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बिहार में जैव विविधता की विरासत को विकसित किए जाने की अपार संभावना : डॉ. एनके अग्रवाल

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बिहार में जैव विविधता की विरासत को विकसित किए जाने की अपार संभावना : डॉ. एनके अग्रवाल

दरभंगा,देशज टाइम्स ब्यूरो। प्रत्येक वर्ष 22 मई को अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस या विश्व जैव विविधता संरक्षण दिवस अंतरराष्ट्रीय पर्व के रूप में मनाया जाता है। इसे संयुक्त राष्ट्र संघ ने प्रारंभ किया था। जैव विविधता दिवस को प्राकृतिक व पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में जैव विविधता का महत्व देखते हुए ही अंतरराष्ट्रीय दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया है।

डॉ.अग्रवाल ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 20 दिसंबर 2000 को प्रस्ताव पारित कर प्रत्येक वर्ष 22 मई को अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस के रूप में मनाने का संकल्प लिया। इसका मुख्य उद्देश 22 मई, 1992 को पारित किए गए नैरोबी एक्ट का पालन करना व लोगों को जागरूक करना है।

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बिहार में जैव विविधता की विरासत को विकसित किए जाने की अपार संभावना : डॉ. एनके अग्रवाल

बिहार में जैव विविधता की विरासत को विकसित किए जाने की अपार संभावना : डॉ. एनके अग्रवाल

इस दिवस का उद्देश्य ऐसे पर्यावरण का निर्माण करना है जो जैव विविधता में समृद्ध, टिकाऊ व आर्थिक गतिविधियों के लिए अवसर प्रदान कर सके। इसमें विशेष तौर पर वनों की सुरक्षा, संस्कृति, जीवन के कला शिल्प, संगीत, वस्त्र , भोजन, औषधीय पौधों का महत्व को प्रदर्शित करके जैव विविधता के महत्व और उसके न होने पर होनेवाले खतरों के बारे में जागरूक करना है।

डॉ.अग्रवाल ने कहा कि जैव विविधता सभी जीवों एवं पारिस्थिति तंत्रो की विभिन्नता और असमानता को कहा जाता है। संयुक्त राष्ट्र ने भी विशेष रूप से कहा है कि साल 2030 के सतत विकास एजेंडा के लिये जैव विविधता आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि वैश्विक नेताओ ने भविष्य की पीढ़ियों  के लिए एक जीवित नक्षत्र सुनिश्चित करते हुए वर्तमान जरूरतों को पूरा करने के लिये सतत विकास की एक व्यापक रणनीति पर सहमति व्यक्त की थी। इसपर 193 सरकारों की ओर से हस्ताक्षर किए गए थे।

डॉ.अग्रवाल ने कहा कि  बिहार में जैव विविधता की विरासत को विकसित किए जाने की अपार संभावनाएं हैं। इस विरासत को विकसित कर विश्व के पटल पर इसका अपना महत्व दिखाया जा सकता है। राजगीर का इलाका, मिथिलांचल का इलाका, मगध का इलाका आदि के समृद्ध विरासत को विकसित कर रोजगार की भी आपार संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। विभिन्न प्रकार के जीव जंतु और पेड़ पौधों का अस्तित्व धरती पर बनाये रखना है।

महाराजा लक्ष्मेश्वर सिंह संग्रहालय के अध्यक्ष डॉ. शिव कुमार मिश्र ने कहा कि भारत सरकार के प्राकृतिक धरोहर संरक्षण के लिए अनुसंधान करने वाली संस्था फारेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट, देहरादून से आग्रह किया था कि दरभंगा के कामेश्वर नगर परिसर स्थित दुर्लभ पेड़ पौधों को संरक्षण करने व इस प्रजाति को विकसित करने के लिए आवश्यक प्रयास किया जाए। परिणाम शून्य है।

स्थानीय विश्वविद्यालय के तत्कालीन कुलपति  से भी पत्र द्वारा आग्रह किया गया था कि इसे बचाने तथा सूचीबद्ध करने के लिए वनस्पति विज्ञान विभाग के अध्यक्ष के नेतृत्व में एक समिति गठित किया जाए।

डॉ. शिव कुमार कहते हैं कि इन्टैक, दरभंगा चैप्टर की ओर से दरभंगा व मधुबनी जिले के प्राकृतिक धरोहर को सूचीबद्ध करने का काम किया गया है। दरभंगा के लिए डॉ. सुशांत कुमार व मधुबनी के लिए सुनील कुमार मिश्र व उनकी टीम को धन्यवाद देते हैं जिनके कठिन परिश्रम के पश्चात् यह काम पूरा हो सका है। अब संरक्षण के लिए आमलोगों में जागरूकता पैदा करने का प्रयास किया जाना परमावश्यक है।

इंटेक के आजीवन सदस्य और इस क्षेत्र में काम कर रहे चंद्रप्रकाश कहते हैं कि हम जैव विविधता तथा पर्यावरण के बिगड़ते हालात को कोई विशेष योजना या अभियान चलाकर नहीं सुधार सकते। वर्तमान परिस्थितियों में यह साबित भी हो चुका है कि जैसे ही हमने पर्यावरण को प्रदूषित करना बंद किया, प्रकृति ने बड़ी तत्परता से अपने-आप को स्वच्छ कर लिया।

इससे हमें सीख लेनी चाहिए कि हमें प्रकृति के प्रति अपनी ज़िम्मेदारी और संवेदना को अपने जीवन में उतारना होगा और इसके लिए कुछ नया करने की ज़रुरत नहीं, बल्कि अपने देश की संस्कृति और परम्पराओं को ही पुन: आत्मसात करना होगा।

कहा कि इसे हम कृत्रिम दुनिया के चकाचोंध में भूलते जा रहे हैं। इस देश की वो संस्कृति ,जिसमें हमें प्रकृति का सम्मान करना सिखाया गया है । इस देश के वो रीति-रिवाज और तीज़-त्योहार, जिसमें पहाड़ों, नदियों और वृक्षों आदि की पूजा की जाती है । संयोगवश आज वट-सावित्री की पूजा भी है, जिसमें महिलाएँ अपने पति की दीर्घायु के लिए वट वृक्ष की पूजा करती हैं।

इसी तरह के कितने ही तीज़-त्योहार, रीति-रिवाज और विवाह-संस्कार हैं जिसमें पेड़-पौधों से लेकर जीव-जंतुओं तक की पूजा की जाती है । इन परम्पराओं ने हमें प्रकृति के साथ बांध करके रखा था। ताकि हम प्रकृति के महत्व को समझ सके और इसके प्रति संवेदना बनी रहे और इसका सम्मान करते रहें । लेकिन अब ये छोटे शहरों और गाँवों तक ही सीमित है।

बड़े शहरों के लोग इसे आडंबर कहते हैं और हमें पिछड़ा हुआ मानते हैं ।जो भी हो एक बात तो शाश्वत सत्य है कि हमें अपने विकास की राह पर प्रकृति के साथ सामंजस्य बना कर ही चलना होगा वरना इसके परे जो भी रास्ता है वो विनाश की ओर ही ले जाएगा । ये याद दिलाने की ज़रुरत नहीं कि हम इंसान भी प्रकृति की जैव विविधता का ही एक अंग हैं ।

धरोहर प्रेमी सुशांत कुमार का कहना है कि आमलोगों में जागरूकता फैलाकर ही इस अभियान की सफलता सुनिश्चित की जा सकती है ।
कार्यक्रम कॅरोना वाइरस को ध्यान में रखते हुए सोशल डिस्टनसिंग का पालन करते हुए डिजिटली मनाया गया। कार्यक्रम में काफी लोगों ने भाग लिया।

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अंग्रेजी के विद्वान, प्रखर वक्ता प्रो.अरुण कुमार झा का यूं अचानक जाना संपूर्ण मिथिला की क्षति

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अंग्रेजी के विद्वान, प्रखर वक्ता प्रो.अरुण कुमार झा का यूं अचानक जाना संपूर्ण मिथिला की क्षति
अंग्रेजी के विद्वान, प्रखर वक्ता प्रो.अरुण कुमार झा का यूं अचानक जाना संपूर्ण मिथिला की क्षति

मुख्य बातें
सीएम कॉलेज के प्रधानाचार्य की अध्यक्षता में शोकसभा आयोजित, प्रो. अरुण कुमार झा प्रखर वक्ता व मूर्धन्य विद्वान के रूप में सदा याद किए जाएंगे : प्रो. विश्वनाथ, मानवीय गुणों से युक्त अरुण कुमार arun kumar jha आदर्श और मिलनसार शिक्षक रहे : प्रो इंदिरा, दिवंगत आत्मा की शांति के लिए महाविद्यालय में रखा गया 2 मिनट का मौन

दरभंगा, देशज टाइम्स ब्यूरो। अंग्रेजी के मूर्धन्य विद्वान एवं प्रखर वक्ता के रूप में प्रो. अरुण कुमार झा सदा याद किए जाएंगे।मैथिली साहित्य के विकास में भी उनका योगदान अविस्मरणीय है। बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी प्रो. झा arun kumar jha  एक अपराजेय शिक्षक थे। उक्त बातें सी एम कॉलेज, दरभंगा के प्रधानाचार्य प्रो. विश्वनाथ झा ने महाविद्यालय के पूर्व अंग्रेजी विभागाध्यक्ष प्रो अरुण कुमार झा के असामयिक निधन के कारण महाविद्यालय में आयोजित शोकसभा की अध्यक्षता करते हुए कहा।अंग्रेजी के विद्वान, प्रखर वक्ता प्रो.अरुण कुमार झा का यूं अचानक जाना संपूर्ण मिथिला की क्षतिशोकसभा में अंग्रेजी विभागाध्यक्ष प्रो इंदिरा झा,प्रो. मंजू राय, डॉ. अमरेंद्र शर्मा,डॉ. प्रीति कनोडिया,डॉ. मनोज कुमार सिंह,डॉ. पी के चौधरी, संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ. आर एन चौरसिया, डॉ. नरेंद्र कुमार झा, प्रो, शिप्रा सिन्हा, डॉ. रीना कुमारी,परीक्षा नियंत्रक डॉ. मयंक श्रीवास्तव,इतिहास विभागाध्यक्ष प्रो, दिवाकर कुमार, प्रो.ललित शर्मा,डॉ. संजय कुमार,डॉ. अखिलेश कुमार ‘विभु’,विपिन कुमार, सृष्टि चौधरी, डा, बिरेंद्र कुमार झा,प्रतुल कुमार सहित अनेक शिक्षक,कर्मचारी एवं छात्र-छात्राएं शामिल हुए।

प्रो. इंदिरा झा ने कहा कि अरुण कुमार झा एक आदर्श एवं अत्यधिक लोकप्रिय शिक्षक थे,जिनकी शिक्षण-शैली काफ़ी प्रभावशाली थी। मानवीय गुणों से युक्त प्रो. झा एक कुशल प्रशासक एवं प्रबंधक थे। डॉ. अमरेंद्र शर्मा ने कअंग्रेजी के विद्वान, प्रखर वक्ता प्रो.अरुण कुमार झा का यूं अचानक जाना संपूर्ण मिथिला की क्षतिहा कि संवेदनशील व्यक्तित्व के धनी प्रो झा सबों के प्रिय तथा मधुर एवं मितभाषी थे। अंग्रेजी साहित्य के अनुसंधान क्षेत्र में उनका महत्वपूर्ण एवं सराहनीय योगदान है।

प्रो. मंजू राय ने कहा कि अरुण बाबू की अंग्रेजी साहित्य में गहरी पैठ थी।वे शिक्षकों को भी अध्ययन- पद्धति की जानकारी देते थे। राष्ट्र स्तरीय एवं उत्कृष्ट जर्नल ‘दि एविल’ के प्रधान संपादक के रूप में शोधार्थियों एवं शिक्षकों से उत्कृष्ट आलेख तैयार करवाते थे।

जानकारी के अनुसार, 1975 में सी एम कॉलेज,दरभंगा में अंग्रेजी व्याख्याता के रूप में सेवा प्रारंभ करने वाले अरुण कुमार झा 2008 ईस्वी में विश्वविद्यालय अंग्रेजी विभाग के अध्यक्ष बन कर गए, जहां वे मानविकी संकाय की डीन बनकर नवंबर 2015 में अवकाश ग्रहण किया।20 नवंबर 2020 को प्रो. अरुण कुमार झा का असामयिक निधन हो गया। शोकसभा के अंत में दिवंगत आत्मा की शांति के लिए 2 मिनट का मौन रखा गया।

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पॉलिटेक्निक अभियंत्रण डिप्लोमा परीक्षा 26,पारा मेडिकल परीक्षा 27 को, दरभंगा प्रशासन का अलर्ट

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पॉलिटेक्निक अभियंत्रण डिप्लोमा परीक्षा 26,पारा मेडिकल परीक्षा 27 को, दरभंगा प्रशासन का अलर्ट
पॉलिटेक्निक अभियंत्रण डिप्लोमा परीक्षा 26,पारा मेडिकल परीक्षा 27 को, दरभंगा प्रशासन का अलर्ट

दरभंगा, देशज टाइम्स ब्यूरो। बिहार संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा पर्षद, पटना की ओर से डिप्लोमा सर्टिफिकेट प्रवेश प्रतियोगिता परीक्षा (पॉलिटेक्निक अभियंत्रण) का आयोजन 26 नवंबर 2020 के 11:00 बजे पूर्वाह्न से 1:15 बजे अपराह्न तक एवं पारा मेडिकल परीक्षा का आयोजन 27 नवंबर 2020 के पूर्वाह्न 11:00 बजे से अपराह्न 1:15 बजे तक तथा 27 नवंबर को 2:00 बजे अपराह्न से 4:15 बजे अपराह्न तक पारा मेडिकल डेंटल परीक्षा का आयोजन दरभंगा जिला के 17 परीक्षा केंद्रों पर किया गया है।

स्वच्छ, शांतिपूर्ण एवं सफलतापूर्वक परीक्षा संपन्न कराने को जिलाधिकारी दरभंगा डॉ. त्यागराजन एसएम के आदेश के आलोक में अपर समाहर्ता विभूति रंजन चौधरी के द्वारा परीक्षा ड्यूटी में प्रतिनियुक्त दंडाधिकारी एवं परीक्षा केन्द्राधीक्षकों के साथ बैठक कर आवश्यक निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि कोविड-19 के लिए जारी गाइडलाईन का शत प्रतिशत अनुपालन परीक्षा केंद्रों पर कराया जाएगा, परीक्षार्थियों को परीक्षा केंद्र पर 2 घंटे पूर्व से प्रवेश दिया जाएगा, सभी परीक्षार्थियों की थर्मल स्क्रीनिंग होगी, सभी परीक्षार्थियों को मास्क पहनकर आना होगा तथा परीक्षा केंद्र के अंदर फुल शर्ट एवं जूता प्रतिबंधित रहेगा। जिनके शरीर का तापमान सामान्य से अधिक पाया जाएगा उन्हें परीक्षा केंद्र में प्रवेश नहीं दिया जाएगा।

उन्होंने सभी केंद्राधीक्षक को परीक्षा केंद्रों के कमरों, उपस्करों को सैनिटाइज करा देने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि परीक्षा के दौरान सभी प्रपत्र को ठीक ढंग से भरेंगे ताकि कोषागार में जमा कराते समय किसी प्रकार की कठिनाई न हो सके। जिन परीक्षा केन्द्रों पर परीक्षा का आयोजन होगा उनके नाम निम्नलिखित हैं,

सीएम साइंस कॉलेज दरभंगा, सीएम कॉलेज किलाघाट दरभंगा, मिल्लत कॉलेज दरभंगा, महात्मा गांधी कॉलेज दरभंगा, माउंट समर कान्वेंट स्कूल लहेरियासराय, एमएलएसएम कॉलेज दरभंगा, प्लस टू एमएआरएम विद्यालय लालबाग दरभंगा, केएस कॉलेज लहेरियासराय, एन झा महिला कॉलेज लहेरियासराय, प्लस टू राज उच्च विद्यालय दरभंगा, मारवाड़ी कॉलेज दरभंगा, एमके कॉलेज लहेरियासराय, एंजल उच्च विद्यालय, भीगो दरभंगा, न्यू होराइजन पब्लिक स्कूल क़ैदरबाद दरभंगा, इक्रा एकेडमी दरभंगा, प्लस टू कर्पूरी ठाकुर उच्च विद्यालय, दरभंगा, प्लस टू देशरत्न राजेंद्र प्रसाद बालिका उच्च विद्यालय, दरभंगा।

इन परीक्षा केंद्रों पर पॉलिटेक्निक इंजीनियरिंग के 7996, पारामेडिकल के 7541 तथा पारामेडिकल डेन्टल के 3697 परीक्षार्थी सम्मिलित होंगे।

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दरभंगा के प्रखंडों में अब बुधवार-गुरुवार-शनिवार को होगी सरकारी योजनाओं की जांच

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दरभंगा के  प्रखंडों में अब बुधवार-गुरुवार-शनिवार को होगी सरकारी योजनाओं की जांच
दरभंगा के प्रखंडों में अब बुधवार-गुरुवार-शनिवार को होगी सरकारी योजनाओं की जांच

दरभंगा, देशज टाइम्स ब्यूरो। प्रखंडों में चल रहे सरकार के कल्याणकारी योजनाओं की नियमित जांच एवं आम जनता की शिकायत सुनवाई कर उनका समाधान करने के लिए जिलाधिकारी दरभंगा डॉ. त्यागराजन एस एम ने आदेश जारी कर जिले में सभी वरीय पदाधिकारी को प्रखंड आवंटित करते हुए कहा है कि वे सप्ताह में 3 दिन क्रमशः बुधवार, गुरुवार एवं शनिवार को अपने आवंटित प्रखंड का भ्रमण कर प्रखंड स्तर पर चलाए जा रहे सभी प्रकार के विकासात्मक कल्याणकारी योजनाओं यथा सात निश्चय योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, ओ डी एफ, जल-जीवन- हरियाली, राजस्व कार्य, मनरेगा, लोक सेवाओं का अधिकार, लोक शिकायत निवारण, आपदा प्रबंधन, स्वास्थ्य, शिक्षा, आंगनबाड़ी केंद्र, आपूर्ति एवं कोविड-19 से संबंधित कार्य की जांच करेंगे एवं प्रखंड स्तर पर प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभार्थी के बयान लेंगे कि बिना परेशानी के उन्हें निर्धारित राशि मिली अथवा नहीं यदि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की शिकायत मिलती है तो कानूनी एवं अनुशासनिक कार्रवाई करेंगे।

वरीय पदाधिकारी प्रखंडों में भ्रमण के दौरान सर्वप्रथम 11:00 बजे से 12:00 बजे तक प्रखंड कार्यालय में उपस्थित रहकर आम जनता की शिकायत का सुनवाई करेंगे तथा शिकायत के समाधान हेतु आवश्यक कार्रवाई करेंगे एवं आरटीपीएस काउंटर का सप्ताहिक निरीक्षण करेंगे।

वरीय पदाधिकारियों के आवंटित प्रखंड के अनुसार राकेश कुमार गुप्ता, अनुमंडल पदाधिकारी सदर को हनुमाननगर प्रखंड, सादुल हसन खां, भूमि सुधार उप समाहर्ता सदर को केवटी, आलोक राज, वरीय उप समाहर्ता को जाले, गौरव शंकर, वरीय उप समाहर्ता को गौड़ाबौराम, फैजान सरवर, अपर अनुमंडल पदाधिकारी, बिरौल को किरतपुर, मोहम्मद रिजवान अहमद, जिला अल्पसंख्यक कल्याण पदाधिकारी को सिंहवाड़ा, सत्यम सहाय, वरीय उप समाहर्ता को बहेड़ी, संस्कार रंजन, वरीय उप समाहर्ता को तारडीह, अभिषेक रंजन, वरीय उप समाहर्ता को सदर दरभंगा, पूर्णेन्दु झा, परियोजना निदेशक (आत्मा) को हायाघाट, रवि कुमार, जिला परिवहन पदाधिकारी को बहादुरपुर, टोनी कुमारी, वरीय उप समाहर्ता को मनीगाछी, प्रदीप कुमार झा, अनुमंडल पदाधिकारी बेनीपुर को बेनीपुर, विकास कुमार, अपर अनुमंडल पदाधिकारी, बेनीपुर को अलीनगर, ब्रजकिशोर लाल, अनुमंडल पदाधिकारी, बिरौल को बिरौल, ललित राही, वरीय उप समाहर्ता, दरभंगा को घनश्यामपुर, राहुल कुमार, वरीय उप समाहर्ता, दरभंगा को कुशेश्वरस्थान एवं रवि प्रसाद चौहान, भूमि सुधार उप समाहर्ता, बिरौल को कुशेश्वरस्थान पूर्वी प्रखंड आवंटित किया गया है।

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