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दरभंगा के 3 और कोरोना पॉजिटिव की मौत, इधर लाश के लिए लगा है नंबर

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दरभंगा के 3 और कोरोना पॉजिटिव की मौत, इधर लाश के लिए लगा है नंबर

पटना/दरभंगा, देशज न्यूज। बिहार में कोरोना के 138 नए मामले सामने आए हैं। इसके साथ ही राज्य में कोरोना संक्रमितों का आंकड़ा बढ़कर 7178 हो गया है। शुक्रवार को स्वास्थ्य विभाग ने इसकी पुष्टि की है।

स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक सूबे में अब तक कुल 45  लोगों की कोरोना वायरस मौत हो चुकी है। गुरुवार को भी कोरोना के दो मरीजों ने इलाज के दौरान पटना के एनएमसीएच में दम तोड़ दिया था। शुक्रवार को पटना के एनएमसीएच में पश्चिम चंपारण के नौतन के एक व्यक्ति  की मौत हो गई।

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इस शख्स को 17 जून को सांस में तकलीफ होने के बाद एनएमसीएच में भर्ती कराया गया था, जहां आज उसकी मौत हो गई। बेगूसराय, दरभंगा, खगड़िया, सारण और वैशाली में तीन-तीन लोगों की मौत हुई है।

इसके अलावा भोजपुर, जहानाबाद, मुजफ्फरपुर, नालंदा, पटना, पश्चिमी चंपारण, सीतामढ़ी और सीवान में दो-दो मरीजों की जान कोरोना से गई है। अररिया, औरंगाबाद, भागलपुर, गया, जमुई, कटिहार, मधेपुरा, मधुबनी, मुंगेर, नवादा, पूर्वी चंपारण, रोहतास, समस्तीपुर, शिवहर में एक-एक मरीज की मौत हो चुकी है।

इधर, दरभंगा में लाश के लिए नंबर लगा हुआ है। दरभंगा शहर की एक महिला की मौत गुरुवार की सुबह 5 बजे हुई। 24 घंटे में दरभंगा के तीन सहित 6 लोगो की पटना में कोरोना से मौत हो गयी। शव पहुंचाने के लिए दो गाड़ी है। इस महिला की मौत से पूर्व दरभंगा के दो लोगों की मौत बुधवार को हो गयी थी, जिनका शव गुरुवार की शाम और रात में पहुंचा।

दरभंगा के अधिकारी और जनप्रतिनिधि के लगातार फोन के बाद भी अभी सुबह तक इस मृतक के शव ढोने का नंबर नही आया है। उसके चार परिजन लाश के नंबर के इंतज़ार में 28 घंटे से पटना में हैं। निर्णय ये भी लिया कि पटना में ही अंत्येष्टि कर दें। लेकिन पटना के लोगों के विरोध के कारण अब बाहर के जिला के कोरोना संक्रमित शव का दाह संस्कार और मिट्टी नही करने देने के कारण सरकार शव को संबंधित ज़िला में भेज रही है।

बेनीपुर के मृतक का शव शाम में गांव पहुंचा तो विरोध और पंचायत के बाद रात 10 बजे निजी जमीन पर अंत्येष्टि हुई।
शहर के वार्ड 39 के शव की मिट्टी भी निजी कब्रिस्तान में हुई। यहां के आधा दर्जन साहसी लोगों ने शव को सुरक्षा सहित दफन किया। आज इन सभी के साथ संपर्क के लोगों कोरोना की जांच की जाएगी।

फिलहाल हमलोग मजबूर बन इंतज़ार कर रहे शव का। आज 28 घंटे बाद पटना में एक साहब ने मृतक के परिजन से कहा है कि पटना में और मौत हो गयी है, उस शव को स्थानीय होने के नाते प्राथमिकता दी जाएगी ।आप अपने नेता या दरभंगा के अधिकारी से कहें कि वहां से एम्बुलेंस भेजें तब लाश जाएगी।

इसके उपरांत 10 बजे दिन में दरभंगा से एम्बुलेंस भेजा गया और 3 बजे दिन में मृतक के परिजन ने कोरोना से मौत हुई शव को ढोने के लिए बनाये गए इस विशेष एम्बुलेंस में शव रख दरभंगा के लिए विदा हुआ।

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Bihar

दरभंगा में कोरोना से मौत के बाद मरी हुई इंसानियत को रातभर जिंदा करते रहे नवीन-बदरुजम्मा

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दरभंगा में कोरोना से मौत के बाद मरी हुई इंसानियत को रातभर जिंदा करते रहे नवीन-बदरुजम्मा
  • ये है बुधवार को पटना से कोरोना से मौत के बाद शव के पहुंचने व दाहसंस्कार के पहले के सवाल
  • इंसानियत कहीं मर तो नहीं रही…? 
  • कोरोना संक्रमण से हुई मौत के बाद शव को दफ़नाने या दाह संस्कार करने के खिलाफ क्यों है समाज…?
  • अगर आपके अपने हों तो क्या होगा मगर यहां कई सवाल हैं जिसका जवाब मिलना मुश्किल है, सबको इंतजार है 

    दरभंगा, देशज टाइम्स ब्यूरो। कोरोना महामारी से आम लोगों की जान व काम धंधे को खतरा है। वहीं, इसके संक्रमण से लोगों की मानसिकता भी संक्रमित होती जा रही है। ये खौफ है या अज्ञानता…? विश्व स्वास्थ्य संगठन व शासन-प्रशासन की ओर से सूचना व संचार के विभिन्न माध्यमों से इस महामारी को लेकर बड़े स्तर पर जागरूकता चलाई जा रही है।मगर, हम सुरक्षा को लेकर दी जा रही गाइडलाइन का खुलकर मज़ाक उड़ा रहे है, बिना मास्क के घूम रहे हैं लेकिन पड़ोसी, सगे-संबंधियों की मौत पर संकुचित विचारधारा का परिचय देकर भाग रहे हैं, लोगों को गोलबंद कर स्थानीय कब्रिस्तान व शमशान में दफ़न या दाह संस्कार का विरोध कर रहे हैं।दरभंगा में कोरोना से मौत के बाद मरी हुई इंसानियत को रातभर जिंदा करते रहे नवीन-बदरुजम्मा
    जब आप अपने पड़ोसी, अपने मोहल्ले-गांव के मृतक को अपने मोहल्ले या गांव के कब्रिस्तान या शमशान में जगह नहीं देंगे तो दूसरे मोहल्ले-गांव वाले अपने कब्रिस्तान या शमशान में बाहरी को कैसे जगह देंगे। कहां लेकर जाएंगें परिवार जन अपनों के शव को…?ज़रा सोचिए, मृत्यु निश्चित है, हर किसी को प्राप्त होनी है। जो हमारा पड़ोसी या सगे संबंधी इस महामारी से गुज़र गए, उनके परिवार ने कभी ख्याल में भी न सोचा होगा तो नंबर किसी का भी आ सकता है, हां-किसी के पिता का, किसी के पुत्र का, किसी की पत्नी का…खुदा न करे, कहीं आपका कोई अपना गुज़र गया तब भी आप विरोध करेंगे।

    कोरोना संक्रमण से होती मौत के बाद शवों को दफ़नाने या दाह संस्कार को लेकर कमोवेश देश के लगभग सभी हिस्सों में यही स्थिति है। लोगों को जागरूक करने की ज़रूरत है, लोगों को WHO और स्वास्थ्य विभाग की गाइडलाइन को समझाने की ज़रूरत है। उन जन प्रतिनिधियों को भी पहले अपनी अज्ञानता दूर करनी चाहिए जो अपने क्षेत्र के लोगों को समझाने के बदले ऐसी मौत की खबर के बाद स्थानीय लोगों को उकसाने व गोलबंद होकर विरोध करवाने का काम करते हैं।

    आमजन से सहयोग के लिए स्थानीय प्रशासन को पूर्व प्रयास करना चाहिए। इसके लिए जिला से लेकर वार्ड स्तर पर सभी वरीय अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति व अध्यक्षता में वार्ड पार्षद, सभी राजनितिक पार्टी के वार्ड अध्यक्ष, धार्मिक स्थलों के प्रमुख के अलावे हिंदू मुस्लिम समुदाय से पांच-पांच सामाजिक कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों की बैठक होनी चाहिए।

दरभंगा में कोरोना से मौत के बाद मरी हुई इंसानियत को रातभर जिंदा करते रहे नवीन-बदरुजम्मा
इसमें एक घोषणा पत्र पर सामूहिक हस्ताक्षर कर के सुनिश्चित किया जाए,भविष्य में इस तरह की शवों के दफ़नाने या अंत्येष्टि में कोई विवाद या व्यवधान उत्पन्न नही होगा।

कल बुधवार को ही दरभंगा में जो हुआ वह अति निंदनीय व चिंतनीय है। बुधवार को कोरोना से पटना में दरभंगा के एक व्यक्ति की मौत के बाद एक शमशान में दाह संस्कार की व्यवस्था की गई। मगर, शाम सात बजे शव के आने की सूचना पर स्थानीय लोग एकत्रित होकर वहां अंत्येष्टि का विरोध करने लगे।

कई थानों की पुलिस व पदाधिकारी समझाने पहुंचे। शव जलाने से कोरोना का संक्रमण नही फैलता है। लेकिन, इस मुद्दे पर एकजुट स्थानीय लोग अपनी बातों पर अड़े रहे। आक्रोश में चिता के लिए सजी लकड़ियों तक को नदी में फेंंक डाला। अंततः टकराव से अलग हट लोगों को समझाने में असफल पुलिस ने किसी अन्य जगह अंत्येष्टि का मन बनाया। मृतक के परिवार व संबंधी के एक दर्जन लोगों को इसके लिए तैयार कर दूसरे शमशान के लिए मन बना लिया।

मृतक के वार्ड के पार्षद सह उपमहापौर बदरुजम्मा खान व शांति समिति के वरिष्ठ सदस्य नवीन सिन्हा को भी सहयोग के लिए प्रशासन ने आग्रह किया। इस प्रकरण में तब तक रात्रि के बारह बज चुके थे। मृतक के परिजन के साथ शव लेकर ये लोग दूसरे शमशान पहुंचे। गड्ढा खोदने के लिए दो लोग तैयार होकर इस कार्य को तो कर दिया, लेकिन एंबुलेंस से शव पहुंचते ही ये लोग भी चले गए। और तो और मृतक के परिजन में उसके परिवार के चार लोग छोड़ मात्र दो नजदीकी सदस्य ही शमशान तक पहुंचे, बाकी लोग रास्ते से ही छोड़ कर चल दिए। प्रशासन की ओर से पदाधिकारी व पुलिसकर्मी शमशान से थोड़ी दूरी पर तैनात रहे।

अंततः देर रात तीन बजे तक बदरुजम्मा खान व नवीन सिन्हा  ने मात्र दो लोगों की मदद से सड़क से तीन सौ मीटर दूर उबड़-खाबड़ रास्ते से लकड़ी व अंत्येष्टि में प्रयोग होने वाले अन्य सामान शमशान तक पहुंचाया। मृतक के परिजन किसी तरह पीपीई किट पहन शव को चिता तक पहुंचा कर अंत्येष्टि की।  सुबह तीन बजे सभी सुरक्षा मानक अपनाकर ये लोग घर लौटे।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ का कहना है, कोरोना से मृत शव के विशेष पैकिंग के बाद उसे खोले बिना अंत्येष्टि करना है ताकि संक्रमण नही फैले। शव जलने के बाद उसके राख से कोई हानि नही होती है। लेकिन इस सबसे अलग लोग भ्रांतियों में पड़कर इंसानियत को तार तार कर रहे हैं।
इसी तरह दो अन्य मुस्लिम समुदाय के कोरोना से मौत के उपरांत भी दो कब्रिस्तान में दफन के विरोध पर अन्य तीसरे कब्रिस्तान में काफी विवाद के बाद कुछ बुद्धिजीवियों के सहयोग से शव की मिट्टी (दफ़न) हो सकी थी।

दरभंगा में अभी तक कोरोना से मृत मुस्लिम व हिंदू दोनों समुदाय के शव निष्पादन में सहयोगी बन कार्य को अंजाम देने वाले समाजसेवी नवीन सिन्हा ने प्रशासन से इस दिशा में लोगों को जागरूक व पूरी जानकारी देने के साथ आगे शव अंत्येष्टि के नियम बनाने की भी मांग की है।

बुधवार को कोरोना से मृत हिंदू शव की अंत्येष्टि में सहयोग करने वाले शहर के उप-महापौर बदरुज़्ज़मां खान के कार्य को असल इंसानियत का कार्य बताते हुए अन्य लोगों से भी सुरक्षा मानक अपनाकर इस विपरीत परिस्थिति में मानवता को ज़िंदा रखने की अपील की है। जानकारी के अनुसार, नवीन सिन्हा  कबीर सेवा संस्थान के सदस्य भी हैं, जिसमें एक दर्जन सदस्य लगातार बारह महीने अपने खर्च पर लावारिस शव की अंत्येष्टि सश्रम करते आ रहे हैं।दरभंगा में कोरोना से मौत के बाद मरी हुई इंसानियत को रातभर जिंदा करते रहे नवीन-बदरुजम्मा

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सिंहवाड़ा की ज्योति दिखेगी सिल्वर स्क्रीन पर,अगस्त में रिलीज होगी ज्योति की फिल्म आत्मनिर्भर

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सिंहवाड़ा की ज्योति दिखेगी सिल्वर स्क्रीन पर,अगस्त में रिलीज होगी ज्योति की फिल्म आत्मनिर्भर

सिंहवाड़ा, देशज टाइम्स ब्यूरो। अब सिंहवाड़ा की बेटी फिल्मों में काम करेगी। जी हां, यह बेटी है ज्योति कुमारी। यह वही ज्योति है जो लॉकडाउन में अपने चोटिल पिता मोहन पासवान को हरियाणा के गुरुगाम से साइकिल पर बैठाकर 1200 किमी का सफर तय कर दरभंगा लायी थी। अब यही बेटी कहानी बनकर  सिल्वर स्क्रीन पर दिखेगी।

जानकारी के अनुसार, ज्योति की फिल्म का नाम है आत्मनिर्भर। वी मेक फिल्मंज’ कंपनी के प्रोडक्शन हाउस के तले बन रही इस फिल्म में नायिका का किरदार असल जीवन में नायिका रही ज्योति कुमारी ही निभाएगी। फिल्म अगस्त तक रिलीज हो जाएगी।

ज्योति पर फिल्म शाइन कृष्णा, मिराज, फिरोज व साजिद नांबियार ने मिलकर बना रहे हैं। निर्देशन कृष्णा करेंगे। फिल्म में ज्योति की कहानी में दर्शक देखेंगे आखिर कैसे व किस परिस्थिति में एक पंद्रह साल की किशोरी गर्मी की तपिश को झेलती लॉकडाउन के मौसम में इतनी लंबी दूरी अपने पिता के साथ जद्दोजहद में कैसे तय करती है। फिलहाल फिल्म को लेकर ज्योति के गांव सिरहुल्ली में भी खुशी का माहौल है वहीं सिंहवाड़ा समेत संपूर्ण मिथिलांचल को अपनी बेटी पर नाज है।

 

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Darbhanga

दरभंगा के डीपीआरओ सुशील कुमार शर्मा को मिली सम्मान के साथ सेवानिवृत्ति पर विदाई

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दरभंगा के डीपीआरओ सुशील कुमार शर्मा को मिली सम्मान के साथ सेवानिवृत्ति पर विदाई

दरभंगा, देशज टाइम्स ब्यूरो। डीएम डॉ. त्यागराजन एसएम ने जिला जन संपर्क पदाधिकारी-सह-उप जन संपर्क निदेशक, दरभंगा प्रमंडल सुशील कुमार शर्मा को सेवानिवृत्ति पर समाहरणालय अवस्थित अंबेडकर सभागार में पदाधिकारियों, कर्मियों व मीडिया प्रतिनिधियों की उपस्थिति में भावभीनी विदाई दी।

डीएम डॉ. एसएम  ने सुशील कुमार शर्मा को कार्य कुशलता, शालीनता, कार्य के प्रति समर्पित, दायित्वों का सही से निर्वह्न समेत अन्य गुणों की प्रशंसा करते हुए उन्हें गुलदस्ता, माल्यार्पण व उपहार प्रदान कर विदाई दी।

डीडीसी डॉ. कारी प्रसाद महतो ने भी उनकी कार्यशैली व सादगी की प्रशंसा करते हुए उनके स्वास्थ्य व उज्जवल भविष्य की शुभकानाएं दी। भूमि सुधार उप समाहर्त्ता पुष्पेश कुमार, जिला भू-अर्जन पदाधिकारी अजय कुमार, पंचायती राज पदाधिकारी शरद झा, निदेशक, डीआरडीए अभिषेक रंजन व प्रभारी जिला जन सम्पर्क पदाधिकारी राहुल कुमार समेत उपस्थित सभी मीडिया प्रतिनिधियों ने भी सुशील कुमार शर्मा की प्रशंसा करते उन्हें  माल्यार्पण देकर विदाई दी।

वहीं, देशज टाइम्स भी ऐसे डीपीआरओ के सेवानिवृत्ति पर उनके स्वस्थ व दीर्घायु जीवन की कामना करते उनके दरभंगा से सेवानिवृत्ति को ताउम्र सहेजकर रखने जैसा बताया। देशज टाइम्स की पूरी टीम अपने चहेते पदाधिकारी की सेवानिवृत्ति पर उनका पुष्पों से श्रद्धापूर्ण विदाई देता है। दरभंगा के डीपीआरओ सुशील कुमार शर्मा को मिली सम्मान के साथ सेवानिवृत्ति पर विदाई

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