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दरभंगा के सिंहवाड़ा समेत कई प्रखंड टिड्डियों के निशाने पर, 10 फायर ब्रिगेड टीम की तैनाती

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दरभंगा के सिंहवाड़ा समेत कई प्रखंड टिड्डियों के निशाने पर, 10 फायर ब्रिगेड टीम की तैनाती
  • टिड्डियों का आतंक
    मुख्य बातें
    समस्तीपुर,मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी जिले के सीमा से लगने वाले प्रखंडों में टिड्डी के हमले की आशंका
  • टिड्डी को खत्म करने के लिए फायर ब्रिगेड टीम की तैनाती
  • टिड्डियों को भगाने के लिए ज्यादा शोर मचाने की सलाह
  • डीएम डॉ.त्यागराजन एसएम ने कहा,पश्चिमी चंपारण जिले के कुछ प्रखंडों से टिड्डी दलों के आने की सूचना 

दरभंगा, देशज टाइम्स ब्यूरो। डीएम डॉ. त्यागराजन एसएम ने टिड्डियों के संभावित हमले को देखते हुए इसको खत्म करने के लिए फायर व्रिगेड की टीम को तैनात रहने का निर्देश दिया है। कहा है, राज्य के पश्चिमी चंपारण जिले के कुछ प्रखंडों से टिड्डी दलों के आगमन की सूचना है। यह संभावना है, टिड्डीयो का यह दल समस्तीपुर /मुजफ्फरपुर/ सीतामढ़ी जिला के सीमा से सटे इस जिला के प्रखंडों में हमला कर सकता है।

इसमें दरभंगा जिला के सिंहवाड़ा, बहेड़ी, हायाघाट, हनुमाननगर, बिरौल, कुशेश्वरस्थान, कुशेश्वरस्थान पुर्वी, प्रखंड विशेष रूप से संवदेनशील बताया गया है। उन्होंने कहा है, टिडि्डयों के हमले से फसलों को बचाने के लिए सभी लोगो को पूर्ण सतर्क व जागरूक रहनी होगी। कहा कि टिड्डियो को पहचानना सरल है।

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उन्होंने कहा,टिड्डियों के आगमन हो जाने पर सभी को एक साथ शोर मचाना चाहिए. इसके लिए ड्रम, थाली , घंटी, ढोलक, टीना, आदि का इस्तेमाल उपयोगी ही सकता है। कहा, टिड्डियो का दल समूह में तेजी से उड़ता है। इसलिए टिड्डियो के आते ही सभी लोगो को जोर-जोर से शोर मचाना चाहिए। एक या दो लोगो के शोर मचाने से यह नहीं होगा. कहा कि ज्यादा संख्या में लोंगो के द्वारा शोर मचाने से टिड्डियो का दल हवा की दिशा में बाहर निकल जाएगा।

दरभंगा के सिंहवाड़ा समेत कई प्रखंड टिड्डियों के निशाने पर, 10 फायर ब्रिगेड टीम की तैनाती
जिला कृषि पदाधिकारी ने बताया, टिड्डियो के हमले से फसलो को बचाने हेतु कंटिंजेंट प्लान तैयार कर लिया गया है । कहा कि अगर टिड्डियो का झुंड कहीं बैठ जाता है तो कीटानुनाशक दवा का इसपर छिड़काव कर इसे खत्म कर दिया जाएगा। टिड्डियों को खत्म करने के लिए फायर विग्रेड की दस टीमों को तैयार किया गया है। जिला पदाधिकारी के निदेश पर फायर व्रिगेड की टीम को कीटनुनाशक दवा, पी.पी.ई. किट्स आदि उपलब्ध करा दिया गया है।

वहीं कृषि विज्ञान केन्द्र जाले के वैज्ञानिक डॉ. राजेन्द्र प्रसाद की ओर से टिड्डियो के पहचानने का तरीका बताया गया। कहा, मादा टिड्डी का आकार नर टिड्डी से बड़ा होता है। टिड्डियों का दल हमेशा ग्रुप/कलस्टर में उड़ता है। इनकी संख्या लाखों मे होती है। टिड्डी का अंडा चावल के दाने के आकार का होता है।अंडा से टिड्डी के निकलने में 35-40 दिन लगते हैं। कहा, टिड्डियो का रंग अलग अलग प्रकार का होता है।

टिड्डियो से बचने का सबसे कारगार तरीका यह है कि इसे कहीं बैठने न दें। एक साथ ज्यादा शोर होने पर ये उपर-उपर ही निकल जाते है।
जिलाधिकारी ने सभी प्रखंड विकास पदाधिकारी/बीएओ को जनप्रतिनिधियो के साथ आज ही बैठक करके उन्हे टिड्डियो के हमले से सुरक्षा हेतु जानकारी प्रदान करने का निदेश दिया है। कहा कि सतर्क एवं सजग रहकर बड़ी से बड़ी घटना को भी टाला जा सकता है ।उन्हें कहा गया है,  टिड्डियों के आने एवं कहीं बैठने की सूचना तुरंत दी जाए।

इस बैठक में डीएओ समीर कुमार, कृषि विज्ञानं केद्र जाले के डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, पीडी आत्मा शकील अख्तर अंसारी, फायर व्रिगेड के प्रभारी रमेश कुमार व अन्य अधिकारी/पुलिस अधिकारी शामिल थे।दरभंगा के सिंहवाड़ा समेत कई प्रखंड टिड्डियों के निशाने पर, 10 फायर ब्रिगेड टीम की तैनाती

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Bihar

दरभंगा में कोरोना से मौत के बाद मरी हुई इंसानियत को रातभर जिंदा करते रहे नवीन-बदरुजम्मा

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दरभंगा में कोरोना से मौत के बाद मरी हुई इंसानियत को रातभर जिंदा करते रहे नवीन-बदरुजम्मा
  • ये है बुधवार को पटना से कोरोना से मौत के बाद शव के पहुंचने दाहसंस्कार के पहले के सवाल
  • इंसानियत कहीं मर तो नहीं रही…? 
  • कोरोना संक्रमण से हुई मौत के बाद शव को दफ़नाने या दाह संस्कार करने के खिलाफ क्यों है समाज…?
  • अगर आपके अपने हों तो क्या होगा मगर यहां कई सवाल हैं जिसका जवाब मिलना मुश्किल है, सबको इंतजार है

    दरभंगा, देशज टाइम्स ब्यूरो। कोरोना महामारी से एक तरफ जहां आम लोगों की जान व काम धंधे को खतरा उत्पन्न हो गई है वहीं इसके संक्रमण से लोगों की मानसिकता भी संक्रमित होती जा रही है। ये खौफ है या अज्ञानता…? विश्व स्वास्थ्य संगठन व शासन-प्रशासन की ओर से सूचना व संचार के विभिन्न माध्यमों से इस महामारी को लेकर बड़े स्तर पर जागरूकता चलाई जा रही है।

    हम सुरक्षा को लेकर दी जा रही गाइडलाइन का खुलकर मज़ाक उड़ा रहे है, बिना मास्क के घूम रहे हैं लेकिन पड़ोसी, सगे-संबंधियों की मौत पर संकुचित विचारधारा का परिचय दे कर भाग रहे हैं और लोगों को गोलबंद कर स्थानीय कब्रिस्तान व शमशान में दफ़न अथवा दाह संस्कार का विरोध कर रहे हैं।

    दरभंगा में कोरोना से मौत के बाद मरी हुई इंसानियत को रातभर जिंदा करते रहे नवीन-बदरुजम्माजब आप अपने पड़ोसी, अपने मोहल्ले-गांव के मृतक को आने मोहल्ले या गांव के कब्रिस्तान या शमशान में जगह नहीं देंगे तो दूसरे मुहल्ले-गांव वाले अपने कब्रिस्तान या शमशान में बाहरी को कैसे जगह देगा। कहां लेकर मृतक के परिवारजन अपनों के शव को…?

    ज़रा सोचिए, मृत्यु निश्चित है, हर किसी को प्राप्त होना है। जो हमारा पड़ोसी या सगे संबंधी इस महामारी से गुज़र गए, उनके परिवार ने कभी ख्याल में भी न सोचा होगा तो नंबर किसी का भी आ सकता है, हां-किसी के पिता का, किसी के पुत्र का, किसी की पत्नी का…खुदा न करे, कहीं आपका कोई अपना गुज़र गया तब भी आप विरोध करेंगे।

    कोरोना संक्रमण से होती मौत के बाद शवों को दफ़नाने या दाह संस्कार को लेकर कमोवेश देश के लगभग सभी हिस्सों में यही स्थिति है।
    लोगों को जागरूक करने की ज़रूरत है, लोगों को WHO और स्वास्थ्य विभाग की गाइडलाइन को समझाने की ज़रूरत है। उन जन प्रतिनिधियों को भी पहले अपनी अज्ञानता दूर करनी चाहिए जो अपने क्षेत्र के लोगों को समझने के बदले ऐसी मौत की खबर के बाद स्थानीय लोगों को उकसाने और गोलबंद होकर विरोध करवाने का काम करते हैं।

    आमजन से सहयोग के लिए स्थानीय प्रशासन को पूर्व प्रयास करना चाहिए। इसके लिए जिला से लेकर वार्ड स्तर पर सभी वरीय अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति व अध्यक्षता में वार्ड पार्षद, सभी राजनितिक पार्टी के वार्ड अध्यक्ष, धार्मिक स्थलों के प्रमुख के अलावा हिंदू मुस्लिम समुदाय से पांच-पांच सामाजिक कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों की बैठक होनी चाहिए।

दरभंगा में कोरोना से मौत के बाद मरी हुई इंसानियत को रातभर जिंदा करते रहे नवीन-बदरुजम्माइसमें एक घोषणा पत्र पर सामूहिक हस्ताक्षर कर के सुनिश्चित किया जाए,कि भविष्य में इस तरह की शवों के दफ़नाने या अंत्येष्टि में कोई विवाद या व्यवधान उतपन्न नही होगा।

कल बुधवार को ही दरभंगा में जो हुआ वह अति निंदनीय व चिंतनीय है। बुधवार को कोरोना से पटना में दरभंगा के एक व्यक्ति की मौत के उपरांत एक शमसान में दाह संस्कार की व्यवस्था की गई। शाम 7 बजे शव के आने की सूचना पर स्थानीय लोग एकत्रित होकर वहां अंत्येष्टि का विरोध करने लगे।

कई थाना की पुलिस व पदाधिकारी समझाने पहुंचे। शव जलाने से कोरोना का संक्रमण नही फैलता है। लेकिन, इस मुद्दे पर एकजुट स्थानीय लोग अपनी बातों पर अड़े रहे। आक्रोश में चिता के लिए सजी लकड़ियों तक को नदी में फेंंक डाला। अंततः टकराव से अलग हट लोगों को समझाने में असफल रही पुलिस ने किसी अन्य जगह अंत्येष्टि का मन बनाया। मृतक के परिवार और संबंधी के एक दर्जन लोगों को इसके लिए तैयार कर दूसरे शमसान के लिए मन बना लिया।

मृतक के वार्ड के पार्षद सह उपमहापौर बदरुजम्मा खान व शांति समिति के वरिष्ठ सदस्य नवीन सिन्हा को भी सहयोग के लिए प्रशासन ने आग्रह किया। इस प्रकरण में तब तक रात्रि के 12 बज चुके थे। मृतक के परिजन के साथ शव लेकर ये लोग दूसरे शमशान पहुंचे। गड्ढा खोदने के लिए दो लोग तैयार होकर इस कार्य को तो कर दिया, लेकिन एम्बुलेंस से शव पहुंचते ही ये लोग भी चले गए। और तो और मृतक के परिजन में उसके परिवार के चार लोग छोड़ मात्र दो नजदीकी सदस्य ही शमशान तक पहुंचे, बाकी लोग रास्ते से ही छोड़ कर चल दिए। प्रसाशन की ओर से पदाधिकारी व पुलिसकर्मी शमशान से थोड़ी दूरी पर तैनात रहे।

अंततः देर रात तीन बजे तक बदरुजम्मा खान व नवीन सिन्हा  ने मात्र दो लोगों की मदद से सड़क से तीन सौ मीटर दूर उबर खाबड़ रास्ता से लकड़ी व अंत्येष्टि में प्रयोग होने वाले अन्य सामान शमशान तक पहुंचाया। मृतक के परिजन किसी तरह पीपीई किट पहन शव को चिता तक पहुंचा कर अंत्येष्टि की।  सुबह तीन बजे सभी सुरक्षा मानक अपनाकर ये लोग घर लौटे।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ का कहना है, कोरोना से मृत शव के विशेष पैकिंग के बाद उसे खोले बिना अंत्येष्टि करना है ताकि संक्रमण नही फैले। शव जलने के बाद उसके राख से कोई हानि नही होती है। लेकिन इस सबसे अलग लोग भ्रांतियों में पड़ कर इंसानियत को तार तार कर रहे हैं।
इसी तरह दो अन्य मुस्लिम समुदाय के कोरोना से मौत के उपरांत भी दो कब्रिस्तान में दफन के विरोध पर अन्य तीसरे कब्रिस्तान में काफी विवाद के बाद कुछ बुद्धिजीवियों के सहयोग से शव की मिट्टी(दफ़न) हो सकी थी।

दरभंगा में अभी तक कोरोना से मृत मुस्लिम व हिंदू दोनों समुदाय के शव निष्पादन में सहयोगी बन कार्य को अंजाम देने वाले समाजसेवी नवीन सिन्हा ने प्रशासन से इस दिशा में लोगों को जागरूक व पूरी जानकारी देने के साथ आगे शव अंत्येष्टि के नियम बनाने की भी मांग की है।

बुधवार को कोरोना से मृत हिंदू शव की अंत्येष्टि में सहयोग करने वाले शहर के उप-महापौर बदरुज़्ज़मां खान के कार्य को असल इंसानियत का कार्य बताते हुए अन्य लोगों से भी सुरक्षा मानक अपनाकर इस विपरीत परिस्थिति में मानवता को ज़िंदा रखने की अपील की है। जानकारी के अनुसार, नवीन सिन्हा  कबीर सेवा संस्थान के सदस्य भी हैं, जिसमें एक दर्जन सदस्य लगातार बारह महीने अपने खर्च पर लावारिस शव की अंत्येष्टि सश्रम करते आ रहे हैं।दरभंगा में कोरोना से मौत के बाद मरी हुई इंसानियत को रातभर जिंदा करते रहे नवीन-बदरुजम्मा

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सिंहवाड़ा की ज्योति दिखेगी सिल्वर स्क्रीन पर,अगस्त में रिलीज होगी ज्योति की फिल्म आत्मनिर्भर

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सिंहवाड़ा की ज्योति दिखेगी सिल्वर स्क्रीन पर,अगस्त में रिलीज होगी ज्योति की फिल्म आत्मनिर्भर

सिंहवाड़ा, देशज टाइम्स ब्यूरो। अब सिंहवाड़ा की बेटी फिल्मों में काम करेगी। जी हां, यह बेटी है ज्योति कुमारी। यह वही ज्योति है जो लॉकडाउन में अपने चोटिल पिता मोहन पासवान को हरियाणा के गुरुगाम से साइकिल पर बैठाकर 1200 किमी का सफर तय कर दरभंगा लायी थी। अब यही बेटी कहानी बनकर  सिल्वर स्क्रीन पर दिखेगी।

जानकारी के अनुसार, ज्योति की फिल्म का नाम है आत्मनिर्भर। वी मेक फिल्मंज’ कंपनी के प्रोडक्शन हाउस के तले बन रही इस फिल्म में नायिका का किरदार असल जीवन में नायिका रही ज्योति कुमारी ही निभाएगी। फिल्म अगस्त तक रिलीज हो जाएगी।

ज्योति पर फिल्म शाइन कृष्णा, मिराज, फिरोज व साजिद नांबियार ने मिलकर बना रहे हैं। निर्देशन कृष्णा करेंगे। फिल्म में ज्योति की कहानी में दर्शक देखेंगे आखिर कैसे व किस परिस्थिति में एक पंद्रह साल की किशोरी गर्मी की तपिश को झेलती लॉकडाउन के मौसम में इतनी लंबी दूरी अपने पिता के साथ जद्दोजहद में कैसे तय करती है। फिलहाल फिल्म को लेकर ज्योति के गांव सिरहुल्ली में भी खुशी का माहौल है वहीं सिंहवाड़ा समेत संपूर्ण मिथिलांचल को अपनी बेटी पर नाज है।

 

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दरभंगा के डीपीआरओ सुशील कुमार शर्मा को मिली सम्मान के साथ सेवानिवृत्ति पर विदाई

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दरभंगा के डीपीआरओ सुशील कुमार शर्मा को मिली सम्मान के साथ सेवानिवृत्ति पर विदाई

दरभंगा, देशज टाइम्स ब्यूरो। डीएम डॉ. त्यागराजन एसएम ने जिला जन संपर्क पदाधिकारी-सह-उप जन संपर्क निदेशक, दरभंगा प्रमंडल सुशील कुमार शर्मा को सेवानिवृत्ति पर समाहरणालय अवस्थित अंबेडकर सभागार में पदाधिकारियों, कर्मियों व मीडिया प्रतिनिधियों की उपस्थिति में भावभीनी विदाई दी।

डीएम डॉ. एसएम  ने सुशील कुमार शर्मा को कार्य कुशलता, शालीनता, कार्य के प्रति समर्पित, दायित्वों का सही से निर्वह्न समेत अन्य गुणों की प्रशंसा करते हुए उन्हें गुलदस्ता, माल्यार्पण व उपहार प्रदान कर विदाई दी।

डीडीसी डॉ. कारी प्रसाद महतो ने भी उनकी कार्यशैली व सादगी की प्रशंसा करते हुए उनके स्वास्थ्य व उज्जवल भविष्य की शुभकानाएं दी। भूमि सुधार उप समाहर्त्ता पुष्पेश कुमार, जिला भू-अर्जन पदाधिकारी अजय कुमार, पंचायती राज पदाधिकारी शरद झा, निदेशक, डीआरडीए अभिषेक रंजन व प्रभारी जिला जन सम्पर्क पदाधिकारी राहुल कुमार समेत उपस्थित सभी मीडिया प्रतिनिधियों ने भी सुशील कुमार शर्मा की प्रशंसा करते उन्हें  माल्यार्पण देकर विदाई दी।

वहीं, देशज टाइम्स भी ऐसे डीपीआरओ के सेवानिवृत्ति पर उनके स्वस्थ व दीर्घायु जीवन की कामना करते उनके दरभंगा से सेवानिवृत्ति को ताउम्र सहेजकर रखने जैसा बताया। देशज टाइम्स की पूरी टीम अपने चहेते पदाधिकारी की सेवानिवृत्ति पर उनका पुष्पों से श्रद्धापूर्ण विदाई देता है। दरभंगा के डीपीआरओ सुशील कुमार शर्मा को मिली सम्मान के साथ सेवानिवृत्ति पर विदाई

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