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मिथिला के मिनी देवघर में नहीं लगेगा श्रावणी मेला, पूजा से पहले होना होगा सैनिटाइज

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मिथिला के मिनी देवघर में नहीं लगेगा श्रावणी मेला, पूजा से पहले होना होगा सैनिटाइज

बेगूसराय, देशज न्यूज। भगवान भोले शंकर की भक्ति कर शक्ति पाने का पावन माह सावन सोमवार छह जुलाई से शुरू हो रहा है। इस वर्ष सावन सोमवार से शुरू होकर सोमवार को ही समाप्त होगा, पांच सोमवारी व्रत पड़ रहे हैं छह जुलाई, 13 जुलाई, 20 जुलाई, 27 जुलाई, 22 अगस्त और तीन अगस्त को। सावन में खासकर सोमवार के दिन सदियों से भोले शंकर का अभिषेक करने की परंपरा है। लेकिन इस वर्ष सभी परंपराएं टूट जाएगी। लॉकडाउन के कारण श्रावणी मेला नहीं लगेगा।

मिथिलांचल के मिनी देवघर के नाम से चर्चित गढ़पुरा के पावन शिवालय बाबा हरिगिरी धाम में जलाभिषेक करने के लिए सिमरिया गंगा घाट से जल लेकर श्रद्धालुओं को खुद के भरोसे आना होगा। गृह मंत्रालय द्वारा सोशल डिस्टेंस का पालन करवाने के आदेश के कारण सिमरिया से लेकर बाबा हरी गिरी धाम तक कोई सरकारी व्यवस्था नहीं होने जा रही है। पूर्व के वर्षों में सावन शुरू होने से 15 दिन पूर्व से ही तैयारी और सजावट शुरू हो जाती थी। लेकिन इस वर्ष अब तक कुछ शुरू नहीं हो सका है, कुछ तैयारी होगी भी तो हरिगिरी धाम विकास समिति अपने स्तर से करेगी।

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डीएम अरविन्द कुमार वर्मा ने बताया कि पूजा-पाठ को लेकर गृह मंत्रालय द्वारा जो आदेश जारी किए गए हैं उसके अनुसार भीड़ नहीं जुटाना है। इसीलिए मेला का आयोजन नहीं किया जाएगा। हरिगिरी धाम विकास समिति के सचिव लक्ष्मीकांत मिश्र ने बताया कि कोरोना के कहर से बचने के लिए जारी निर्देश के अनुसार कोई विशेष व्यवस्था नहीं की जा रही है। आगे अगर आदेश जारी होगा तो प्रशासनिक और विकास समिति के स्तर पर विशेष व्यवस्था की जाएगी। फिलहाल लाइट और छोटे टेंट लगाए जाएंगे। धाम परिसर में हल्की व्यवस्था रहेगी, श्रद्धालुओं को सोशल डिस्टेंस का पालन करवाने के लिए कार्यकर्ता तत्पर रहेंगे। श्रद्धालुओं को सेनीटाइज होने के बाद ही मंदिर में प्रवेश करने दिया जाएगा।

कभी अंगुतराप और स्वर्णभूमि के नाम से प्रसिद्ध बेगूसराय जिला के उत्तरी सीमा पर गढ़पुरा प्रखंड मुख्यालय से महज एक किलोमीटर दूर स्थित पावन शिवालय बाबा हरिगिरिधाम मिथिला के देवघर के रूप में भी जाना जाने लगा है। चन्द्रभागा (अतिक्रमण के कारण विलुप्त) नदी के पश्चिमी तट पर पौराणिक काल से स्थित इस शिवालय की महिमा वर्ष 2000 से काफी फैल गई।
पौराणिक मंदिर को तोड़कर नया भव्य शिवालय के साथ पार्वती मंदिर, काली मंदिर, दुर्गा मंदिर, हनुमान मंदिर, विश्वकर्मा मंदिर, रामजानकी मंदिर, रविदास मंदिर, समाधि स्थल, धर्मशाला का निर्माण भक्तजनों के सहयोग से होने बाद परिसर की छटा पूर्णतया भक्तिभाव से विभोर लगती है। जबकि कोणार्क सूर्य मंदिर की तर्ज पर सूर्य मंदिर का निर्माण चल रहा है। यहां प्रतिवर्ष दस लाख से अधिक श्रद्धालु जलाभिषेक करते हैं, तो वहीं एक हजार से भी अधिक मुंडन, उपनयन और शादी समेत अन्य संस्कार कराये जाते हैं। दूरदराज के जिलोंं के लोग आकर वैवाहिक रस्म को पूरा करते हैं।
कथाओं के अनुसार श्मशान भूमि पर बाबा हरिगिरी नामक महात्मा द्वारा स्थापित इस शिवलिंग की पूजा-अर्चना उगना के साथ महाकवि विद्यापति ने भी जयमंगलागढ़ जाने के क्रम में की थी। आज हरिगिरी धाम महज एक मंदिर नहीं, आस्था, विश्वास, भाईचारा और धार्मिक समन्वय का केंद्र बन गया है। सावन माह में यहां भक्तजनों का कारवां सिमरिया घाट से गंगाजल लेकर पैदल के साथ बस निजी वाहन एवं ट्रेन से उमड़ते ही रहता है।

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वाहन लुटेरों का कहर, लखीसराय के टूर एंड ट्रेवल एजेंसी के स्कॉर्पियो चालक की बेगूसराय में हत्या

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वाहन लुटेरों का कहर, लखीसराय के टूर एंड ट्रेवल एजेंसी के स्कॉर्पियो चालक की बेगूसराय में हत्या

बेगूसराय, देशज न्यूज। बेगूसराय में बेखौफ वाहन लुटेरों ने लखीसराय के एक स्कार्पियो चालक के सिर में गोली मारकर उसकी हत्या कर दी और   गाड़ी लूट ली। उसका शव रविवार को जिले के फुलवरिया थाना क्षेत्र के मुजौना गांव के समीप सड़क किनारे से बरामद हुआ। हालांकि काफी देर तक ड्राइवर से संपर्क नहीं होने पर शंका के आधार पर गाड़ी मालिक ने जब जीपीएस लॉक कर दिया तो लुटेरे स्कॉर्पियो छोड़कर भाग निकले।

मृतक की पहचान लखीसराय जिले के किऊल थाना क्षेत्र स्थित गोड्डी निवासी सतीश कुमार यादव के रूप में की गई है। सतीश की लाश बेगूसराय जिले  के फुलवरिया थाना क्षेत्र के मुजौना गांव के समीप सड़क किनारे से मिली है। मृतक के परिजन रवि शंकर कुमार ने बताया कि सतीश किऊल रेलवे स्टेशन के समीप स्थित जिनियल टूर एंड ट्रेवल एजेंसी में विजय कुमार शुक्ला की गाड़ी चलाता है।

वाहन लुटेरों का कहर, लखीसराय के टूर एंड ट्रेवल एजेंसी के स्कॉर्पियो चालक की बेगूसराय में हत्याशनिवार की रात करीब 8:30 बजे तीन लोगों ने अपनी बीमार पत्नी को बरौनी थाना क्षेत्र के मालती से लाने के लिए स्कॉर्पियो  किराए पर लिया था। इसके बाद काफी देर तक ड्राइवर के नहीं लौटने पर गाड़ी मालिक ने जब ड्राइवर से संपर्क करने का प्रयास किया तो कोई संपर्क नहीं हो सका।

शंका होने पर ट्रैवल एजेंसी मालिक ने रात करीब 11:30 बजे जीपीएस लॉक कर दिया तो गाड़ी बंद हो गई। जिस समय जीपीएस लॉक किया गया, स्कॉर्पियो लेकर लुटेरे खगड़िया की ओर भाग रहे थे । खगड़िया जिले  के मुफस्सिल थाना क्षेत्र के एक पेट्रोल पंप से स्कॉर्पियो बरामद की गयी है।

इधर, रविवार को बहियार की ओर जा रहे लोगों ने किरतौल पथ पर मुजौना के समीप एक लाश देखी तो हड़कंप मच गया। मौके पर काफी लोग जुटे, लेकिन उसकी पहचान नहीं हो सकी। बाद में पहुंची फुलवरिया थाना की पुलिस ने ड्राइवर की शर्ट पर लगे ट्रेलर्स को फोन किया तो मृतक की पहचान हो सकी।

ट्रैवल एजेंसी के मालिक प्रवीण कुमार गौतम ने बताया कि वाहन किराए पर लेने के लिए जिन लोगों ने फोन किया था, उसने अपने पहचान का कागजात नहीं दिया था। जिस पर उन्होंने ड्राइवर को गाड़ी ले जाने से मना कर दिया। इसके बावजूद ड्राइवर कैसे गया, घटना कैसे हुई, घटना में शामिल बदमाश कौन थे, इसकी पहचान के लिए कुछ कागजात और सीसीटीवी फुटेज हाथ लगे हैं। सभी तथ्य पुलिस को दिए गए हैं तथा विभिन्न तरीकों से छानबीन की जा रही है।

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ये है बिहारी दम: प्रवासी श्रमिकों ने सूखे पोखर में ला दिया पानी,फिर नहीं मिलेगा काम तो चले परदेस

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ये है बिहारी दम: प्रवासी श्रमिकों ने सूखे पोखर में ला दिया पानी,फिर नहीं मिलेगा काम तो चले परदेस
बेगूसराय,देशज न्यूज । देश के तमाम बड़े शहर से प्रवासी श्रमिकों के लौटने का सिलसिला जारी है। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, गुवाहाटी, अगरतला जैसे शहरों से लौटने का सिलसिला जारी रहने के  बीच राजस्थान, हरियाणा और पंजाब की ओर श्रमिकों के जाने का क्रम भी धीरे-धीरे तेज हो रहा है।
मिल मालिक और बड़े-बड़े जमींदार रिजर्व एसी बस भेज कर श्रमिकों को मंगवा रहे हैं। उन्हें डर है कि यदि बिहार से श्रमिकों के लाने की विशेष व्यवस्था नहीं की जाएगी तो यह लौट कर नहीं आएंगे और उनका विकास कार्य रुक जाएगा। इधर, गांव में रह रहे श्रमिकों में से कुछ सरकारी स्तर से मिले काम की बदौलत गांव के विकास और पर्यावरण संरक्षण का इतिहास रच रहे हैं।
गांवों में जिस पोखर के जीर्णोद्धार में साल- दो साल लगते थे, वह प्रवासी श्रमिकों के श्रम शक्ति की बदौलत 10 से 15 दिनों में हो रहा है। migrant workers brought water to dry puddle लॉकडाउन के दौरान काम उपलब्ध कराए जाने के बाद जिले के 23 से अधिक पोखर का जीर्णोद्धार हो चुका है। पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से जल जीवन और हरियाली के लिए मनरेगा एवं लघु सिंचाई विभाग की योजनाओं से कराए गए जिर्णोद्धार के कारण मानसून की पहली बारिश में ही पोखरों में पानी जमा हो गया है।
पोखर के चारों ओर migrant workers brought water to dry puddle हरियाली के लिए पेड़ लगाए जा रहे हैं। सरकार की सोच है कि जल और हरियाली रहेगा, तभी तो जीवन सुरक्षित रह सकेगा। लघु जल संसाधन विभाग द्वारा बेगूसराय जिला में 42 सार्वजनिक तालाब, पोखर के जीर्णोद्धार का लक्ष्य दिया गया था, जिसमें से लॉकडाउन के दौरान 23 का कार्य पूरा कर लिया गया है, जबकि 11 योजनाओं का प्रगति पर है।
इसके अलावा भी प्रशासन देश के विभिन्न शहरों से आए श्रमिकों को कौशल के अनुसार रोजगार उपलब्ध कराने के लिए रोजगार के विभिन्न अवसर सृजित किए जा रहे हैं। श्रमिकों का रजिस्ट्रेशन किया जा रहा है, बेगूसराय में अब तक 26,484 प्रवासियों का डाटा फिड किया जा चुका है। जबकि काम करने के इच्छुक 1964 श्रमिकों को मनरेगा, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग, हर घर नल का जल, बरौनी रिफाइनरी, ग्रामीण कार्य विभाग एवं पथ निर्माण विभाग में रोजगार उपलब्ध कराया गया है लेकिन इससे श्रमिकों का कुछ होने वाला नहीं है।
बेगूसराय में देश के विभिन्न हिस्सों से 60 हजार से भी अधिक श्रमिक वापस आए हैं। इन्हें काम उपलब्ध कराना नामुमकिन तो नहीं लेकिन मुश्किल जरूर है। जल, जीवन और हरियाली अभियान में लगे दोरिक सहनी, इंदल सहनी, विनोद पासवान आदि ने बताया कि हम लोग दिल्ली में काम करते थे।migrant workers brought water to dry puddle
लॉकडाउन हो जाने के बाद जब काम बंद हो गया तो वहां रोटी पर भी आफत हो गई। उत्तम नगर में रहते थे, झुग्गी से निकलना मुश्किल था। चार दिन तक चूरा-दालमोट खाकर रहे, जिसके बाद करीब 20 दिनों की लंबी पैदल यात्रा कर हम लोग गांव आए। यहां एकांतवास केंद्र (क्वारेन्टाइन सेंटर) में 14 दिन रहने के बाद घर जाने की इजाजत मिली।
सेंटर पर ही फॉर्म भरा था, जिसके बाद काम मिल गया है लेकिन इसके बाद काम मिलेगा यह कहना मुश्किल है। अगर काम नहीं मिला तो भी दिल्ली नहीं जाएंगे, एक- दो महीने के बाद पंजाब या हरियाणा मजदूरी करने चले जाएंगे, यहां रहेंगे तो फिर पेट कैसे भरेगा। सुनने में आया है कि प्रधानमंत्री द्वारा हम गरीबों के लिए योजना चलाई गई है अगर उस योजना में काम मिला तो ठीक, नहीं मिला तो परदेस का ही आशा है।
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उतरे दरभंगा के लोग, गुवाहाटी से अपना दुकान बेच कर रंजीत आ गया गांव,अब नहीं जाएगा वापस

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उतरे दरभंगा के लोग, गुवाहाटी से अपना दुकान बेच कर रंजीत आ गया गांव,अब नहीं जाएगा वापस

बेगूसराय, देशज न्यूज। लॉकडाउन से उत्पन्न स्थिति के मद्देनजर असम, मणिपुर समेत पूर्वोत्तर के राज्य से श्रमिकों के लौटने का सिलसिला काफी तेज हो गया है। बेगूसराय के अलावा समस्तीपुर, दरभंगा, मुजफ्फरपुर, गोपालगंज, सिवान, शिवहर तक के यात्री बेगूसराय स्टेशन और बरौनी जंक्शन पर बड़ी संख्या में उतर रहे हैं।

यहां उतर कर बस तथा अन्य वाहन से अपने घर को जा रहे हैं, इनके चेहरे पर घर वापसी की खुशी स्पष्ट दिख रही है। हालांकि, प्रवास का दर्द कुरेदे जाने पर इनके आंख से छलकते आंसू वहां हुई परेशानी को स्पष्ट बयां करती है।

सोमवार को सुबह 8:59 बजे जब गुवाहाटी लोकमान्य तिलक टर्मिनल एक्सप्रेस बेगूसराय स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर एक पर रुकी तो सैकड़ों यात्री उतरे। सिर पर झोला, पीठ पर बैग और हाथ पकड़े छोटे बच्चों के साथ उतरे परदेस फिर से लौट कर उस शहर जाएंगे, यह कहना मुश्किल है।

पूर्वोत्तर के विभिन्न शहरों से लौटे कामगारों का कहना है कि अब यही काम खोजेंगे, स्वरोजगार की व्यवस्था करेंगे। इन लोगों को आशा है कि बिहार सरकार बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन कर रही है, केंद्र सरकार ने भी प्रधानमंत्री गरीब कल्याण रोजगार अभियान शुरु किया है तो जरूर कहीं न कहीं काम मिलेगा।

अगर काम नहीं मिला तो मजबूरी में रोजी रोटी के लिए फिर से परदेस का चक्कर लगाना ही पड़ेगा। बेगूसराय बस स्टैंड में बस का इंतजार कर रहे ठठेरवा घाट निवासी बी.ए. पास बेरोजगार रंजीत कुमार राजा गुवाहाटी के सदर बाजार गली नंबर-चार में स्टेशनरी शॉप बेच कर घर आ गया है।

2013 के नवम्बर में जब रंजीत के परिवार की आर्थिक स्थिति काफी खराब हो गई तो गांव के लोगों के साथ उसने भी गुवाहाटी की राह पकड़ ली। वहां पांच दिन तक काम खोजने के बाद एक स्टेशनरी शॉप में उसे काम मिल गया। दो साल तक काम करने के बाद दुकान मालिक की मौत हो गई तो परिजनों ने दुकान बेचने का प्रयास शुरू कर दिया।

दो लाख 75 हजार में दुकान बिक रहा था, उसने अपने पांच कट्ठा खेत बेचकर गांव से एक लाख रुपया मंगाया और दुकान मालिक के परिजन को एक लाख 40 हजार देकर शेष पैसा का किस्त बनावा लिया। उसने अपने पत्नी को भी बच्चों के साथ मंगवा लिया, बच्चे भी सन ऑक्सफोर्ड स्कूल में पढ़ रहे थे।

मार्च में जब देशव्यापी लॉकडाउन हो गया था तो स्कूल के साथ-साथ दुकान भी बंद हो गया। मई के अंतिम सप्ताह में जब लॉकडाउन में कुछ छूट मिली तो उसने दुकान खोलना शुरू कर दिया। लेकिन इसी बीच दो जून की रात बदमाशों ने उसकी दुकान का ताला तोड़कर गल्ला से करीब 17 हजार रुपया चुरा लिया, विरोध करने पर पिटाई कर दी।

पुलिस कुछ सुनने को तैयार नहीं हुआ, पास का एक दुकानदार परेशान करने लगा। जिसके बाद उसने रंजीत ने दुकान बेच लिया और तीन लाख 50 हजार अपने खाता में जमा कर आ गया है घर। अब यहां घर की मरम्मत करायेगा, यहीं रहेगा, बचे पैसों से पत्नी के लिए श्रृंगार प्रसाधन का दुकान खोल देगा और खुद कहीं काम करेगा।

रंजीत का कहना है कि बिहार के लिए यह एक बड़ा अवसर है कि इन श्रम-शक्ति का सफल प्रयोग कर अपने ही क्षेत्र में रोजगार के अवसर सृजित किए जाएं। सरकार ध्यान दे तो अपार कौशल क्षमता और संभावना रखने वाले बिहार के सामने उभरने का एक स्वर्णिम अवसर है और ऐसा हो जाए तो अब दिन दूर नहीं, जब बिहार अपनी श्रमशक्ति से देश का विकसित और आत्मनिर्भर राज्य बन सकेगा।
फोटो कैप्शन : बेगूसराय बस स्टैंड में गांव जाने का इंतजार कर रहा प्रवासी परिवार

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