रखंड विकास पदाधिकारी समेत अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

145 साल पुराने दरभंगा से पहली बार खबरों का गरम भांप ...असंभव से आगे देशज टाइम्स हिंदी दैनिक। वेब पेज का संपूर्ण अखबार। दरभंगा खासकर मिथिलाक्षेत्रे, हमार प्रदेश, सारा जहां की ताजा खबरें। रोजाना नए कलेवर में। फिल्म-नौटंकी के साथ सरजमीं को समेटे। सिर्फ देशज टाइम्स में, पढि़ए, जाग जाइए।

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BIRAUL

बिरौल में जमीन दिलाने के नाम पर रिटायर्ड शिक्षक से लाखों डकारे

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बिरौल में जमीन दिलाने के नाम पर रिटायर्ड शिक्षक से लाखों  डकारे

बिरौल देशज टाइम्स ब्यूरो। प्रखंड मुख्यालय व उसके आसपास के इलाके में जमीन की खरीद-बिक्री कराने वाले एक सुपौल बाजार के नामचीन दलाल गिरोह का करतूत सामने आया है, जो एक रिटायर्ड शिक्षक वैद्यनाथ यादव को जमीन खरीदवाने के नाम पर लाखों रुपए लेकर भी अब तक जमीन उपलब्ध कराने की बजाए अनदेखी कर रहा है।

पीड़ित वैद्यनाथ यादव ने देशज टाइम्स को बताया कि मुझे जमीन खरीदवाने के नाम पर उक्त दलाल  ने 10 जनवरी 2020 को पहले 21हजार उसके बाद उसने 13 जनवरी 2020 को अपने साला व बहेड़ा स्थित एक टेंट हाउस के नाम से 12 लाख व पुनः उक्त दलाल ने भी इसी तिथि को अपने नाम से 2 लाख 40 हजार रुपए लिया है।

यह सभी राशि एसबीआई बैंक के विभिन्न चेक के माध्यम से दलाल ने प्राप्त किया है। वैद्यनाथ यादव ने कहा कि इसके अलावा उक्त दलाल ने अग्रिम के रुप में 2 लाख रुपए नगद भी लिया है। लेकिन, जमीन का रजिस्ट्री कराने की बजाए उसने अपनी मजबूरी बता कर पांच महीने बीता दिया।

अब जब उसे कुल 16 लाख रुपए वापस करने के लिए कहा जा रहा है तो वह आजकल कर रहा है। रिटायर्ड शिक्षक वैद्यनाथ यादव व उनके परिजनों का कहना है कि अब उक्त दलाल के विरुद्ध कानून के शरण में जाने की तैयारी की जा रही है।

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Bihar

दरभंगा में कोरोना से मौत के बाद मरी हुई इंसानियत को रातभर जिंदा करते रहे नवीन-बदरुजम्मा

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दरभंगा में कोरोना से मौत के बाद मरी हुई इंसानियत को रातभर जिंदा करते रहे नवीन-बदरुजम्मा
  • ये है बुधवार को पटना से कोरोना से मौत के बाद शव के पहुंचने व दाहसंस्कार के पहले के सवाल
  • इंसानियत कहीं मर तो नहीं रही…? 
  • कोरोना संक्रमण से हुई मौत के बाद शव को दफ़नाने या दाह संस्कार करने के खिलाफ क्यों है समाज…?
  • अगर आपके अपने हों तो क्या होगा मगर यहां कई सवाल हैं जिसका जवाब मिलना मुश्किल है, सबको इंतजार है 

    दरभंगा, देशज टाइम्स ब्यूरो। कोरोना महामारी से आम लोगों की जान व काम धंधे को खतरा है। वहीं, इसके संक्रमण से लोगों की मानसिकता भी संक्रमित होती जा रही है। ये खौफ है या अज्ञानता…? विश्व स्वास्थ्य संगठन व शासन-प्रशासन की ओर से सूचना व संचार के विभिन्न माध्यमों से इस महामारी को लेकर बड़े स्तर पर जागरूकता चलाई जा रही है।मगर, हम सुरक्षा को लेकर दी जा रही गाइडलाइन का खुलकर मज़ाक उड़ा रहे है, बिना मास्क के घूम रहे हैं लेकिन पड़ोसी, सगे-संबंधियों की मौत पर संकुचित विचारधारा का परिचय देकर भाग रहे हैं, लोगों को गोलबंद कर स्थानीय कब्रिस्तान व शमशान में दफ़न या दाह संस्कार का विरोध कर रहे हैं।दरभंगा में कोरोना से मौत के बाद मरी हुई इंसानियत को रातभर जिंदा करते रहे नवीन-बदरुजम्मा
    जब आप अपने पड़ोसी, अपने मोहल्ले-गांव के मृतक को अपने मोहल्ले या गांव के कब्रिस्तान या शमशान में जगह नहीं देंगे तो दूसरे मोहल्ले-गांव वाले अपने कब्रिस्तान या शमशान में बाहरी को कैसे जगह देंगे। कहां लेकर जाएंगें परिवार जन अपनों के शव को…?ज़रा सोचिए, मृत्यु निश्चित है, हर किसी को प्राप्त होनी है। जो हमारा पड़ोसी या सगे संबंधी इस महामारी से गुज़र गए, उनके परिवार ने कभी ख्याल में भी न सोचा होगा तो नंबर किसी का भी आ सकता है, हां-किसी के पिता का, किसी के पुत्र का, किसी की पत्नी का…खुदा न करे, कहीं आपका कोई अपना गुज़र गया तब भी आप विरोध करेंगे।

    कोरोना संक्रमण से होती मौत के बाद शवों को दफ़नाने या दाह संस्कार को लेकर कमोवेश देश के लगभग सभी हिस्सों में यही स्थिति है। लोगों को जागरूक करने की ज़रूरत है, लोगों को WHO और स्वास्थ्य विभाग की गाइडलाइन को समझाने की ज़रूरत है। उन जन प्रतिनिधियों को भी पहले अपनी अज्ञानता दूर करनी चाहिए जो अपने क्षेत्र के लोगों को समझाने के बदले ऐसी मौत की खबर के बाद स्थानीय लोगों को उकसाने व गोलबंद होकर विरोध करवाने का काम करते हैं।

    आमजन से सहयोग के लिए स्थानीय प्रशासन को पूर्व प्रयास करना चाहिए। इसके लिए जिला से लेकर वार्ड स्तर पर सभी वरीय अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति व अध्यक्षता में वार्ड पार्षद, सभी राजनितिक पार्टी के वार्ड अध्यक्ष, धार्मिक स्थलों के प्रमुख के अलावे हिंदू मुस्लिम समुदाय से पांच-पांच सामाजिक कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों की बैठक होनी चाहिए।

दरभंगा में कोरोना से मौत के बाद मरी हुई इंसानियत को रातभर जिंदा करते रहे नवीन-बदरुजम्मा
इसमें एक घोषणा पत्र पर सामूहिक हस्ताक्षर कर के सुनिश्चित किया जाए,भविष्य में इस तरह की शवों के दफ़नाने या अंत्येष्टि में कोई विवाद या व्यवधान उत्पन्न नही होगा।

कल बुधवार को ही दरभंगा में जो हुआ वह अति निंदनीय व चिंतनीय है। बुधवार को कोरोना से पटना में दरभंगा के एक व्यक्ति की मौत के बाद एक शमशान में दाह संस्कार की व्यवस्था की गई। मगर, शाम सात बजे शव के आने की सूचना पर स्थानीय लोग एकत्रित होकर वहां अंत्येष्टि का विरोध करने लगे।

कई थानों की पुलिस व पदाधिकारी समझाने पहुंचे। शव जलाने से कोरोना का संक्रमण नही फैलता है। लेकिन, इस मुद्दे पर एकजुट स्थानीय लोग अपनी बातों पर अड़े रहे। आक्रोश में चिता के लिए सजी लकड़ियों तक को नदी में फेंंक डाला। अंततः टकराव से अलग हट लोगों को समझाने में असफल पुलिस ने किसी अन्य जगह अंत्येष्टि का मन बनाया। मृतक के परिवार व संबंधी के एक दर्जन लोगों को इसके लिए तैयार कर दूसरे शमशान के लिए मन बना लिया।

मृतक के वार्ड के पार्षद सह उपमहापौर बदरुजम्मा खान व शांति समिति के वरिष्ठ सदस्य नवीन सिन्हा को भी सहयोग के लिए प्रशासन ने आग्रह किया। इस प्रकरण में तब तक रात्रि के बारह बज चुके थे। मृतक के परिजन के साथ शव लेकर ये लोग दूसरे शमशान पहुंचे। गड्ढा खोदने के लिए दो लोग तैयार होकर इस कार्य को तो कर दिया, लेकिन एंबुलेंस से शव पहुंचते ही ये लोग भी चले गए। और तो और मृतक के परिजन में उसके परिवार के चार लोग छोड़ मात्र दो नजदीकी सदस्य ही शमशान तक पहुंचे, बाकी लोग रास्ते से ही छोड़ कर चल दिए। प्रशासन की ओर से पदाधिकारी व पुलिसकर्मी शमशान से थोड़ी दूरी पर तैनात रहे।

अंततः देर रात तीन बजे तक बदरुजम्मा खान व नवीन सिन्हा  ने मात्र दो लोगों की मदद से सड़क से तीन सौ मीटर दूर उबड़-खाबड़ रास्ते से लकड़ी व अंत्येष्टि में प्रयोग होने वाले अन्य सामान शमशान तक पहुंचाया। मृतक के परिजन किसी तरह पीपीई किट पहन शव को चिता तक पहुंचा कर अंत्येष्टि की।  सुबह तीन बजे सभी सुरक्षा मानक अपनाकर ये लोग घर लौटे।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ का कहना है, कोरोना से मृत शव के विशेष पैकिंग के बाद उसे खोले बिना अंत्येष्टि करना है ताकि संक्रमण नही फैले। शव जलने के बाद उसके राख से कोई हानि नही होती है। लेकिन इस सबसे अलग लोग भ्रांतियों में पड़कर इंसानियत को तार तार कर रहे हैं।
इसी तरह दो अन्य मुस्लिम समुदाय के कोरोना से मौत के उपरांत भी दो कब्रिस्तान में दफन के विरोध पर अन्य तीसरे कब्रिस्तान में काफी विवाद के बाद कुछ बुद्धिजीवियों के सहयोग से शव की मिट्टी (दफ़न) हो सकी थी।

दरभंगा में अभी तक कोरोना से मृत मुस्लिम व हिंदू दोनों समुदाय के शव निष्पादन में सहयोगी बन कार्य को अंजाम देने वाले समाजसेवी नवीन सिन्हा ने प्रशासन से इस दिशा में लोगों को जागरूक व पूरी जानकारी देने के साथ आगे शव अंत्येष्टि के नियम बनाने की भी मांग की है।

बुधवार को कोरोना से मृत हिंदू शव की अंत्येष्टि में सहयोग करने वाले शहर के उप-महापौर बदरुज़्ज़मां खान के कार्य को असल इंसानियत का कार्य बताते हुए अन्य लोगों से भी सुरक्षा मानक अपनाकर इस विपरीत परिस्थिति में मानवता को ज़िंदा रखने की अपील की है। जानकारी के अनुसार, नवीन सिन्हा  कबीर सेवा संस्थान के सदस्य भी हैं, जिसमें एक दर्जन सदस्य लगातार बारह महीने अपने खर्च पर लावारिस शव की अंत्येष्टि सश्रम करते आ रहे हैं।दरभंगा में कोरोना से मौत के बाद मरी हुई इंसानियत को रातभर जिंदा करते रहे नवीन-बदरुजम्मा

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SINGHWARA

सिंहवाड़ा की ज्योति दिखेगी सिल्वर स्क्रीन पर,अगस्त में रिलीज होगी ज्योति की फिल्म आत्मनिर्भर

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सिंहवाड़ा की ज्योति दिखेगी सिल्वर स्क्रीन पर,अगस्त में रिलीज होगी ज्योति की फिल्म आत्मनिर्भर

सिंहवाड़ा, देशज टाइम्स ब्यूरो। अब सिंहवाड़ा की बेटी फिल्मों में काम करेगी। जी हां, यह बेटी है ज्योति कुमारी। यह वही ज्योति है जो लॉकडाउन में अपने चोटिल पिता मोहन पासवान को हरियाणा के गुरुगाम से साइकिल पर बैठाकर 1200 किमी का सफर तय कर दरभंगा लायी थी। अब यही बेटी कहानी बनकर  सिल्वर स्क्रीन पर दिखेगी।

जानकारी के अनुसार, ज्योति की फिल्म का नाम है आत्मनिर्भर। वी मेक फिल्मंज’ कंपनी के प्रोडक्शन हाउस के तले बन रही इस फिल्म में नायिका का किरदार असल जीवन में नायिका रही ज्योति कुमारी ही निभाएगी। फिल्म अगस्त तक रिलीज हो जाएगी।

ज्योति पर फिल्म शाइन कृष्णा, मिराज, फिरोज व साजिद नांबियार ने मिलकर बना रहे हैं। निर्देशन कृष्णा करेंगे। फिल्म में ज्योति की कहानी में दर्शक देखेंगे आखिर कैसे व किस परिस्थिति में एक पंद्रह साल की किशोरी गर्मी की तपिश को झेलती लॉकडाउन के मौसम में इतनी लंबी दूरी अपने पिता के साथ जद्दोजहद में कैसे तय करती है। फिलहाल फिल्म को लेकर ज्योति के गांव सिरहुल्ली में भी खुशी का माहौल है वहीं सिंहवाड़ा समेत संपूर्ण मिथिलांचल को अपनी बेटी पर नाज है।

 

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