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औरंगाबाद में पिकअप से जबरन 17 हजार वसूलते सब इंस्पेक्टर समेत थाने का ड्राइवर गिरफ्तार

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औरंगाबाद में पिकअप से जबरन 17 हजार वसूलते सब इंस्पेक्टर समेत थाने का ड्राइवर गिरफ्तार

औरंगाबाद,देशज न्यूज। औरंगाबाद जिले में पदस्थापित एक सब इंस्पेक्टर कपिल देव पांडेय व नगर थाने के वाहन चालक सुबोध कुमार को एक पिकअप वैन मालिक से अवैध रूप से 17000 रुपये वसूली करने के मामले में गुरुवार को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।

 अनुमंडल पुलिस अधिकारी अनूप कुमार ने बताया, हरिहरगंज के पवन कुमार का तिल लदा पिकअप वैन कहीं जा रहा था। रास्ते में वह एक दूसरी गाड़ी से रगड़ खा गया। इसी समय नगर थाने में पदस्थापित कपिल देव पांडे पुलिस गाड़ी से वहां पहुंचे जिसे चालक सुबोध कुमार चला रहा था. सुबोध कुमार ने ड्राइवर से बातचीत की। 25000 रुपये की मांग की।

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बाद में मामला 17000  रु पर फाइनल किया गया। इन दोनों ने पिकअप वाले से 17000 रुपए  वसूल लिए। एसडीपीओ ने बताया, इसकी सूचना मिलने पर पुलिस अधीक्षक दीपक वर्णवाल ने इस मामले की जांच कराई तो ड्राइवर सुबोध कुमार ने पैसा वसूलने की बात स्वीकार कर ली। उसके पास से 16000 रुपये भी बरामद किए गए।

इस मामले में गाड़ी के मालिक पवन कुमार के बयान पर नगर थाने में एक प्राथमिकी दर्ज की गई है। सब इंस्पेक्टर तथा वाहन चालक को गिरफ्तार कर लिया गया है। इनके विरुद्ध निलंबन की कार्रवाई भी की गई है।

145 साल पुराने दरभंगा से पहली बार खबरों का गरम भांप ...असंभव से आगे देशज टाइम्स हिंदी दैनिक। वेब पेज का संपूर्ण अखबार। दरभंगा खासकर मिथिलाक्षेत्रे, हमार प्रदेश, सारा जहां की ताजा खबरें। रोजाना नए कलेवर में। फिल्म-नौटंकी के साथ सरजमीं को समेटे। सिर्फ देशज टाइम्स में, पढि़ए, जाग जाइए।

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बिरौल में जमीन दिलाने के नाम पर रिटायर्ड शिक्षक से लाखों डकारे

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बिरौल में जमीन दिलाने के नाम पर रिटायर्ड शिक्षक से लाखों  डकारे

बिरौल देशज टाइम्स ब्यूरो। प्रखंड मुख्यालय व उसके आसपास के इलाके में जमीन की खरीद-बिक्री कराने वाले एक सुपौल बाजार के नामचीन दलाल गिरोह का करतूत सामने आया है, जो एक रिटायर्ड शिक्षक वैद्यनाथ यादव को जमीन खरीदवाने के नाम पर लाखों रुपए लेकर भी अब तक जमीन उपलब्ध कराने की बजाए अनदेखी कर रहा है।

पीड़ित वैद्यनाथ यादव ने देशज टाइम्स को बताया कि मुझे जमीन खरीदवाने के नाम पर उक्त दलाल  ने 10 जनवरी 2020 को पहले 21हजार उसके बाद उसने 13 जनवरी 2020 को अपने साला व बहेड़ा स्थित एक टेंट हाउस के नाम से 12 लाख व पुनः उक्त दलाल ने भी इसी तिथि को अपने नाम से 2 लाख 40 हजार रुपए लिया है।

यह सभी राशि एसबीआई बैंक के विभिन्न चेक के माध्यम से दलाल ने प्राप्त किया है। वैद्यनाथ यादव ने कहा कि इसके अलावा उक्त दलाल ने अग्रिम के रुप में 2 लाख रुपए नगद भी लिया है। लेकिन, जमीन का रजिस्ट्री कराने की बजाए उसने अपनी मजबूरी बता कर पांच महीने बीता दिया।

अब जब उसे कुल 16 लाख रुपए वापस करने के लिए कहा जा रहा है तो वह आजकल कर रहा है। रिटायर्ड शिक्षक वैद्यनाथ यादव व उनके परिजनों का कहना है कि अब उक्त दलाल के विरुद्ध कानून के शरण में जाने की तैयारी की जा रही है।

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दरभंगा में कोरोना से मौत के बाद मरी हुई इंसानियत को रातभर जिंदा करते रहे नवीन-बदरुजम्मा

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दरभंगा में कोरोना से मौत के बाद मरी हुई इंसानियत को रातभर जिंदा करते रहे नवीन-बदरुजम्मा
  • ये है बुधवार को पटना से कोरोना से मौत के बाद शव के पहुंचने व दाहसंस्कार के पहले के सवाल
  • इंसानियत कहीं मर तो नहीं रही…? 
  • कोरोना संक्रमण से हुई मौत के बाद शव को दफ़नाने या दाह संस्कार करने के खिलाफ क्यों है समाज…?
  • अगर आपके अपने हों तो क्या होगा मगर यहां कई सवाल हैं जिसका जवाब मिलना मुश्किल है, सबको इंतजार है 

    दरभंगा, देशज टाइम्स ब्यूरो। कोरोना महामारी से आम लोगों की जान व काम धंधे को खतरा है। वहीं, इसके संक्रमण से लोगों की मानसिकता भी संक्रमित होती जा रही है। ये खौफ है या अज्ञानता…? विश्व स्वास्थ्य संगठन व शासन-प्रशासन की ओर से सूचना व संचार के विभिन्न माध्यमों से इस महामारी को लेकर बड़े स्तर पर जागरूकता चलाई जा रही है।मगर, हम सुरक्षा को लेकर दी जा रही गाइडलाइन का खुलकर मज़ाक उड़ा रहे है, बिना मास्क के घूम रहे हैं लेकिन पड़ोसी, सगे-संबंधियों की मौत पर संकुचित विचारधारा का परिचय देकर भाग रहे हैं, लोगों को गोलबंद कर स्थानीय कब्रिस्तान व शमशान में दफ़न या दाह संस्कार का विरोध कर रहे हैं।दरभंगा में कोरोना से मौत के बाद मरी हुई इंसानियत को रातभर जिंदा करते रहे नवीन-बदरुजम्मा
    जब आप अपने पड़ोसी, अपने मोहल्ले-गांव के मृतक को अपने मोहल्ले या गांव के कब्रिस्तान या शमशान में जगह नहीं देंगे तो दूसरे मोहल्ले-गांव वाले अपने कब्रिस्तान या शमशान में बाहरी को कैसे जगह देंगे। कहां लेकर जाएंगें परिवार जन अपनों के शव को…?ज़रा सोचिए, मृत्यु निश्चित है, हर किसी को प्राप्त होनी है। जो हमारा पड़ोसी या सगे संबंधी इस महामारी से गुज़र गए, उनके परिवार ने कभी ख्याल में भी न सोचा होगा तो नंबर किसी का भी आ सकता है, हां-किसी के पिता का, किसी के पुत्र का, किसी की पत्नी का…खुदा न करे, कहीं आपका कोई अपना गुज़र गया तब भी आप विरोध करेंगे।

    कोरोना संक्रमण से होती मौत के बाद शवों को दफ़नाने या दाह संस्कार को लेकर कमोवेश देश के लगभग सभी हिस्सों में यही स्थिति है। लोगों को जागरूक करने की ज़रूरत है, लोगों को WHO और स्वास्थ्य विभाग की गाइडलाइन को समझाने की ज़रूरत है। उन जन प्रतिनिधियों को भी पहले अपनी अज्ञानता दूर करनी चाहिए जो अपने क्षेत्र के लोगों को समझाने के बदले ऐसी मौत की खबर के बाद स्थानीय लोगों को उकसाने व गोलबंद होकर विरोध करवाने का काम करते हैं।

    आमजन से सहयोग के लिए स्थानीय प्रशासन को पूर्व प्रयास करना चाहिए। इसके लिए जिला से लेकर वार्ड स्तर पर सभी वरीय अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति व अध्यक्षता में वार्ड पार्षद, सभी राजनितिक पार्टी के वार्ड अध्यक्ष, धार्मिक स्थलों के प्रमुख के अलावे हिंदू मुस्लिम समुदाय से पांच-पांच सामाजिक कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों की बैठक होनी चाहिए।

दरभंगा में कोरोना से मौत के बाद मरी हुई इंसानियत को रातभर जिंदा करते रहे नवीन-बदरुजम्मा
इसमें एक घोषणा पत्र पर सामूहिक हस्ताक्षर कर के सुनिश्चित किया जाए,भविष्य में इस तरह की शवों के दफ़नाने या अंत्येष्टि में कोई विवाद या व्यवधान उत्पन्न नही होगा।

कल बुधवार को ही दरभंगा में जो हुआ वह अति निंदनीय व चिंतनीय है। बुधवार को कोरोना से पटना में दरभंगा के एक व्यक्ति की मौत के बाद एक शमशान में दाह संस्कार की व्यवस्था की गई। मगर, शाम सात बजे शव के आने की सूचना पर स्थानीय लोग एकत्रित होकर वहां अंत्येष्टि का विरोध करने लगे।

कई थानों की पुलिस व पदाधिकारी समझाने पहुंचे। शव जलाने से कोरोना का संक्रमण नही फैलता है। लेकिन, इस मुद्दे पर एकजुट स्थानीय लोग अपनी बातों पर अड़े रहे। आक्रोश में चिता के लिए सजी लकड़ियों तक को नदी में फेंंक डाला। अंततः टकराव से अलग हट लोगों को समझाने में असफल पुलिस ने किसी अन्य जगह अंत्येष्टि का मन बनाया। मृतक के परिवार व संबंधी के एक दर्जन लोगों को इसके लिए तैयार कर दूसरे शमशान के लिए मन बना लिया।

मृतक के वार्ड के पार्षद सह उपमहापौर बदरुजम्मा खान व शांति समिति के वरिष्ठ सदस्य नवीन सिन्हा को भी सहयोग के लिए प्रशासन ने आग्रह किया। इस प्रकरण में तब तक रात्रि के बारह बज चुके थे। मृतक के परिजन के साथ शव लेकर ये लोग दूसरे शमशान पहुंचे। गड्ढा खोदने के लिए दो लोग तैयार होकर इस कार्य को तो कर दिया, लेकिन एंबुलेंस से शव पहुंचते ही ये लोग भी चले गए। और तो और मृतक के परिजन में उसके परिवार के चार लोग छोड़ मात्र दो नजदीकी सदस्य ही शमशान तक पहुंचे, बाकी लोग रास्ते से ही छोड़ कर चल दिए। प्रशासन की ओर से पदाधिकारी व पुलिसकर्मी शमशान से थोड़ी दूरी पर तैनात रहे।

अंततः देर रात तीन बजे तक बदरुजम्मा खान व नवीन सिन्हा  ने मात्र दो लोगों की मदद से सड़क से तीन सौ मीटर दूर उबड़-खाबड़ रास्ते से लकड़ी व अंत्येष्टि में प्रयोग होने वाले अन्य सामान शमशान तक पहुंचाया। मृतक के परिजन किसी तरह पीपीई किट पहन शव को चिता तक पहुंचा कर अंत्येष्टि की।  सुबह तीन बजे सभी सुरक्षा मानक अपनाकर ये लोग घर लौटे।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ का कहना है, कोरोना से मृत शव के विशेष पैकिंग के बाद उसे खोले बिना अंत्येष्टि करना है ताकि संक्रमण नही फैले। शव जलने के बाद उसके राख से कोई हानि नही होती है। लेकिन इस सबसे अलग लोग भ्रांतियों में पड़कर इंसानियत को तार तार कर रहे हैं।
इसी तरह दो अन्य मुस्लिम समुदाय के कोरोना से मौत के उपरांत भी दो कब्रिस्तान में दफन के विरोध पर अन्य तीसरे कब्रिस्तान में काफी विवाद के बाद कुछ बुद्धिजीवियों के सहयोग से शव की मिट्टी (दफ़न) हो सकी थी।

दरभंगा में अभी तक कोरोना से मृत मुस्लिम व हिंदू दोनों समुदाय के शव निष्पादन में सहयोगी बन कार्य को अंजाम देने वाले समाजसेवी नवीन सिन्हा ने प्रशासन से इस दिशा में लोगों को जागरूक व पूरी जानकारी देने के साथ आगे शव अंत्येष्टि के नियम बनाने की भी मांग की है।

बुधवार को कोरोना से मृत हिंदू शव की अंत्येष्टि में सहयोग करने वाले शहर के उप-महापौर बदरुज़्ज़मां खान के कार्य को असल इंसानियत का कार्य बताते हुए अन्य लोगों से भी सुरक्षा मानक अपनाकर इस विपरीत परिस्थिति में मानवता को ज़िंदा रखने की अपील की है। जानकारी के अनुसार, नवीन सिन्हा  कबीर सेवा संस्थान के सदस्य भी हैं, जिसमें एक दर्जन सदस्य लगातार बारह महीने अपने खर्च पर लावारिस शव की अंत्येष्टि सश्रम करते आ रहे हैं।दरभंगा में कोरोना से मौत के बाद मरी हुई इंसानियत को रातभर जिंदा करते रहे नवीन-बदरुजम्मा

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Patna

ये है लालू का घोबिया पाट, खोजा बहू ऐश्वर्या राय की काट, बड़ी बहन करिश्मा की RJD में एंट्री

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ये है लालू का घोबिया पाट, खोजा बहू ऐश्वर्या राय की काट, बड़ी बहन करिश्मा की RJD में एंट्री

पटना, देशज न्यूज। ये है लालू का घोबिया पाट। कहते हैं लालू प्रसाद के पास हर मर्ज की दवा हे। देखिए ना कितना ड्रामा हुआ चंद्रिका प्रसाद की बेटी ऐश्वर्या व तेजप्रताप को लेकर लेकिन अब चंद्रिका राय के परिवार की एक अन्य सदस्य को राजद में इ्रट्री दिलाकर लालू ने सबको चित कर दिया है।

गुरुवार को नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की उपस्थिति में करिश्मा राय राजद में आई हैं। करिश्मा विधानचंद्र राय की बेटी हैं। विधानचंद्र राय  सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के समधी चन्द्रिका राय के बड़े भाई हैं।

विधानचंद्र राय व लालू यादव में पुरानी दोस्ती रही है। ऐसे में, चुनावी साल में लालू ने उनकी बेटी को पार्टी में शामिल कर चंद्रिका राय पर दबाव बनाने की कोशिश की है। तेजप्रताप यादव से तलाक प्रकरण को लेकर लालू व चंद्रिका राय के परिवार में 36 का आंकड़ा है। राजद के इस कदम को अहम मान जा रहा है। विधानचंद्र राय एक व्यवसायी हैं।चन्द्रिका राय के परिवार से इनकी कुछ दूरियां हैं।

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