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Darbhanga

9 अगस्त को दरभंगा फिर निकलेगा हरियाली बचाने, पूरे जिले में लगेंगे 7,70,000 नए पौधे

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9 अगस्त को दरभंगा फिर निकलेगा हरियाली बचाने, पूरे जिले में लगेंगे 7,70,000 नए पौधे

दरभंगा,देशज टाइम्स ब्यूरो। 09 अगस्त को पृथ्वी दिवस है। इस मौके पर जल-जीवन-हरियाली अभियान के तहत दरभंगा जिले में 7,70,000 नए पौध लगाए जाएंगें। इसके लिएसंबंधित एजेंसी की ओर से चयनित स्थलों के अक्षांश व देशांतर के साथ विस्तृत सूची उपलब्ध करा दिया गया हैं।

डीएम डॉ. त्यागराजन एस.एम. ने उक्त सभी एजेंसी को पौधारोपण के लिए चयनित स्थलों की दुबारा जांच कर यह सुनिश्चित हो लेने को कहा है। तय हो, वह स्थल हर दृष्टिकोण से उपयुक्त है। उन्होंने कहा, नौ अगस्त को पृथ्वी दिवस के उपलक्ष्य में बिहार राज्य में 2.51 करोड़ पौधारोपण के लक्ष्य पर कार्य चल रहा है।

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कहा हैं, सभ्यता व विकास के दौर में पेड़ों की अंधाधुध कटाई किए जाने के चलते जलवायु में निरंतर परिवर्त्तन देखा जा रहा है। जलवायु परिवर्त्तन के दुष्प्रभावों को नियंत्रित करने के उद्देश्य से राज्य में एक साथ बहुत बड़ी मात्रा में पौधारोपण करने का विशाल लक्ष्य निर्धारित किया गया है। कहा, यह अत्यंत महत्वपूर्ण कार्य है।

इस कार्य की तैयारी के लिए अब मात्र दो माह समय रह गया है। इस अवधि में पौधारोपण के लिए चयनित स्थलों के अनुरूप पौधों (सैपलिंग) की उपलब्धता सुनिश्चित की जानी है। समीक्षा के क्रम में बताया गया, दरभंगा जिला क्षेत्र में 7,70,000 नए पौधरोपण के लक्ष्य के तहत मिथिला वन प्रमंडल, दरभंगा की ओर से 2,40,100 पौधा व डीआरडीए, दरभंगा की ओर से मनरेगा योजना के तहत 2,29,387 पौधा लगाया जाएगा।

ग्रामीण विकास विभाग की एजेंसी जीविका संगठन की ओर  से 65,686 पौधा, जिला शिक्षा कार्यालय की ओर से 47,837 पौधा, जिला मत्स्य कार्यालय की ओर से 18,122 पौधा, जिला कृषि कार्यालय की ओर से 9092 पौधा, बाल विकास परियोजना कार्यालय की ओर से 2388, जिला पशुपालन कार्यालय की ओर से 1400 व जिला स्वास्थ्य कार्यालय की ओर से 978 पौधारोपण किया जाएगा।

9 अगस्त को दरभंगा फिर निकलेगा हरियाली बचाने, पूरे जिले में लगेंगे 7,70,000 नए पौधेइसके साथ ही लाइन डिपार्टमेंट की ओर से भी बड़ी संख्या में पौधारोपण के लिए स्थल चिन्हित किया गया है। इसमें ग्रामीण कार्य प्रमंडल, दरभंगा-2 की ओर से 36,227, ग्रामीण कार्य प्रमंडल, दरभंगा-1 की ओर से 28,961, पथ प्रमंडल, दरभंगा की ओर से 50,250, पथ प्रमंडल, बेनीपुर की ओर से 10,558, स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन, दरभंगा व बेनीपुर की ओर से क्रमशः 9424 व 8369 पौधा, लघु जल संसाधन प्रमंडल  दरभंगा की ओर से 8822 एवं ग्रामीण कार्य प्रमंडल, बेनीपुर व बिरौल में क्रमशः 870 व 645 पौधा लगाया जाएंगें।

डीएम डॉ.एसएम ने कहा,पौधरोपण के लिए उतनी ही मात्रा में सैपलिंग की उपलब्धता महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया, सैपलिंग उपलब्ध कराने की जवाबदेही वन प्रमंडल, दरभंगा को दी गई है। वन प्रमंडल दरभंगा की ओर से नर्सरी में सैपलिंग तैयार की जा रही है।

वन पदाधिकारी पदाधिकारी, दरभंगा ने बताया, वन विभाग के नर्सरी में 2,80,000 सैपलिंग तैयार की जा रही है। वहीं डीपीएम जीविका की ओर से बताया गया, उनकीओर से 1,80,000 सैपलिंग तैयार की जा रही है। इसके अतिरिक्त स्थानीय नर्सरी से भी पौधा प्राप्त किया जाएगा।

डीडीसी डॉ. कारी प्रसाद महतो  ने बताया, मनरेगा योजना के तहत निजी जमीनों पर भी बृक्षारोपण की योजना हैं. 200 पौधे का एक यूनिट माना गया हैं। डीएम डॉ.एसएम ने सभी मनरेगा पीओ को विभिन्न एजेंसियों की ओर से प्रखंड क्षेत्रों में निर्धारित पौधारोपण के लिए चयनित स्थलों के लक्ष्य की प्रखंड वार सूची तैयार करने को कहा हैं।

वहीं,डीडीसी को वन प्रमंडल पदाधिकारी, डीपीएम जीविका व प्रबंध निदेशक,आत्मा के साथ बैठक कर पौधे की उपलब्धता सुनिश्चित कर लेने को कहा गया है। नगर आयुक्त को नगर क्षेत्र में पौधरोपण के लिए विभिन्न शिक्षण संस्थानों/एजेंसियों, सरकारी विभागों व एनजीओ के साथ बैठक कर स्थल का चयन एवं पौधों की आपूर्त्ति के लिए कार्य योजना को फाइनलाइज कर प्रतिवेदित करने का निदेश दिया गया है।

इस बैठक में नगर आयुक्त घनश्याम मीणा, वन प्रमंडल पदाधिकारी चंचल कुमार, उप विकास आयुक्त डॉ. कारी प्रसाद महतो, सभी प्रखण्डों के वरीय प्रभारी पदाधिकारी, सभी जिला स्तरीय पदाधिकारी, सभी कार्य विभागों के कार्यपालक अभियंता, अनुमंडल पदाधिकारी, बिरौल बीके. लाल, डीसीएलआर, बिरौल व बेनीपुर, एसपीजीआरओ बिरौल, डीएसपी सदर, सिविल सर्जन, अधीक्षक, डीएमसीएच समेत अन्य उपस्थित थे।

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BIRAUL

बिरौल में जमीन दिलाने के नाम पर रिटायर्ड शिक्षक से लाखों डकारे

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बिरौल में जमीन दिलाने के नाम पर रिटायर्ड शिक्षक से लाखों  डकारे

बिरौल देशज टाइम्स ब्यूरो। प्रखंड मुख्यालय व उसके आसपास के इलाके में जमीन की खरीद-बिक्री कराने वाले एक सुपौल बाजार के नामचीन दलाल गिरोह का करतूत सामने आया है, जो एक रिटायर्ड शिक्षक वैद्यनाथ यादव को जमीन खरीदवाने के नाम पर लाखों रुपए लेकर भी अब तक जमीन उपलब्ध कराने की बजाए अनदेखी कर रहा है।

पीड़ित वैद्यनाथ यादव ने देशज टाइम्स को बताया कि मुझे जमीन खरीदवाने के नाम पर उक्त दलाल  ने 10 जनवरी 2020 को पहले 21हजार उसके बाद उसने 13 जनवरी 2020 को अपने साला व बहेड़ा स्थित एक टेंट हाउस के नाम से 12 लाख व पुनः उक्त दलाल ने भी इसी तिथि को अपने नाम से 2 लाख 40 हजार रुपए लिया है।

यह सभी राशि एसबीआई बैंक के विभिन्न चेक के माध्यम से दलाल ने प्राप्त किया है। वैद्यनाथ यादव ने कहा कि इसके अलावा उक्त दलाल ने अग्रिम के रुप में 2 लाख रुपए नगद भी लिया है। लेकिन, जमीन का रजिस्ट्री कराने की बजाए उसने अपनी मजबूरी बता कर पांच महीने बीता दिया।

अब जब उसे कुल 16 लाख रुपए वापस करने के लिए कहा जा रहा है तो वह आजकल कर रहा है। रिटायर्ड शिक्षक वैद्यनाथ यादव व उनके परिजनों का कहना है कि अब उक्त दलाल के विरुद्ध कानून के शरण में जाने की तैयारी की जा रही है।

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Bihar

दरभंगा में कोरोना से मौत के बाद मरी हुई इंसानियत को रातभर जिंदा करते रहे नवीन-बदरुजम्मा

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दरभंगा में कोरोना से मौत के बाद मरी हुई इंसानियत को रातभर जिंदा करते रहे नवीन-बदरुजम्मा
  • ये है बुधवार को पटना से कोरोना से मौत के बाद शव के पहुंचने व दाहसंस्कार के पहले के सवाल
  • इंसानियत कहीं मर तो नहीं रही…? 
  • कोरोना संक्रमण से हुई मौत के बाद शव को दफ़नाने या दाह संस्कार करने के खिलाफ क्यों है समाज…?
  • अगर आपके अपने हों तो क्या होगा मगर यहां कई सवाल हैं जिसका जवाब मिलना मुश्किल है, सबको इंतजार है 

    दरभंगा, देशज टाइम्स ब्यूरो। कोरोना महामारी से आम लोगों की जान व काम धंधे को खतरा है। वहीं, इसके संक्रमण से लोगों की मानसिकता भी संक्रमित होती जा रही है। ये खौफ है या अज्ञानता…? विश्व स्वास्थ्य संगठन व शासन-प्रशासन की ओर से सूचना व संचार के विभिन्न माध्यमों से इस महामारी को लेकर बड़े स्तर पर जागरूकता चलाई जा रही है।मगर, हम सुरक्षा को लेकर दी जा रही गाइडलाइन का खुलकर मज़ाक उड़ा रहे है, बिना मास्क के घूम रहे हैं लेकिन पड़ोसी, सगे-संबंधियों की मौत पर संकुचित विचारधारा का परिचय देकर भाग रहे हैं, लोगों को गोलबंद कर स्थानीय कब्रिस्तान व शमशान में दफ़न या दाह संस्कार का विरोध कर रहे हैं।दरभंगा में कोरोना से मौत के बाद मरी हुई इंसानियत को रातभर जिंदा करते रहे नवीन-बदरुजम्मा
    जब आप अपने पड़ोसी, अपने मोहल्ले-गांव के मृतक को अपने मोहल्ले या गांव के कब्रिस्तान या शमशान में जगह नहीं देंगे तो दूसरे मोहल्ले-गांव वाले अपने कब्रिस्तान या शमशान में बाहरी को कैसे जगह देंगे। कहां लेकर जाएंगें परिवार जन अपनों के शव को…?ज़रा सोचिए, मृत्यु निश्चित है, हर किसी को प्राप्त होनी है। जो हमारा पड़ोसी या सगे संबंधी इस महामारी से गुज़र गए, उनके परिवार ने कभी ख्याल में भी न सोचा होगा तो नंबर किसी का भी आ सकता है, हां-किसी के पिता का, किसी के पुत्र का, किसी की पत्नी का…खुदा न करे, कहीं आपका कोई अपना गुज़र गया तब भी आप विरोध करेंगे।

    कोरोना संक्रमण से होती मौत के बाद शवों को दफ़नाने या दाह संस्कार को लेकर कमोवेश देश के लगभग सभी हिस्सों में यही स्थिति है। लोगों को जागरूक करने की ज़रूरत है, लोगों को WHO और स्वास्थ्य विभाग की गाइडलाइन को समझाने की ज़रूरत है। उन जन प्रतिनिधियों को भी पहले अपनी अज्ञानता दूर करनी चाहिए जो अपने क्षेत्र के लोगों को समझाने के बदले ऐसी मौत की खबर के बाद स्थानीय लोगों को उकसाने व गोलबंद होकर विरोध करवाने का काम करते हैं।

    आमजन से सहयोग के लिए स्थानीय प्रशासन को पूर्व प्रयास करना चाहिए। इसके लिए जिला से लेकर वार्ड स्तर पर सभी वरीय अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति व अध्यक्षता में वार्ड पार्षद, सभी राजनितिक पार्टी के वार्ड अध्यक्ष, धार्मिक स्थलों के प्रमुख के अलावे हिंदू मुस्लिम समुदाय से पांच-पांच सामाजिक कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों की बैठक होनी चाहिए।

दरभंगा में कोरोना से मौत के बाद मरी हुई इंसानियत को रातभर जिंदा करते रहे नवीन-बदरुजम्मा
इसमें एक घोषणा पत्र पर सामूहिक हस्ताक्षर कर के सुनिश्चित किया जाए,भविष्य में इस तरह की शवों के दफ़नाने या अंत्येष्टि में कोई विवाद या व्यवधान उत्पन्न नही होगा।

कल बुधवार को ही दरभंगा में जो हुआ वह अति निंदनीय व चिंतनीय है। बुधवार को कोरोना से पटना में दरभंगा के एक व्यक्ति की मौत के बाद एक शमशान में दाह संस्कार की व्यवस्था की गई। मगर, शाम सात बजे शव के आने की सूचना पर स्थानीय लोग एकत्रित होकर वहां अंत्येष्टि का विरोध करने लगे।

कई थानों की पुलिस व पदाधिकारी समझाने पहुंचे। शव जलाने से कोरोना का संक्रमण नही फैलता है। लेकिन, इस मुद्दे पर एकजुट स्थानीय लोग अपनी बातों पर अड़े रहे। आक्रोश में चिता के लिए सजी लकड़ियों तक को नदी में फेंंक डाला। अंततः टकराव से अलग हट लोगों को समझाने में असफल पुलिस ने किसी अन्य जगह अंत्येष्टि का मन बनाया। मृतक के परिवार व संबंधी के एक दर्जन लोगों को इसके लिए तैयार कर दूसरे शमशान के लिए मन बना लिया।

मृतक के वार्ड के पार्षद सह उपमहापौर बदरुजम्मा खान व शांति समिति के वरिष्ठ सदस्य नवीन सिन्हा को भी सहयोग के लिए प्रशासन ने आग्रह किया। इस प्रकरण में तब तक रात्रि के बारह बज चुके थे। मृतक के परिजन के साथ शव लेकर ये लोग दूसरे शमशान पहुंचे। गड्ढा खोदने के लिए दो लोग तैयार होकर इस कार्य को तो कर दिया, लेकिन एंबुलेंस से शव पहुंचते ही ये लोग भी चले गए। और तो और मृतक के परिजन में उसके परिवार के चार लोग छोड़ मात्र दो नजदीकी सदस्य ही शमशान तक पहुंचे, बाकी लोग रास्ते से ही छोड़ कर चल दिए। प्रशासन की ओर से पदाधिकारी व पुलिसकर्मी शमशान से थोड़ी दूरी पर तैनात रहे।

अंततः देर रात तीन बजे तक बदरुजम्मा खान व नवीन सिन्हा  ने मात्र दो लोगों की मदद से सड़क से तीन सौ मीटर दूर उबड़-खाबड़ रास्ते से लकड़ी व अंत्येष्टि में प्रयोग होने वाले अन्य सामान शमशान तक पहुंचाया। मृतक के परिजन किसी तरह पीपीई किट पहन शव को चिता तक पहुंचा कर अंत्येष्टि की।  सुबह तीन बजे सभी सुरक्षा मानक अपनाकर ये लोग घर लौटे।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ का कहना है, कोरोना से मृत शव के विशेष पैकिंग के बाद उसे खोले बिना अंत्येष्टि करना है ताकि संक्रमण नही फैले। शव जलने के बाद उसके राख से कोई हानि नही होती है। लेकिन इस सबसे अलग लोग भ्रांतियों में पड़कर इंसानियत को तार तार कर रहे हैं।
इसी तरह दो अन्य मुस्लिम समुदाय के कोरोना से मौत के उपरांत भी दो कब्रिस्तान में दफन के विरोध पर अन्य तीसरे कब्रिस्तान में काफी विवाद के बाद कुछ बुद्धिजीवियों के सहयोग से शव की मिट्टी (दफ़न) हो सकी थी।

दरभंगा में अभी तक कोरोना से मृत मुस्लिम व हिंदू दोनों समुदाय के शव निष्पादन में सहयोगी बन कार्य को अंजाम देने वाले समाजसेवी नवीन सिन्हा ने प्रशासन से इस दिशा में लोगों को जागरूक व पूरी जानकारी देने के साथ आगे शव अंत्येष्टि के नियम बनाने की भी मांग की है।

बुधवार को कोरोना से मृत हिंदू शव की अंत्येष्टि में सहयोग करने वाले शहर के उप-महापौर बदरुज़्ज़मां खान के कार्य को असल इंसानियत का कार्य बताते हुए अन्य लोगों से भी सुरक्षा मानक अपनाकर इस विपरीत परिस्थिति में मानवता को ज़िंदा रखने की अपील की है। जानकारी के अनुसार, नवीन सिन्हा  कबीर सेवा संस्थान के सदस्य भी हैं, जिसमें एक दर्जन सदस्य लगातार बारह महीने अपने खर्च पर लावारिस शव की अंत्येष्टि सश्रम करते आ रहे हैं।दरभंगा में कोरोना से मौत के बाद मरी हुई इंसानियत को रातभर जिंदा करते रहे नवीन-बदरुजम्मा

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SINGHWARA

सिंहवाड़ा की ज्योति दिखेगी सिल्वर स्क्रीन पर,अगस्त में रिलीज होगी ज्योति की फिल्म आत्मनिर्भर

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सिंहवाड़ा की ज्योति दिखेगी सिल्वर स्क्रीन पर,अगस्त में रिलीज होगी ज्योति की फिल्म आत्मनिर्भर

सिंहवाड़ा, देशज टाइम्स ब्यूरो। अब सिंहवाड़ा की बेटी फिल्मों में काम करेगी। जी हां, यह बेटी है ज्योति कुमारी। यह वही ज्योति है जो लॉकडाउन में अपने चोटिल पिता मोहन पासवान को हरियाणा के गुरुगाम से साइकिल पर बैठाकर 1200 किमी का सफर तय कर दरभंगा लायी थी। अब यही बेटी कहानी बनकर  सिल्वर स्क्रीन पर दिखेगी।

जानकारी के अनुसार, ज्योति की फिल्म का नाम है आत्मनिर्भर। वी मेक फिल्मंज’ कंपनी के प्रोडक्शन हाउस के तले बन रही इस फिल्म में नायिका का किरदार असल जीवन में नायिका रही ज्योति कुमारी ही निभाएगी। फिल्म अगस्त तक रिलीज हो जाएगी।

ज्योति पर फिल्म शाइन कृष्णा, मिराज, फिरोज व साजिद नांबियार ने मिलकर बना रहे हैं। निर्देशन कृष्णा करेंगे। फिल्म में ज्योति की कहानी में दर्शक देखेंगे आखिर कैसे व किस परिस्थिति में एक पंद्रह साल की किशोरी गर्मी की तपिश को झेलती लॉकडाउन के मौसम में इतनी लंबी दूरी अपने पिता के साथ जद्दोजहद में कैसे तय करती है। फिलहाल फिल्म को लेकर ज्योति के गांव सिरहुल्ली में भी खुशी का माहौल है वहीं सिंहवाड़ा समेत संपूर्ण मिथिलांचल को अपनी बेटी पर नाज है।

 

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